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ये तुम्हें क्या हो रहा है!

Posted On: 9 Aug, 2019 Others में

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harirawat

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जो तुम कल थे, मटकते खिलखिलाते थे,

अरमान थे,  ऊँचे गगन में उड़ान भरते थे,

अपनी ही मर्जी से रस्ता बदलते थे,

तुम्हारे कदमों की आहट  से पत्थर राहों के पिघलते थे,

सीना ताने खड़े पर्वत, झुक झुक सलाम करते थे,

शेर, बघेरे, मगरमच्छ, भालू  तुम्हारी छाया से डरते थे,

कंकण पत्थर पड़े राह पर राहों से हट  जाते थे.

कल कुछ तो था तुममें तुम अपने में मस्त थे,

पहलवान नहीं थे, पर बॉडी बिल्डर जबरदस्त थे !

अचानक सब बदल  गया’

जो कल था आज नहीं रहा !

 

 

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