blogid : 4683 postid : 132

यमदेव का इस्तीफा: हिन्दी हास्य कविता (Hasya Kavita)

Posted On: 8 Jul, 2011 Others में

Hasya KavitaHasya Kavita in Hindi, Hasyakavita, Funny Shayari, Funny Hindi Poems, हिन्दी हास्य कविता, हास्य कविता

Hasya Kavita

272 Posts

172 Comments


आजकल हमारे ऑफिस में इस्तीफे देने का दौर सा चल पड़ा है. इस्तीफों की ऐसी भरमार देख हमारे मैनेजर को भी एक मस्ती सुझी और उसने एक कविता सबको पढ़ने के लिए भेज दी. यह कविता इतनी मजेदार थी कि पढ़ने के बाद हम लोट पोट होकर हंसने को मजबूर से हो गए. चलिए आप भी पढ़िए इस हास्य कविता को और ठहाके लगाकर इतना हंसिए की शमां ही बंध जाएं.


yamraj3यमदेव का इस्तीफा: हिन्दी हास्य कविता


एक दिन

यमदेव ने दे दिया

अपना इस्तीफा।


मच गया हाहाकार

बिगड़ गया सब

संतुलन,

करने के लिए

स्थिति का आकलन,

इन्द्र देव ने देवताओं

की आपात सभा

बुलाई


और फिर यमराज

को कॉल लगाई।


‘डायल किया गया

नंबर कृपया जाँच लें’

कि आवाज तब सुनाई।


नये-नये ऑफ़र

देखकर नम्बर बदलने की

यमराज की इस आदत पर

इन्द्रदेव को खुन्दक आई,


पर मामले की नाजुकता

को देखकर,

मन की बात उन्होने

मन में ही दबाई।

किसी तरह यमराज

का नया नंबर मिला,

फिर से फोन

लगाया गया तो

‘तुझसे है मेरा नाता

पुराना कोई’ का

मोबाईल ने

कॉलर टयून सुनाया।


सुन-सुन कर ये

सब बोर हो गये

ऐसा लगा शायद

यमराज जी सो गये।


तहकीकात करने पर

पता लगा,

यमदेव पृथ्वीलोक

में रोमिंग पे हैं,

शायद इसलिए,

नहीं दे रहे हैं

हमारी कॉल पे ध्यान,

क्योंकि बिल भरने

में निकल जाती है

उनकी भी जान।


अन्त में किसी

तरह यमराज

हुये इन्द्र के दरबार

में पेश,

इन्द्रदेव ने तब

पूछा-यम

क्या है ये

इस्तीफे का केस?

यमराज जी तब

मुँह खोले

और बोले-


हे इंद्रदेव।

‘मल्टीप्लैक्स’ में

जब भी जाता हूँ,

‘भैंसे’ की पार्किंग

न होने की वजह से

बिन फिल्म देखे,

ही लौट के आता हूँ।

‘बरिस्ता’ और ‘मैकडोन्लड’

वाले तो देखते ही देखते

इज्जत उतार

देते हैं और

सबके सामने ही

ढ़ाबे में जाकर

खाने-की सलाह

दे देते हैं।


मौत के अपने

काम पर जब

पृथ्वीलोक जाता हूँ

‘भैंसे’ पर मुझे

देखकर पृथ्वीवासी

भी हँसते हैं

और कार न होने

के ताने कसते हैं।

भैंसे पर बैठे-बैठे

झटके बड़े रहे हैं

वायुमार्ग में भी

अब ट्रैफिक बढ़ रहे हैं।

रफ्तार की इस दुनिया

का मैं भैंसे से

कैसे करूँगा पीछा।

आप कुछ समझ रहे हो

या कुछ और दूँ शिक्षा।


और तो और, देखो

रम्भा के पास है

‘टोयटा’

और उर्वशी को है

आपने ‘एसेन्ट’ दिया,

फिर मेरे साथ

ये अन्याय क्यों किया?

हे इन्द्रदेव।

मेरे इस दु:ख को

समझो और

चार पहिए की

जगह

चार पैरों वाला

दिया है कह

कर अब मुझे न

बहलाओ,

और जल्दी से

‘मर्सिडीज़’ मुझे

दिलाओ।

वरना मेरा

इस्तीफा

अपने साथ

ही लेकर जाओ।

और मौत का

ये काम

अब किसी और से

करवाओ।


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (41 votes, average: 4.73 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग