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अच्छे दिनों के लिए......नमो भक्ति कर

Posted On: 4 Jun, 2015 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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……………………………………………….आम जनता क्यों यह समझ लेती है कि उसके अच्छे दिन आने वाले हैं | भारतीय जनता पार्टी की जीत हुयी थी अच्छे दिन उसके आएंगे | नमो की जय जय कार हुयी अच्छे दिन उनके आये | देश विदेश का भ्रमण सुगम हुआ | दिल्ली मैं भी भाषण देना हो तो वहां जाने के लिए हेलीकॉप्टर मैं ही जाओ | करोड़ों का सूट बूट ,पहिनो | एक दिन मैं ही कई कई बार लिबास बदलकर भारत की छवि पर चार चाँद लगाओ | जो भगवन की भक्ति करता है अच्छे दिन उनके आ ही जाते हैं | इतना यदि ज्ञान है तो नमो भक्ति से ओतप्रोत हो जाओ ,मंदिर बना कर पूजो ,समझो अच्छे दिन आ ही जायेंगे | अच्छे दिनों के लिए भगवन की तपश्या करनी पड़ती है तभी अच्छे दिनों का बरदान मिलता है | रावण ने भी अच्छे दिनों के लिए शिव जी की तपश्या करके ही शक्ति पाई थी | भगवन भावों के भूखे होते हैं भावपूर्ण भक्ति करो समझो अच्छे दिन आ ही गए | भक्ति से ही शक्ति मिलती है | कुछ नहीं कर सकते तो गंगा स्नान की तरह फेस बुक ट्वीटर पर ही मोदी जी के फॉलोवर बन जाओ | साईं बाबा मुस्लमान होकर भी भक्ति भाव से पूज्य हो गए हैं | लाखों मुस्लमान अच्छे दिनों की चाहत लिए भक्ति भाव से भारतीय जनता पार्टी को अपनाकर नमो भक्ति का अहसास जता रहे हैं | अच्छे दिन कैसे आते हैं इसका ज्ञान यदि नहीं होगा ,तो भटकते रहोगे | ……………………………………………………………………………..किसको कहते हैं अच्छे दिन …? क्या केजरीवाल के अच्छे दिन आ गए थे जब वे अच्छे दिनों से घबराकर ५९ दिनों मैं ही पलायन कर गए थे ..? क्या मोदी जी पाहिले सुख की नींद सोते थे या अब सोते होंगे ….? दिन भर चाय बेच कर घोड़े की नींद सोने वाले मोदी सपने मैं भी ताने बाने बुनते नींद हराम कर रहे होंगे | कुछ पाकर अच्छे दिनों मैं खो जाना ,बुरे दिनों की आहट से घबराना ,खोने का भय, पाने के अच्छे दिनों को और भी दुखदायी कर देता है | …………………………..फिर अच्छे दिन है क्या हैं , कैसे आएंगे ……? कौन अच्छे दिनों मैं जी रहा है ….? एक साधारण से दोहे मैं कहा गया है …...”गौ धन ,गज धन ,बाज धन और रतन धन खान ,जब एव संतोष धन सब धन धूरि सामान ”……………………….यह सत्य है जहाँ मनुष्य संतोष अनुभव कर लेता है समझो वहीँ अच्छे दिन हैं | अच्छे दिनों मैं जीना उसी को कहा जा सकता है | ..……………………एक राजा ,एक धनवान ,शक्तिमान या सर्व गन संपन्न भी यदि संतोष नहीं पाता है तो उसके अच्छे दिन नहीं हैं | ….लेकिन संतोषी व्यक्ति विकास कैसे कर सकता है …? विकासवान होने के लिए महत्वाकांक्षी होना आवश्यक है | महत्वकांक्षी व्यक्ति संतोष कैसे पा सकता है ..| ………………...अजीब विरोधाभाष है | ……....मोदी जी को विकास भी चाहये और अच्छे दिन भी ……………कैसे मिलेगी शांति …..?……………….चलो मोदी जी की राष्ट्रिय धर्म ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता का ही सहारा लिया जाये ………..अध्याय २ के ६६ वें श्लोक मैं भगवन कहते हैं ……………………………………………………………………………………..न जीते हुए मन और इन्द्रियों वाले पुरुष मैं निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं होती और उस अयुक्त मनुष्य के अंतःकरण मैं भावना भी नहीं होती तथा भावनाहीन मनुष्य को शांति नहीं मिलती और शांति रहित मनुष्य को सुख कैसे मिल सकता है | यानि अच्छे दिन कैसे आएंगे ….? ……………………………………………………………जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओं को त्यागकर ममता रहित अहंकार रहित हुआ विचरता है वही शांति को पाता है यानि अच्छे दिनों मैं जीता है | ……………………………………………….