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अन्ना जी,अर्जुन(केजरीवाल)हूँ,एकलब्य नहीं

Posted On: 11 Sep, 2016 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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व्यंग …………………………………………गुरुदेव द्रोणाचार्य (अन्ना जी) आप मेरी प्रेरणा हो ,मैं आपका प्रिय शिष्य अर्जुन हूँ मुझे पहिचानिये | मैं एकलब्य नहीं , जो आप मुझे हतोसाहित करने के लिए मेरा अंगूठा मांग रहे हो | ………………………………………………(अन्ना हजारे कह रहे हैं कि अब उन्हें अरविंद केजरीवाल से कोई उम्मीद नहीं रही। क्यों भला? इसलिए क्योंकि उनके 6 मंत्रियों में से 3 किसी न किसी तरह के विवाद में फंस चुके हैं। तो क्या इन मंत्रियों के विवाद में फंसने में केजरीवाल की भी कोई भूमिका रही है? )…………………………………………………………………………………………मुझे धुरंधर बनाने के लिए आपने ही मुझे समस्त विद्याएं प्रदान की | लक्ष्य चिड़िया की आंख पर ही एकाग्रता आपका ही ज्ञान था | ……………………………………………………………………………………....आपका लक्ष्य भ्रस्टाचार का नाश करना और लोकपाल की स्थापना करना ही है | जब आपके अथक अनसन से भी भ्रस्टाचार का नाश नहीं हो प् रहा था और लोकपाल पर सफलता नहीं मिल पा रही थी तब मुझे राजनीतिक महाभारत मैं आपके(किशन रूप ) ही गीता ज्ञान से युद्ध करने की बुद्धि मिली | .गीता मैं आपने ही हर अध्याय मैं यही कहा है अर्जुन पाप के नाश और धर्म की स्थापना के लिए युद्ध कर | …………………………………………………………………………………………मैं भ्रष्टाचार रूपी पाप के नाश करने ,लोकपाल की स्थापना रूपी धर्म की स्थापना करने के लिए ही रण भूमि मैं कूद गया हूँ | …..मैं अकेला अपने लक्ष्य पर कायम हूँ | मेरे हाथ मैं झाड़ू है मैं सब प्रकार की गंदगियों को साफ करते रहूँगा | ………..गंदगी तो सत्य है जो मन मैं पैदा होती है ,शरीर मैं पैदा होती रहती है घर बाहर पैदा होती रहती है ,समाज मैं ,देश मैं विदेश मैं कहीं भी पैदा होती रहती है | उसको स्वच्छ करने के लिए ही झाड़ू को एक चुनाव चिन्ह की तरह सदैव साथ रखा है | …………………………………………………………………………………………..मोदी जी का स्वच्छता अभियान सफल हो या न हो किन्तु मेरा स्वच्छता अभियान अनवरत चलता रहेगा | यह मेरा बचन है …प्राण जाये पर बचन न जाये …|….मेरी झाड़ू अंदर और बाहर दोनों तरफ से स्वच्छ करती रहेगी | ………………………………………………………………………………………………गुरुदेव जहाँ छली राजनीतिक पार्टियां अपने अंदर पापियों को समाहित करके सत्ता मैं बैठी हैं | उनके पापी विधायक ,सांसद आरोपी होने या आरोप सिद्ध हो जाने पर भी शोभायमान हैं | किन्तु मेरी झाड़ू ने अपने आरोपियों को तुरंत साफ कर दिया | मुझे गंदगी दिखे तो …मेरी आत्मा कचोटती है और झाड़ू तुरंत साफ कर देती है | …………………………………………………………………………..मुझे … और मेरी पार्टी को राजनीती मैं स्थापित हुए केवल ढेड़ बसंत ही हुए हैं | संस्कार बनाने मैं समय लगता है अतः ढेड़ वर्ष पहिले पैदा व्यक्ति कोसंस्कारित होने मैं कम से कम 18 वर्ष तो लगेंगे ही | मुझे जो व्यक्ति संस्कार विहीन मिले हैं वे सब पूर्व स्थापित पार्टियों के ही हैं | उन्हीं संस्कारों मैं पले बड़े लोग ही मुझे मिले हैं | जिनका मन बदलना सहज क़ाम नहीं है | किन्तु प्रयास बराबर कर रहा हूँ | ………………………………………………………………………………………..जैसे हिन्दू समाज मैं वर्ण व्यवस्था मैं ब्राह्मण को सदचरित्र होने का तमगा मिल जाता है | उसकी वेश भूषा और आचरण सदाचारी ही होना चाहिए | वर्ना उसे यही ताना सुनना पड़ जाता है कि ब्राह्मण धर्म और ऐसे कर्म …..| उसे आचार ,विचार ,पहिनावे से सदाचारी ही दिखना चाहिए | …………………………………………………………….वैसे ही अरविन्द्र केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी हो गयी है | वह कितना ही सदाचारी अपने धर्म पर अडिग क्यों न रहे विरोधी राजनीतिक पार्टियों और मीडिया के कटाक्षों से भेदी जाती रही है | जरा जरा सी बात भी एक ब्राह्मण से केजरीवाल के आचार विचार पर लांछन बन जाती है | जो खुद तो अपने अंदर ब्राह्मणत्व पैदा नहीं कर सकते ,किन्तु ब्राह्मणत्व की ओर प्रयास करने वाले पर प्रहार कर हतोत्साहित कर देते हैं | …………………………………………………………...चला मुरारी हीरो बनने ………………………………………………………………………..एक पालतू तोता जब किसी तरह बंधन मुक्त हो जाता है और अपने बंधू बांधवों मैं जाता है तो उसका बोलना सदाचारी ज्ञान सुनकर उन्हें क्रोध आता है | तानों और चोंचों का प्रहार कर उसके अपने ही उसे मार डालते हैं |………………………………………………………………………..अतः गुरु देव आप द्रोणाचार्य हो आप किशन हो मेरी प्रेरणा हो आप ही के यज्ञ (भरष्टाचार का नाश लोकपाल की स्थापना ) को आगे बड़ा रहा हूँ | मेरे विचार आप ही की उपज है | कृपया उसे हतोत्साहित न करिये | मुझे गलतियों के सुधार की शक्ति प्रदान कीजिये | …मेरे नाश से आप ही के यज्ञ का नाश होगा | यज्ञ सफल हो इसकी कामना के लिए मुझे प्रोत्साहित कीजिये | तभी मैं इस लोक मैं पाप भ्रष्टाचार का नाश करके धर्म की स्थापना कर सकूँगा | …………………………………………………………....विना किशन के आशीर्वाद के अर्जुन कभी भी कोई युद्ध नहीं जीत सकता | प्रभु नाम आपका होगा कर्म मेरा | मैं तो सिर्फ कर्म कर सकता हूँ फल तो आप पर ही निर्भर होगा |………………………………………………………..याद कीजिये किशन ने अर्जुन को जितने के लिए क्या नहीं किया …..|…..……………………………..ॐ शांति शांति शांति

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