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जय हो दामाद्जी की!सुभाष बुड़ावन वाला

Posted On: 28 May, 2014 Others में

koi bhi ladki psand nhi aati!!!Just another weblog

सुभाष बुड़ावन वाला

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जय हो दामाद्जी की!!! कल तक बड़े बड़ों की बोलती बंद थी | बस इनेगिने छुटभैये नेताओं की जुबान किसी कतरनी की तरह चल रही थी |और जो चलती है वही फिसलती है |लेकिन अब सभी की जुबान चल रही है और बड़े सलीके से चल रही है बिना किसी फिसलन या विचलन के |और चले भी क्यों न ?अब समय ही कुछ ऐसा है |यदि अब भी नहीं तो फिर कब चलेगी |अब भी खामोश रहे तो कहने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं |आलाकमान अब चुप्प रहने वालों को नहीं बख्शेगा |जो अब खामोश रहेगा बागी करार दिया जायेगा |आज की राजनीति में बागियों का क्या काम |काम का वही है जो अपने आका का पालतू बन कर रहे |केवल बन कर ही न रहे ,इस बात का निरंतर सबूत भी देता रहे कि वह ‘हिज़ मास्टर्स वायस’ है | उसके लिए वे हर चीज फालतू है जो अपने पालतू होने का पुख्ता प्रमाणपत्र नहीं देगा | आलाकमान आजकल कुपित है |विरोधी अब तो मानो सारी मर्यादा भूल गए हैं |उन्होंने दामादजी के खिलाफ जो दुष्प्रचार शुरू किया है उससे तो बनाना रिपब्लिक की संस्कृति खतरे में पड़ गई है |वैसे दामादजी बड़े आदमी हैं |वह “मैंगो पीपिल” क्या कहते हैं कि परवाह नहीं करते |वह बिजनेसमैन हैं और एक जेन्टिलमैन की तरह पैसा बनाते हैं |उनके बाग बगीचों में आम आदमी के बाग बगीचों की तरह फल फूल नहीं लगते बल्कि नीले हरे लाल नोट उगते हैं |वह अपने बगीचे में न तो बीज बोते हैं ,न खेत की निराई करते हैं ,न सींचते हैं ,फिर भी खूब फसल लहलहाती है |दामादजी चमत्कारी पुरुष हैं |वह जो चाहे कर सकते हैं |वह हमेशा वही करते रहे हैं जो वह चाहते हैं |उनके नाम सुनकर सारे कानून शिथिलऔर प्रक्रियों की जकड़ हो जाती है |किसान अपनी जमीन उनके लिए छोड़ देते हैं |बड़ी बड़ी कंपनियां अपनी जमीन उन्हें कौडियों के भाव बेच देती हैं |उनकी इच्छा सबके लिए शिरोधार्य है |वही महज दामाद नहीं दामाद शिरोमणि हैं |उनकी महिमा अपरम्पार है | यही वजह है कि आजकल सारा सरकारी अमला अतिव्यस्त है |सबके पास एक ही काम है कि विरोधियों के निर्लज्ज लांछनों का जवाब देना ,जो दामादजी को इंगित करके लगाये जा रहे हैं |विरोधियों को तो अपनी संस्कृति के पराभव की चिंता नहीं है पर सरकार को तो है |दामाद के प्रति ऐसी अशिष्टता को कौन बर्दाश्त कर सकता है ?दामाद तो देवता समतुल्य होता है |वैसे भी राजनीति में दामादों को हमेशा अतिरिक्त महत्व मिलता है |आलाकमान के लिए इमोशनली एक कठिन समय है और तमाम उसके पदाधिकारियों के लिए परीक्षा की घड़ी |यह सबके लिए आलाकमान के प्रति अपनी निष्ठा के सार्वजनिक प्रदर्शन का मौका है |निष्ठाओं के प्रमाणन के इस महायज्ञ जो जैसी आहुति देगा ,उसका राजनीतिक भविष्य वैसा ही होगा | वैसे तो दामादजी इतने सक्षम हैं कि उन्हें किसी की पैरोकारी की ज़रूरत ही नहीं है |वह वाकपटु हैं |उनकी तरकश में अकाट्य तर्कों के ऐसे ऐसे विषबुझे बाण हैं जिनसे वह अपने समस्त विरोधियों को देखते ही देखते नेस्तनाबूद कर सकते हैं |उन्होंने ही तो सारी दुनिया को बताया कि हमारा मुल्क अब भारतवर्ष नहीं बनाना रिपब्लिक है (यानि खाने पचाने के लिए एक केले जैसा स्वादिष्ट फल सरीखा ) और यहाँ का आम आदमी मैंगो जैसा सीधा सहज सरस आम जैसा ,जिसे जो चाहे जैसे चाहे गड़प कर जाये |इस बनाना रिपब्लिक के दामाद की शान में गुस्ताखी करने वाले नादान हैं |उनको उनकी ही भाषा में जो जवाब नहीं देगा ,वह राजद्रोही है | दामादजी ,आप निश्चिंत रहें |आपका कोई कुछ नहीं बिगाड पायेगा |-सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीनाथ कार्नर,खाचरौद[म्प]

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