जितेन्द्रिय ,साधन परायण ,और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को पाता है तथा ज्ञान को पाकर वह विना विलम्ब के तत्काल ही भगवत प्राप्तिरूप परम शांति को पाता है यानि अच्छे दिनों मैं जीता है |...४\39………………………………..मेरा भक्त मुझको सब यज्ञ और तपों का भोगनेवाला ,सम्पूर्ण लोकों के ईश्वरों का भी ईश्वर तथा सम्पूर्ण भूत प्राणियों का सुहृद अर्थात स्वार्थ रहित दयालू और प्रेमी ,ऐसा तत्व से जानकर शांति को पाता है ,यानि अच्छे दिनों मैं जीता है | 5\29……………………………………………………….वश मैं किये हुए मन वाला योगी, आत्मा को निरंतर मुझ परमेश्वर के स्वरुप मैं लगाता हुआ मुझमें रहने वाली परमानन्द की पराकाष्टा रूप शांति को पाता है ,यानि अच्छे दिनों मैं जीता है | ६\१५ …………………………………………….. मर्म को न जानकर किये हुए अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है ,ज्ञान से मुझ परमेश्वर के स्वरुप का ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यान से भी सब कर्मों के फल का त्याग श्रेष्ठ है क्यों की त्याग से तत्काल ही परम शांति होती है ,यानि अच्छे दिन आ ही जाते हैं |१२\१२ ……………………………………………….. अच्छे दिन यानि शान्तिकारक सुख भी तीन प्रकार के कहे गए हैं .…………………(१) सात्विक सुख .…जिस सुख मैं साधक मनुष्य भजन ,ध्यान और सेवा आदि अभ्यास से रमण करता है और जिससे दुखों के अंत को पाता है | जो ऐसा सुख है जो आरम्भ कल मैं विष के तुल्य प्रतीत होता है ,किन्तु परिणाम मैं अमृत के तुल्य होता है |१८\३६..37|……………………………………………………………………………………………………….(२)राजस सुख ..……जो सुख विषय और इन्द्रियों के संयोग से होता है ,वह पाहिले भोग काल मैं अमृत के तुल्य प्रतीत होने पर भी परिणाम मैं विष के तुल्य होता है | भौतिक सुख विकास इसी श्रेणी मैं आते हैं | १८(३८)…………………………………………………………………………..(३)तामस सुख .……. सुख जो भोगकाल मैं तथा परिणाम मैं आत्मा को मोहित करने वाले होते हैं वह निद्रा ,आलस्य ,और प्रमाद से उत्पन्न सुख तामस सुख कहे गए | जैसे सब कुछ सस्ता हो जाये और करना कुछ भी न पड़े | १८(३९) …………………………………..अच्छे दिनों की कल्पना मैं खोये मोदी जी के भक्तजन कैसे सुख भोना चाहते हैं अपनी विवेक बुद्धि से स्वयं तय करें | जैसे मनुष्य ने क्या खाना है कितना खाना है कब खाना है स्वयं निश्चय करना होता है | भगवन तो तपश्या का फल रावण को भी देते हैं भक्त प्रह्लाद को भी देते हैं | किस रूप मैं कौन से अच्छे दिन चाहिए विचार कर रख लो | तभी ऐन मौके पर भगवन वरदान दें तो हड़बड़ाहट मैं कुछ उल्टा सीधा न हो जाये क्यों की भगवन भी भक्त की परीक्षा लेते बुद्धि भ्रमित कर देते हैं | ……………………………………………………………………………………...हे भक्त तू मुझमें मनवाला हो , मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन करने वाला हो और मुझको प्रणाम कर | ऐसा करने से तू मुझे ही पायेगा ,| सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात कर्तव्य कर्मों को मुझ मैं त्यागकर तू केवल एक सर्व शक्तिमान सर्वाधार की शरण मैं आ जा | मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा तू शोक मत कर | ……..तेरे अच्छे दिन आने वाले हैं | ………………………………………………………………………...ओम शांति शांति शांति

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