blogid : 4683 postid : 311

ना जानें इंसान क्या चाहे : कविता (hasya kavita)

Posted On: 12 Jan, 2012 Others में

Hasya KavitaHasya Kavita in Hindi, Hasyakavita, Funny Shayari, Funny Hindi Poems, हिन्दी हास्य कविता, हास्य कविता

Hasya Kavita

272 Posts

172 Comments

hasya kavita


हाल ही में एक कविता पढ़ी जिसे पढ़कर लगा कि यह वह चीज है जिसे शायद आज हम आम आदमी का दर्द मान सकते हैं. आज आम आदमी की क्या व्यथा है इसे समझ पाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है.


पढिएं यह हास्य कविता और जानिए आम आदमी का दर्द. कविता के मर्म को जरा गौर से समझिएंगा.

चुटकुले ना जानें इंसान क्या चाहे : हास्य कविता

कैलैंडर की तरह महबूब बदलते क्युं हैं
झूठे वादों से ये दिल बहलते क्युं हैं ?

अपनी मरज़ी से हार जाते हैं जुए में सल्तनत,
फ़िर दुर्योध्न के आगे हाथ मलते क्युं हैं ?


औरों के तोड डालते हैं अरमान भरे दिल,
तो फ़िर खुद के अरमान मचलते क्युं हैं ?

दम भरते हैं हवाओं का रुख मोड देने का ,
फ़क़्त पत्तों के लरज़ने से ही दहलते क्युं हैं ?

खोल लेते हैं बटन कुर्ते के, फ़िर पूछ्ते हैं,
न जाने आस्तीनों मे सांप पलते क्युं हैं ?

नन्हा था इस लिए मां से ही पूछा ,
अम्मा ! ये सूरज शाम को ढलते क्युं हैं ?

वो कहते हैं नाखूनो ने ज़खम “दीया”,
नाखूनों से ही ज़खम सहलते क्युं हैं ?

हिन्दी चुटकुले, हिन्दी शायरी, लड़की पटाने का मस्त तरीका


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (12 votes, average: 3.33 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग