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मैं दीवाना मस्तराम!

Posted On: 9 Mar, 2019 Others में

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harirawat

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मैं दीवाना मस्तराम, शब्दों से शब्द मिलाता हूँ,
सभ्यता गंगा-यमुना की जन जन तक पहुंचाता हूँ,
धरती मां को शीश झुका कर कविता रोज बनाता हूँ,
परंपरा और संस्कृति की अमर ज्योति जलाता हूँ,
हर पंक्ति में जोश भरा है और जवान सीमा पे खड़ा है,
जब भी संग्राम हुआ पाक से हर बार वह पाँव पड़ा है !
ये है फितरत पाकिस्तान की आतंकी को पाल रहा है,
आर्थिक तंगी, इज्जत बचाने स्वयं कटोरा लिए खड़ा है !
मैं रहता मदमस्त सदा, अपनी सियत बनाता हूँ,
मैं दीवाना मस्तराम शब्दों से शब्द मिलाता हूँ ! 1 !
सुबह सबेरे लाली सूरज की नैनो में बसाता हूँ,
12 नामों की माला फेरकर जल अभिसेक कराता हूँ !
हर फूल को ग्रह बनाकर माला उसकी बनाता हूँ,
सुबह की आरती गागा करके त्रिदेव तक पहुंचाता हूँ !
तुलसी रचित हनुमान चालीसा, बजरंगी को सुनाता हूँ,
जरा अकल दे पाकिस्तान को अपनी इच्छा बतलाता हूँ !
जीवन के हर मोड़ पर, सावधानी से कदम बढ़ाता हूँ,
पाक के नापाक इरादों पर चिंगारी ही सुलगाता हूँ !
अपने देश को स्वर्ग बनाने रंग बिरंगे फूल खिलाता हूँ,
मैं दीवाना मस्तराम, शब्दों से शब्द मिलाता हूँ ! 2 !
कभी कभी ये मिले शब्द आइटम बम बन जाते हैं,
यही वजह है देश के दुश्मन नजर उठा नहीं पाते हैं !
की गुस्ताखी पाकिस्तान ने और पुलवामा कांड किया,
हमने पाक के भीतर जाकर आतंकी कैम्प को जला दिया !
उन्होंने छिपकर 40 मारे अपने तीन सौ गँवाए हैं,
अपने फ़ाईटर बम गिराके* बालकोट से सकुशल लौट आए हैं ! (*बालाकोट आतंकियों का ट्रेनिंग कैम्प)
मिग 21 की दुर्घटना, यफ 16 हमने भी मार गिराया था,
हमारा वीर फाइटर अभिनन्दन को पाक ने बंदी बनाया था,
प्रधान मंत्री ने पकिस्तान पर जब यूयनओ का प्रेशर डाला,
सीना तान के लौट आया, अभिनंदन पड़ी गले में माला !
रंगीन तबीयत चेहरे पर मुस्कान, हँसता और हँसाता हूँ,
मैं दीवाना मस्तराम शब्दों से शब्द मिलाता हूँ ! 3 ! हरेन्द्र रावत

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