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कब तलक मरते रहेंगे लोग मेरे गांव के

Posted On: 21 Apr, 2017 Others में

Harish Bhatt

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नेरवा पुलिस ने हादसे में मारे गए बस चालक कमल पुत्र सरिया राम निवासी ग्राम निमगा, त्यूनी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. बुधवार को उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर गुमा अंतरोली के पास निजी परिवहन कंपनी की यात्री बस गहरी खाई से लुढ़ककर टोंस नदी में समा गई. हादसे में 45 यात्रियों की मौत हो गई। कुछ यात्रियों के नदी में बहने की भी चर्चा है. हादसे के कारण बस के स्टेयरिंग में तकनीकी खराबी आना बताया जा रहा है, इसकी वजह से चालक मोड़ नहीं काट पाया। हालांकि बताया यह भी जा रहा है कि जिस स्थल पर दुर्घटना हुई, वहां सड़क भी खस्ताहाल है. इंसान मजबूरी में ही जान हथेली पर लेकर निकलता है. जौनसार बावर के लोग हर रोज ऐसा ही सफर करते हैं. नाम के लिए तो यहां 50 से अधिक निजी बसों के संचालन के लिए परमिट मिले हुए हैं, लेकिन एक आध बसें ही रूट पर दौड़ती हैं. परिवहन निगम की इकलौती बस साहिया से हरिद्वार तक के लिए है. बाकी ट्रैकर यानि छोटे वाहन ही यात्रियों को ढोते हैं. ऐसे में हर वाहन ओवरलोडेड रहता है. पहाड़ी और खस्ताहाल सड़कों पर ऐसे सफर की हकीकत बयां करती हैं बुधवार को हुए बस हादसे के बाद सबको जागने की जरूरत है. आम लोगों के साथ-साथ शासन-प्रशासन को भी. सिर्फ मृतक बस चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके क्या हासिल होगा. यदि ओवरलोड या तेज गति है तो परिवहन विभाग, सड़क खराब हो तो लोक निर्माण विभाग और यदि बिना सड़क परीक्षण के दवाब में गाड़िया चलवाने वाले नेता के खिलाफ मुकदमा चल जाये तो फिर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावर्त्ति न हो. जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय न होने और सरकार की उदासीनता के चलते कब तलक मरते रहेंगे लोग मेरे गांव के. इस सवाल का जवाब जरूरी है.

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