blogid : 7389 postid : 13

मैं मधुमेह दिवस क्यों मनाऊं ?

Posted On: 16 Nov, 2011 Others में

हास्य- व्यंग्य के विविध रंगJust another weblog

Gopal Tiwari

32 Posts

44 Comments

मैं मधुमेह दिवस क्यों मनाऊं ?

मैं मधुमेह दिवस नहीं मनाऊंगा, क्योंकि मै जानता हूं कि इस दिन मेरे कुछ और अधिकार छिन जाएंगे। मुझपर कुछ और ताने कसे जाएंगे। सरकार मनाती है तो मनाए। घर वाले मनाते हैं तो मनाएं। मैं सरकार का क्यों साथ दूं। आखिर सरकार ने मेरे लिए किया हीं क्या है? सरकार के करतूत के चलते मेरे मुंह पर ताले पड़ गए हैं। मेरी बीवी अब परायी हो गयी है। मेरे बच्चे मेरे बच्चे नहीं रहें। ऐसा नहीं कि वे मुझे छोड़कर कहीं चले गए हैं। और मेरे लड़के किसी दूसरे के लड़के हो गए हैं । लेकिन अपने जब अपनापन न दिखाए तो उसे गैर कहना हीं ठीक होगा। वे इसी घर में मुझपर हुक्म चला रहे हैं। और में कही एफआईआर भी दर्ज नहीं करा सकता। आप कहेंगे कि मैं यह क्या बकवास कर रहा हूं। आपको यह भी लग रहा होगा कि कहीं मैने पी तो नहीं रखी है। नहीं यार मैं शराब क्या चाय तक नहीं पी सकता। मुझे मधुमेह होने के बाद बीवी ने मेरी तख्ता पलट कर दी है। मेरी सत्ता अब जाती रही। मेरी इच्छाओं का गला घोंट दिया गया। मेरे अरमानों कुचल दिया गया। अन्ना हजारे की तरह मैं भी यह मानता हूं कि अभी भी हम गुलाम हैं। अपनों के गुलाम। लोकतंत्र में अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंतत्रा तो सबको है लेकिन अपनी पसंद का खाना खाने की सबको क्यों नहीं आजादी है ? आखिर अन्न जल पर तो सबका समान अधिकार कहा गया है। आखिर बीवी को यह क्यों विशेषाधिकार मिले कि वह पति के खाने-पीने पर नजर रखे। लोग नारी कि दयनीय स्थिति के बारे में चर्चा करते नहीं थकते हैं। कोई यहां आकर तो देखे कि नारी की स्थिति खराब है कि पुरूष की।

मैं सरकार से सख्त नाराज हूं। आखिर सरकार डाॅक्टरों के खिलाफ क्यों कारवाई नहीं करती जो मधुमेह रोगियों खाने के अधिकार को छिनने पर तुले हुए हैं। वह मनगढंत रिसर्चों के द्वारा नित नई पाबंदियों की सिफारिस कर रहे हैं। और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

और कुछ भले हीं अनिश्चित है लेकिन यह निश्चित है कि इस मधुमेह दिवस के बाद मधुमेह रोगियों के अधिकारों में और अधिक कटौती हो जाएगी। आप माने या न माने अन्ना हजारे के बाद जंतर-मंतर पर अगला विशाल प्रदर्शन मधुमेह रोगी हीं करने जा रहे हैं। मधुमेह रोगी को सबकुछ खाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर धरना देंगे जिसमे लाखो मधुमेह रोगी भाग लेंगे। मेरी बात को आज सरकार भले हीं अवहेलना कर दे लेकिन भविष्य में नहीं कर पाएगी। क्यों आने वाले दिनों में मेरी यानी मधुमेह रोगियों की संख्या इतनी बढ़नेवाली है कि हम जिसे चाहे गद्दी पर बैठा सकते हैं जिसे चाहे उतार सकते हैं। आने वाले कुछ हीं समय में मधुमह रोगी आपको घर-घर में मिल जाएंगे। अगर राजनेताओं ने उनकी मांग नहीं मानी तो वे मत बहिष्कार करेंगे।

आप कहेंगे कि सरकार पर क्यों बेवजह आरोप लगा रहा हूं आखिर सरकार ने क्या किया है? तो सुन लीजिए कि उसने मधुमेह उन्मूलन के नाम पर लोगों को गुमराह करना शुरू कर दिया है उसने गली मुहल्ले में मधुमेह के बारे में लोगो को अवगत कराने के लिए खम्भे गाड़ दिए है। मधुमेह रोगी क्या खाएं क्या नहीं खाएं बताया जा रहा है। सरकार के इसी बाचालता के चलते आज बच्चे-बच्चे जानते हैं कि मधुमेह रोगियों को क्या नहीं खाना चाहिए। मैं क्या खाऊंगा इसको सरकार निर्धारित करने वाली कौन होती है।

मधुमेह के दुष्प्रचार ने पूरे परिवार के अनुशासन को भंग कर दिया है। आज मेरा परिवार मेरा कहा नहीं मानता है। जब मैं कहता है कि बेटा जाकर थोड़ा रशगुल्ला लाओ तो कहती है कि आपको रसगुल्ले मना है पापा। बताइए मैं बड़ा हूं कि वह। क्या वह मुझसे ज्यादा जानती है?

हमारे यहां विष को विष का औड्ढध बताया गया है। मतलब कि अगर मुझे शुगर हो गया है तो वह शुगर खाने से हीं जाएगा। लोगों को आता जाता तो कुछ हैं नहीं पर लगते हैं ज्ञान बघारने। मै उनको कैसे समझाऊं कि मै बड़ा विद्वान हूं।

ठीक हीें हुआ सुगर ने सबकी परीक्षा ले ली। अब मुझे ज्ञान की प्राप्ती हो चुकी है।

बताइए डाॅक्टर ने मुझे तीन मील की दौड़ लगाने की सलाह दी है। भला बीमार आदमी को दौड़ लगाना चाहिए कि आराम करना चाहिए।

मैं कहता हूं कि मैं बिल्कुल स्वस्थ्य हूं मुझे कोई रोग नहीं हुआ है। कारण कि आधुनिक विज्ञान के चिकित्सा शोधों से यह साबित हो चुका है कि अधिकांश रोग मनोदैहिक होते हैं। अर्थात उस रोग के बीज मन में मौजूद होते हैं। जब इस बात का पता नहीं था तो लोगों ने खुब मधुमेह रोगियों पर अत्याचार किया लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि मैं अपने को बिल्कुल स्वस्थ्य मान चुका हूं। जब मन खुद को रोगी नहीं मानता तो शरीर कि क्या मजाल की वह रोगी रह जाए।

यह सच है कि दुख की घड़ी में अपने भी साथ छोड़ देते हैं। इस यर्थाथ का पता मुझे तब चला जब बीवी ने मेरे हाथ से लड्डु छिन लिए। उसका जनम-जनम का साथ निभाने का वादा झूठा था। उसके कसमे-वादे सब फरेब थे। तुलसी बाबा ठीक हीं कह गए हैं धीरज, धर्म और मित्र और नारी आपत काल परिखहू चारू।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग