blogid : 12455 postid : 1311032

ओउम संग सत्संग की पहिचान

Posted On: 31 Jan, 2017 Others में

jagate rahoJust another weblog

harirawat

430 Posts

1015 Comments

कभी कभी मेरा तन कहीं और मन कहीं,
पर मैं दोस्तों को भूलता नहीं !
मैं तो अपनी ही कह रहा हूँ,
आप भूल मत जाना कहीं !
कल कुदरत ने करिश्मा दिखलाया,
मेरी समझ में कुछ नहीं आया,
आज फिर लाफ्टर क्लब ने
ओउम का मतलब बतलाया !
ओउम से जुड़ते हैं लोग,
ओउम से शुरू होता है योग,
ओउम ओउम से शांति मिलती,
बागों में कलियाँ हैं खिलती,
ओउम ही है स्वर्ग की सीढी,
ओउम से तार जाती पीढी !!

आओ ज़रा संग संग होलें,
दिल दिमाग के परदे खोलें,
दिल ही दिल आपस में मिलेंगे,
अंतर बगिया में फूल खिलेंगे,
संगती अनार बन निकलेगा,
मन मिठास ये जिह्वा लेगा !
पर संगति का हो अच्छा जोड़,
कोई न सके जिसको तोड़,
सन्त समागम सदा निराला,
पहननी होगी सत-रंगी माला,
तब होगी सत्संगी पहिचान,
कितना मिला मान सम्मान !
शुभ कामनाओं के साथ हरेन्द्र

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग