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तीन साल "बेदाग" मोदी जी ...

Posted On: 28 Jun, 2017 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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व्यंग्य मात्र .

.मोदी जी का अमेरिका मैं दिया गया भाषण कि तीन साल मैं एक भी दाग़ नहीं है …………

.मोदी जी ही नहीं जवाहर लाल जी के लिए भी यही कहा जाता था | मोदी जी और जवाहर लाल नेहरू जी मैं काफी समानताएं हैं | जैसे जवाहर कोट और वास्केट | प्रबल हिन्दू समर्थन | और वेदाग़ दामन …|

नेहरू जी ब्राह्मणत्व प्रधान हिन्दुओं के प्रबल नेता थे तो मोदी जी भी शूद्रत्व प्रधान हिन्दुओं के प्रबल नेता हैं |

नेहरू जी के लिए भी यही कहा जाता था की वे एक बार पहिने हुए कपडे दुबारा नहीं पहिनते थे | या उनके पहिने कपडे धुलने को विदेशों मैं जाते थे |

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..मोदी जी भी एक बार पहिने कपडे दुबारा नहीं पहिनते हैं | घर से अमेरिका को निकलते हैं तो उनके कपडे अलग होते हैं | विमान मैं चढ़ते अलग होंगे और बाहर निकलते अलग ही होंगे | अमेरिका मैं होटल मैं दूसरे होंगे तो अन्य स्थानों पर अलग होंगे | भाषण देते और होंगे तो ट्रम्प से मिलते और ही होंगे | यहाँ तक की अमेरिका मैं और ही होंगे तो रूस मैं और ही | चीन मैं और होंगे तो अन्य देशों मैं विभिन्न ….| उनके पहिनावे से ही पहिचान सकते हैं की कौन से देश मैं हैं |

………... किसी दाग़ के लगने से पहिले ही उनकी पोशाक बदल दी जाती है क्यों की मोदी जी को दाग़ बिलकुल भी पसंद नहीं होते हैं | खासतौर से यह भी ध्यान दिया जाता है की उनकी पोशाक कांग्रेसियों जैसी सफ़ेद न हो ताकि कहीं कोई दाग़ हो भी तो किसी को नजर ही न आये | .

……….अब विपक्षियों को तो दाग़ ढूंढ़ने के लिए बहुत महारत करनी पड़ रही है | जब तक वे कोई दाग़ खोज पाते हैं तब तक मोदी जी की पोशाक ही बदल चुकी होती है | जबरदस्ती दर्शाये गए दागों को कांग्रेस का असफल प्रयास सिद्ध कर दिया जाता है क्योँकि यह दाग़ तो …..अच्छे हैं …सिद्ध कर दिया जाता है |

…………………………………………अब अच्छे दागों की भी कुछ परिभाषा तो होनी चाहिए …| एक दाग़ ऐसा है जिसके लिए ओबामा भी चेता गए थे ..यानि “असहिष्णुता”………| असहिष्णुता को अंगरेजी मैं इन टोलेरेंस भी कहा जाता है ,अब यदि दो धातुएं परस्पर रगडेंगी तो कुछ न कुछ तो इनटोलेरेंस तो आएगी ही | अब कांग्रेस ओबामा के सुर मैं सुर मिलाते इस साधारण से दाग़ को भी दाग़ सिद्ध करती है तो यह उसका अज्ञान है क्योंकि यह चाणक्य नीति का हिस्सा है | तभी मोदी जी के सिपहसलहकारों को कुछ न कुछ उलटे सीधे बोल बोलकर जनता को जाग्रत करना पड़ता है | यह बोल किसी बेअरिंग मैं लुब्रिकेंट का काम करते हैं | जिससे इन्टोलेरेंस कम हो जाती है और बेअरिंग कि लाइफ बड़ जाती है | अब यदि इतना ज्ञान विपक्षियों को होता तो वे ओबामा के अलाप को सच नहीं मान लेते |

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………….नोट बंदी …विपक्ष की दृष्टि मैं नोट बंदी भयंकर दाग़ है जिसको धोया नहीं जा सकता किन्तु इन नासमझों को कौन समझाए यह देश हित मैं कितना जरुरी था इसे भी दाग़ समझोगे तो दृष्टि दोष ही माना जायेगा |
…………..GST ………अभी लागु भी नहीं हुआ और विपक्षियों को दाग़ नजर आ रहा है | पाहिले दाग़ लगने तो दोगे तभी देख सुनकर अपनाकर ही कहना यह दाग़ है |.

