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वैश्या \कुत्ता

Posted On: 26 Jul, 2016 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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Don’t turn your back on the elephantsI

You can protect elephants and other endangered wildlife

व्यंग ..आजकल साहित्य सृजन राजनीतिज्ञ करने लगे हैं | उपमा मैं कालिदास को महान माना जाता है | किन्तु विद्वता से पाहिले वे भी मुर्ख थे | उनको विद्वान भी विद्वानों ने ही बनाया था | आजकल के कवि ह्रदय राजनीतिज्ञ कविता रचते उपमाएं तो कर बैठते हैं किन्तु तीखी उपमाएं कर बैठते हैं | एक साधारण से ज्ञान से तो उनकी उपमाएं उनके ज्ञान को उपजाती हैं किन्तु राजनीती उनको नकार देती हैं उसमें शुक्राचार्य से विद्वानों की तत्काल प्रतिक्रियाएं उन्हें विद्वान से मुर्ख सिद्ध कर देती हैं | ………………………………………………………………………………………………………………वैश्य यानि व्यापारी ,जो किसी वस्तु को खरीदता और बेचता है | यह पुलिंग शब्द है | हर पुलिंग का स्त्रीलिंग भी होता है | और वैश्य का स्त्रीलिंग बना वैश्या….| अब यदि कोई व्यापारी व्यक्ति पुरुष है तो वैश्य ही कहलायेगा किन्तु यदि स्त्री है तो वैश्या ही कहलाएगी | ….यह है मुर्ख सम्राट कालिदास से कवि का ज्ञान | ……यहाँ राजनीतिज्ञ का अल्प ज्ञान ही कहा जायेगा |………………………………………………………………………………………….. कविता मैं भाव की प्रधानता होती है | यहाँ स्त्री लिंग या पुलिंग से मतलब नहीं होता भाव से मतलब होता है | वैश्या अपने तन को ही बेच सकती है बेचने के लिए केवल तन ही होता है ,जिसका व्यापर घृणित माना जाता है | ..कुछ और बेचने वाली व्यापारी(वैश्य ) ही कहलाएगी न की वैश्या | ……….राजनीतिज्ञ कवि का भाव भी गलत नहीं रहा होगा | उसने केवल पुरुष और स्त्री भाव ही देखा | एक ब्राह्मण का स्त्रीलिंग ब्राह्मणी सम्मान जनक ही होता है ,किन्तु वैश्य का वैश्या घृणित ही होगा | …………………………….एक राजनीतिज्ञ कवि इसके भाव को क्या जाने …? उसने तो सोचा था मेरी कविता पर खूब वाह वाही होगी | राजनीतिज्ञ से कवि बनकर सम्मान का पात्र बनूँगा | किन्तु अभागा अभी तक छुपते छुपाते अभी तक यह नहीं समझ पाया की उसने गुनाह क्या किया है | …….कालिदास ने उपमाएं की तो महान कवि कहलाए किन्तु उसने की तो उसे पार्टी निकाला और जान के भी लाले पड़ गए | …..कालिदास तो मुर्ख पाहिले थे किन्तु बाद मैं काली के भक्त बनकर विद्वान कवि कहलाए | उनकी उपमाओं की तरह कविता करना क्या गुनाह हो गया …? ….और भी राजनीतिज्ञ कालिदास की तरह उपमाएं करते कविता पाठ करते रहते हैं किन्तु वे क्यों नहीं प्रताड़ित किये जाते …? …उनको म्हणता की सीडी बन जाती है उनकी उपमाओं की कविता …| ……

जब कलाकार कवि ह्रदय सुल्तान(सलमान खान ) की भावनात्मक उपमा को घृणा के भाव से देखा जा रहा था | कोई भी कालिदास आरम्भ मैं कालिदास की तरह प्रताड़ित ही होता है | कालिदास. को मूर्खता का पर्याय भी माना जाता रहा है | किन्तु बाद मैं उनकी उपमाओं का लोहा समय समय पर विद्वानों द्वारा माना जाता रहा | आज विश्व मैं सेक्सपियर से ऊँचा स्थान कालिदास का ही माना गया | “उपमा कालीदासशय ” यानि उपमा मैं कालिदास का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है | ………………………………………………………………………………………………..एक रेप पीड़ित नारी के दर्द को यदि किसी ने समझा है तो वह उपमा मैं कालिदास से कवि ह्रदय सलमान खान ही हैं | अपने दर्द को एक कवि कविता मैं ही कह सकता है कौन सुनेगा

…………….आज सलमान खान की कविता ने भी यही सिद्ध कर दिया की कालिदास की कविता महान होती है | ….अब तक 500 करोड़ का व्यापर करवा कर सलमान खान की कविता महान हो गयी | ………………………………………………………………………………………………महान कवि कालिदास से दया शंकर की कविता भी आने वाले वक्त मैं एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलवा कर कालिदास सा सम्मान पाएगी | …………………………………………………………………………..(.कवि सम्मेलनों मैं अलंकारों की बौछार तो वाह वाही देती है कवि वाहवाही से ही झूम जाता है किन्तु राजनीती मैं पक्ष विपक्ष के अलंकारों से वोट बैंक बनता है राजनीतिज्ञ के अलंकारों से सत्ता सुनिश्चित होती है | इसलिए अलंकारों का भरपूर प्रयोग किया जाता है | )……………………………………………………………………….विपक्ष भ्रमित हो जायेगा की भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी हो गयी ,दलितों ने साथ छोड़ दिया | और वह अपनी अपनी जीत पर आशान्वित होते विघटित ही रहेंगे और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर अपने चाणक्य नीति पर गर्व करेगी | ………………………………………………………………………….अब भी जय श्री ऱाम आभारित राम मंदिर ब्रम्हास्त्र भाजपा के तरकस मैं है । रामेश भाजपा अब मायावती को दलित भ्रम मैं डालकर इसका प्रहार करेगी । भ्रमित विपक्ष एक ना हो सकेगा । और भाजपा ओम शांति शांति पा सकती है ।……………………...पार्टी के .शहीद दया शंकर एक बार फिर पुनर्जागृत हो जायेंगे | मुर्ख समझे जाने वाले कालिदास एक बार फिर महान कवि सिद्ध हो जायेंगे | ……………………………ओम शांति शांति

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