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Hasyakavita in Hindi: गरीब की बड़ाई

Posted On: 28 Apr, 2013 Others में

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Hasya Kavita

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जरूरत चीजों की दामों में महंगाई पर
उनको फिक्र नहीं है,
गरीब के दर्द का उनके बयानों में जिक्र नहीं है,
मगर फिर भी देशभक्ति दिखाने का नारा दिये जाते हैं,
कौन समझायें उनको
वफादारी के सबसे बड़े सबूत हैं कुत्ते
वह भी रोटी न देने पर गद्दार हो जाते हैं।
————


बरसों से सुन रहे हैं
सुरसा की तरह बढ़ रही महंगाई,
इंतजार है हमें
कोई हनुमान आकर करे लड़ाई।
इंसानों में फरिश्ते नहीं होते,
हुक्मराम और प्रजा में बराबर के रिश्ते नहीं होते,
महलों में बैठे लोग
मशगुल हैं अपने ही आप में
कभी लड़ते लूट की कमाई पर
कभी करते एक दूसरे की बड़ाई।


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