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आप सुधरे तो जग सुधरा

Posted On: 12 Aug, 2011 Others में

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Harish Bhatt

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आखिर कोई इंसान लापरवाह कैसे हो सकता है, लगभग आठ घंटे के वर्किंग कॉन्सेप्ट वाले फारमेट में काम करने के आदी हो चुके आदमी के पास अपने व्यक्तिगत कामों के लिए लगभग 16 घंटे का पर्याप्त समय होता है. इन 16 घंटे का उपयोग अपनी मर्जी से करने के लिए वह पूरी तरह से आजाद होता है. इसके अलावा नौकरी पेशा लोगों के लिए सप्ताहिक अवकाश के अलावा साल भर में 30-40 छुटि्टयों का प्रावधान भी होता ही है. लेकिन उसके बाद भी वह आदमी अपने वर्किंग पैलेस में लापरवाही के वह उदाहरण प्रस्तुत करता रहता है, जो समझ से बाहर होते है. हां यहां पर एक बात हो सकती है, आप चाहे अपने आफिस के आठ घंटे के वर्किंग टाईम को अपनी ईमानदारी और मेहनत से कुछ कम कर सकते है, पर न जाने क्यों लोग इन आठ घंटों में भी ईमानदारी से काम नहीं करते है. और फिर कहते फिरते है कि इस देश में समस्याओं का भंडार भरा पड़ा है, जबकि वह खुद नहीं जानते कि इन समस्याओं की जड़ में आपकी स्वयं की लापरवाही ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार है. खुद ही सोचिए अगर आप आठ घंटे ईमानदारी से काम कर लेंगे तो मुझे नहीं लगता कि कोई भी काम पेंडिंग हो सकता है या कोई भी समस्या पैदा हो सकती है. लेकिन दुनिया व समाज को बदलने का जज्बा दिल में लिए दिन-रात दुनिया-जहां को कोसने वाले खुद को ही क्यों नहीं बदलते, ताकि आप सुधरे तो जग सुधरे. कहीं भी देख लीजिए मेरी बात गलत नहीं हो सकती है- लापरवाह किस्म के इंसानों से हमारे बैंक, स्कूल, डाकघर, हॉस्पिटल आदि सरकारी ऑफिस भरे पड़े हुए है. जहां पर भारी-भरकम तनख्वाह लेने वाले कर्मियों की काम करने में नानी मर जाती है. इन कर्मियों की कार्यशैली का असर अब प्राइवेट ऑफिसों में आने लगा है. जब तक इस देश का हरेक इंसान ईमानदार नहीं होगा, तब तक इस देश से भ्रष्टचार कभी खत्म नहीं हो सकता है, चाहे कितना भी हो-हल्ला कर लीजिए, कितने भी आंदोलन चला लीजिए, कितने भी कानून बना लीजिए, लेकिन यह सत्य है कि भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए हर इंसान का ईमानदार होना जरूरी है, क्योंकि जब ईमानदार जनता ईमानदारी से अपने नेताओं का चुनाव करेंगी तो ईमानदारी से सरकार चलाना उन नेताओं की मजबूरी होगी. और इसकी शुरूआत हमको खुद से करनी होगी, सबसे पहले हमको खुद अपने प्रति ईमनदार होना होगा, एक बात बचपन से सुनता आ रहा हूं कि समस्याओं के भंवर में फंसे देश में भगत सिंह तो पैदा हो, पर पड़ोसी के घर में. ऐसा कुछ नहीं है, बस आप खुद ईमानदार हो जाइये, सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा फिर किसी भगत सिंह या महात्मा गांधी या बाबा की जरूरत नहीं है, वैसे भी भ्रष्टाचार के हमाम में सभी नंगे है, बस कोई थोड़ा ज्यादा या थोड़ा कम. हमको अपने दिलों-दिमाग से सरकारी- गैर सरकारी नौकरी की बात हमेशा के लिए निकाल देनी चाहिए, क्योंकि वक्त से पहले से और किस्मत से ज्यादा कभी किसी को नहीं मिला है, ईमानदारी से अपना काम करते चलिए, सब कुछ अपने आप सुधरता जाएगा.

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