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Hasya Kavita : आत्महत्या-रोधी कविता

Posted On: 3 Feb, 2013 Others में

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Hasya Kavita

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हास्यकविता काका हाथरसी की : आजकल विभिन्न बोर्डों और एग्जामों के रिज्लट आने का समय है. ऐसे समय में माता-पिता की परेशानी में एक एडिशनल परेशानी यह आ जाती है कि बच्चों के अंदर आत्महत्या करने का विचार ना आए. अगर आप भी अपने बच्चों के प्रति इस विषय में गंभीर हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. काका हाथरसी की यह प्रसिद्ध आत्महत्या-रोधी कविता इस रोग का रामबाण इलाज है.


आइएं इस कविता को पढ़े और हो सके तो यह कविता अपने बच्चों को भी पढाएं उम्मीद है उनके दिमाग से आत्महत्या करने का भूत फुस्स हो जाएगा.

काका हाथरसी की हास्यकविता

परमात्मा ने आत्मा बख़्शी है श्रीमान ।

करे आत्महत्या उसे समझो मूर्ख महान ॥

समझो मूर्ख महान बुरे दिन वापस जाएँ ।

अटल नियम है दु:ख के बाद सुखानन्द आएँ ॥

मिली आत्मा, प्रभु की समझो इसे अमानत ।

लानत उन्हें अमानत में जो करें खयानत ॥

ईश्वर ने जीवन दिया, किया उसे स्वीकार |

भाग्यहीन कुछ सरफिरे, करें मौत से प्यार ||

करें मौत से प्यार, जवाँ लड़के आते हैं |

उग्रवाद आतंकवाद में घुस जाते हैं ||

करें देश से द्रोह, विदेशी राह पर भटकें |

कोई जेल में सड़ें, कोई फाँसी पर लटकें ||


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