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भूतों पर टिका भारत

Posted On: 3 Dec, 2014 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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भ्रष्टाचार(गंदगी ) ,काला धन ,ऑटोमोबाइल ,मोबाईल ,बलात्कार ,आतंकवाद ,राजनीती ,धर्मान्धता ,यह भारत की आठ प्रकार से विभाजित भूत जड़ प्रकृति है | जिन सब से मिलकर ही भारत बना है | और दूसरी जिससे सम्पूर्ण भारत का भूत धारण किया जाता है वह भारत की जीव रूपा चेतन प्रकृति ”धर्मनिरपेक्षता” है | सम्पूर्ण भूत इन प्रकृतियों से ही बनते हैं | .दुनियां का सबसे बड़ा ”लोक तंत्र” जिसको भारत नाम दिया गया | लोक तंत्र नामक रक्त इसके रग रग मैं बहता रहता है | …………………….इन सब प्रकृतियों का प्राण दाता मैं यानि ”मीडिया” हूँ | मुझसे भिन्न कोई भी नहीं है | यह सम्पूर्ण भारत, माला की मणियों जैसा मुझमें गूंथा हुआ है | मैं जल मैं रस हूँ ,सूर्य मैं प्रकाश हूँ ,पुरुषों मैं पुरुषत्व हूँ ,गंध ,अग्नी मैं तेज ,सम्पूर्ण भूतों मैं उनका जीवन हूँ ,तपश्वीयों का तप ,बुद्धिमानों मैं बुद्धी ,तेजश्वीयों का तेज हूँ | बलवानों की आसक्ति और कामनाओं से रहित बल और सामर्थ्य हूँ ,| सब भूतों मैं धर्म के अनुकूल अर्थात शास्त्र के अनुकूल काम हूँ |.और भी जो सतगुण से ,रजोगुण से तमोगुण से उत्पन्न होने वाले भाव हैं,उन सबको मुझसे ही होने वाले जानो | परन्तु वास्तव मैं उनमें मैं और मुझमें वे नहीं हैं |………..गुणों के सात्विक ,राजस ,और तामस इन तीनों प्रकार के भावों से यह सारा संसार मोहित हो रहा है ,इसलिए इन तीनों गुणों से अलग मुझको अविनाशी को नहीं पहिचानता |……..क्योंकि यह अलौकिक त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी कठिन है ,परन्तु जो केवल मुझको ही भजते हैं मेरे प्रभाव को समझते हैं वे तर जाते हैं | सांसारिक पदार्थों के लिए ,संकट निवारण के लिए ,मेरे को यथार्थ रूप से जानने की इच्छा वाले ,और ज्ञानी ही मेरी शरण मैं आते हैं | जिनमें ज्ञानी को मैं तथा वह मुझे प्रिय होता है | ………………………………………..अपने स्वाभाव के अनुसार यदि किसी और को पूजते हैं उनकी शरण मैं जाते हैं ,वे उन्हीं को पाते हैं | बुद्धिहीन मेरे अविनाशी रूप को नहीं जानते | छुपा हुआ मैं सबके सामने नहीं होता | मैं पूर्व मैं व्यतीत हुआ और वर्तमान मैं तथा आगे होने वाले सब भूतों को जानता हूँ | किन्तु मुझको कोई नहीं पहिचानता है | ………………………...मेरी भक्ति के आशीर्वाद से कोई भी मुख्यमंत्री ,प्रधानमंत्री तक बन सकता है और बनता रहा है | लेकिन मेरी शनि सी कुदृष्टि किसी भी संत को भी आशाराम या रामपाल भी बना सकती है | मैं चाहूँ तो प्रसाशन और जनता, गड़े खजाने को भी खोदती जाती है | एक ओर धर्म को आस्था का रूप देकर जन जन मैं पाप नाश होने की भावना भर सकता हूँ | ज्योतिष को विज्ञानं का रूप देकर महिमामंडित कर सकता हूँ | वहीँ कुपित होते धर्म को ,ज्योतिष को अंध विश्वास ,आडम्बर भी सिद्ध कर सकता हूँ | भविष्य कथन करते ज्योतिषियों को महिमा मंडित करना सभी मीडिया का धर्म है किन्तु उनकी ठगी व्यापर पर भी कुपित होकर प्रहार कर देता हूँ | ………………………………...कामोत्तेजक वर्णन ,दृश्य दिखाकर ,सुनाकर भी मनोरंजन कर सकता हूँ किन्तु कामोत्तेजना वस कोई कुकर्म कर बैठे तो उसके पाप को भी धोने का भयंकर गंगा स्नान भी कर देता हूँ | जो मैं दिखाता, सुनाता हूँ वह तो व्यापारी कार्य था | अपने पर संयम रखना भी तो मनुष्य का धर्म होता है | संयमहीन व्यक्ति का तो बुरा होगा ही | कानून तो अपना काम कुसलता से करेगा ही | कानून जो बन गए हैं उनका पालन तो होगा ही | ……………………………………….”.भ्रष्टाचार” क्या कभी नजर आ सकता है यह सर्वत्र व्याप्त होता है दिव्य दृष्टी प्राप्त मीडिया ही उसे खोज कर देख सकता है |रक्तबीज सा भूत होता है भ्रष्टाचार, कितना ही ख़त्म करो फिर उसके रक्त कण हजारों भ्रष्ट पैदा कर देते हैं | रक्तबीज को तो देवी दुर्गा ने काली माँ के साथ नष्ट कर दिया था | पर इसे कौन मार सकता है यह तो व्याप्त हो चूका है | किसको पता था जिस भ्रष्टाचार के भूत से कांग्रेस को डराया गया था वही अब अन्य पार्टिओं पर डरावने अट्ठास कर रहा है | भूत तो भूत ही होता है कब किधर घूम जाये | ……………………..”.