……लव जिहाद
……गौ रक्षा….गाय हमारी माता है यह तो हिन्दुओं की आस्था है इसकी रक्षा जी जान से करना कर्तव्य है यह कैसे कोई दाग हो सकता है |

…..सर्जिकल स्ट्राईक…..इसके बिना क्या दुश्मन खामोश बैठेगा | यह तो चाणक्य नीति ही है यह कैसे दाग हो सकता है |

.राम मंदिर…..राम मंदिर तो आस्था है यह तो बेदाग ही होगा |
….धारा ३७०……यह दाग तो यूनिवर्सल है एक सत्य है इसको तो स्वीकारना ही पड़ेगा |
…. हिंदुत्व …..हिंदुस्तान मैं हिंदुत्व ही तो होगा यह कैसे दाग कहा जा सकता है |
…..तीन .तलाक……जहाँ बिना तलाक के काम हो सकता है वहां ऐसी कुप्रथा को हटाना कोई दाग नहीं कहा जा सकता है |
…..जुमले….तो साहित्य का श्रंगार होते हैं ,राजनीती का मार्ग सुगम करते हैं यह कैसे दाग कहे जा सकते हैं |
…..एक समान आचार संहिता ……यही तो एक ब्रह्मास्त्र है जिससे मुसलमानों को संतुलित किया जा सकता है यह कैसे दाग हो सकता है |
…..पार्टी के प्रचार प्रसार के लिए सरकारी धन का दुरूपयोग

.अब एक साधारण सी टॉयलेट को ही देखिये जिस काम को खुले आसमान मैं नील गगन के तले बिना किसी खर्च के किया जा सकता है उस पर प्रचार प्रसार मैं ही असख्य धन बर्बाद हो रहा है |…

अब यदि मुस्लमान लोव जिहाद से ,बहु विवाह से तीन तलाक से अपनी जन सख्या बड़ा रहे हैं तो उसके लिए एक सामान अचार संहिता लाना तो उचित ही होगा |इसको दाग कैसे कहा जा सकता है |

…….एक ओर किसान आत्म हत्या कर रहे हैं जनता वेरोजगारी से प्रताड़ित हो रही है तो दूसरी तरफ द्रुतगामी रेल पर ,स्मार्ट सिटी पर ,विदेश यात्राओं पर ,तीन साल मोदी के कार्य काल पर अंधाधुन्द प्रचार प्रसार के लिए किया जाने वाला खर्च …| छोटे छोटे साधारण पार्टी कार्यों के लिए प्रधान मंत्री का प्रभाव और मीटिंग से सरकारी धन का दुरूपयोग …|

अब प्रधान मंत्री के रूप मैं मोदी जी को वीडिओ कॉन्फ्रेंसिंग से ही काम करके धन का दुरूपयोग रोकना चाहिए | ….यदि प्रधान मंत्री देश के हैं तो उनका पार्टी के चुनाव प्रचार मैं असख्य मीटिंग्स करना कितना धन का दुरूपयोग होता होगा | किन्तु यह कोई दाग़ तो नहीं है यह तो पूर्ववत प्रधान मंत्री भी तो करते आये थे |

असख्य विदेश यात्रायें ..|

…………………यदि विपक्षी पार्टिओं को कुछ बड़ा दाग़ नजर नहीं आता है तो उसने ऐसे उजुल फिजूल दागों को ही दर्शाना होगा | ताकि अपनी विपक्ष की भूमिका मैं कुछ करती दीखती रहे | जिन चाणक्य नीतियों को अपनाकर कांग्रेस ने ७० साल राज किया उन्ही चाणक्य नीतियों को ही तो अपना रहे हैं | तो यह दाग़ कैसे कहे जायेंगे |+|

……दाग़ तो वोह होता है जिससे क्रांति आये | यदि कोई क्रांति नहीं आये तो यह विपक्षियों द्वारा दुष्प्रचार ही तो कहा जायेगा |….अब किसी पोशाक पर दाग तो वो नजर आता है जो कोई पैबंद हो ,फटा हो या पैन्ट आदि का दाग हो यानि की बड़ा सा दिखने वाला दाग ….यानिकि बड़े बड़े खोटाले |

अब विपक्षी कहते हैं की घोटालों का कोई अस्तित्व नहीं होता उनको तो पैदा किया जाता है वे सिर्फ एक भूत जैसे ही होते हैं वोह दर्शाये तो जाते हैं किन्तु उनका कोई सर पैर नहीं दीखता है | वे केवल बदनाम करने के लिए अदृश्य भूत होते हैं |

असली दाग तो वे ही होते हैं जो सामने नजर आते हैं

जिनको छूकर देखकर महसूस किया जा सकता है |

ॐ शांति शांति शांति

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