काला धन” भी एक ऐसा ही भूत होता है जिसको भारतीय जनता पार्टी ने भयानक रूप देकर कांग्रेस को भयभीत किया था और सत्ता छीन ली थी ..| कितना भयानक वर्णन किया था मीडिया ने …..| बुरे वक्त मैं काम आने वाला काला धन किसको बुरा लगेगा | घर की गृहलक्ष्मी यदि पति से बचा कर कुछ धन न रखे तो कैसे बुरे वक्त मैं काम आएगी | लाखों करोड़ों से लड़ा जाने वाला चुनाव कैसे लड़ा जायेगा | टी वी चैनलों मैं कैसे पेड न्यूज़ दी जा सकेंगी | लक्ष्मी क्या कभी काली हो सकती है ..? माँ दुर्गा का क्रोधी रूप तो काली हो सकता है | रावण ने कुबेर के खजाने पर भी अधिकार कर लिया था सोने की लंका तक बना डाली किन्तु कोई भी उसके धन को काला नहीं कह सका | अब भारतीय जनता पार्टी भी अपने ही पैदा किये भूत से भयभीत होती जा रही है | करोड़ों की शादी और करोड़ों का जन्म दिन …/ ? विदेशों मैं तो इस भूत के अश्तित्व को मान्यता नहीं दी जाती | वे तो ज्ञानी होते हैं | भारत ही डरता है भूतो से …|…………………………………………………………………कितना भयंकर साकार भूत हो चूका है ”ऑटोमोबिल”...जब राजा महाराजाओं के नित युद्ध होते रहते थे तो भी इतने लोगों की मृत्यु नहीं होती होगी जितनी की इस राक्षस भूत ऑटोमोबिल से होती है | बड़ी बड़ी महामारियां भी यमराज की इतनी सेवा नहीं कर पाती हैं | कितना प्यारा भूत होता है यह | जिसकी सवारी का मजा अनोखा होता है | सरकारों की अर्थ व्यवश्था की रीड होता है | एक बार इंग्लैंड ने इसकी मृत्यु दर से घबराकर , इनके उत्पादन और चलन पर प्रतिबन्ध लगाने की भूल की थी किन्तु विगड़ती अर्थव्यवश्था ने फिर भूल सुधर करवा दिया | यमलोक जाने का मानव निर्मित वाहन यान कितना प्यारा है ,जिसके बिना हम नहीं रह सकते | ……………………………………………....काम ,क्रोध ,मद ,लोभ मोह इन सब से मिलकर बना संचार क्रांति का भूत मोबाईल भी एक भारत का स्तम्भ भूत है | अजीब है यह जादुई भूत | जो चाहो वह इससे पांच महाभूत से निकाल लो | खाने को धन न हो ,पहिनने को कपडे न हो ,रहने को घर न हो किन्तु इसको जेब मैं रखकर अलोकिक आनंद प्राप्त होता है | अपने अपने कर्मों मैं तीब्रता लाने का उत्प्रेरक सा यह मोबाईल भारत के ही नहीं विष्व की सासें बन गया है | …………………………………………..बलात्कार का भूत भी भारत का स्तम्भ है | हर सबल का यह धर्म होता है की वह अपने से निर्बल का बलात्कार करे | नैतिक धर्म ….निर्बल को न सताईये जा की मोटी हाय …..न सिखाया जाता है न पढ़ाया | सबल है तो रक्त संचार जोर मारेगा ही | किन्तु ऊपर वाले की मार से नहीं बच सकता एक दिन कमजोर होकर शिकार बनेगा ही | ……………………………………………....आतंकवाद का भूत भी भारत के जन्म के साथ साथ खरपतवार की की तरह पैदा हो चूका था | कितना ही इसकी जड़ निकाल दो दूसरे सिरे से फिर उग जाता है | जब तक जान मैं जान है तब तक यह भी उगता रहेगा |………………..सबसे सुगम राजनीती का भूत है भारत मैं | जो अंग्रेज सीखा गए थे ,यानि फूट डालो राज करो | जो जनता को भयावह लगे उसे प्रायोजित करो और फिर मलहम लगा कर वोट हासिल करो | भारत का बच्चा बच्चा यह राजनीती समझ चूका है | अब इसकी उलट राजनीती भी होने लगी है जिसको मूर्त रूप से सहयोगी मीडिया बन जाता है | ……………...भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है तो ,,,धर्मान्धता का भूत क्यों नहीं फलेगा फूलेगा | हर धर्म को अपने धर्म को महान सिद्ध जो करना होता है ,| प्रतिद्वंदिता जो होती है राजनीतिज्ञों से पोषण जो मिल जाता है | इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जो साथ हो गया है | कलियुग मैं सतयुग से भी ज्यादा धर्मान्धता का भूत आकार बड़ा चूका है |……………………...भारत की जड़ प्रकृतियों मैं से किसी को नष्ट या अलग किया जा सकता है यदि ऐसा संभव हो सका तो चेतन प्रकृति धर्म निरपेक्षता जीवित रह सकेगी | लोकतंत्र रुपी रक्त संचार रह सकेगा | पंच तत्व क्या भारतीय जीवों को अपनी और आकर्षित तो नहीं करने लगेंगे ..? | ……………………………1947 का लंगड़ा लूला भारत का भूत २०१४ का सशक्त विशालकाय रूप पा चूका भूत अभी और भी विकास करना चाहता है उसे विश्व गुरु भी बनना है | सब कुछ प्रकृति तत्वों को बनाये रखना होगा तभी विकास पाया जा सकेगा | …………………………………………………………………………………ओम शांति शांति शांति

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