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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद..... उवाचः ...सत्यम शिवम सुंदरम

Posted On: 23 Jun, 2014 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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हमारे हिन्दू धर्म के सनातन धर्म के परम पूज्य ,संरक्षक ,महान अद्यात्म ज्ञानी ,वेद शाश्त्रों के महान ज्ञाता जी किसी सत्य को यदि लोक हित मैं कहते हैं तो वह एक सच्चे सनातनी होने के नाते सिरोधार्य होना चाहिए | ईश्वर से साक्षात्कार साधारण अज्ञानी जनता सिर्फ अपने गुरु के बताये मार्गों से ही कर सकती है | गुरु की महिमा अपरम्पार कही गयी है | ………………………………………………गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वरः | गुरु साक्षात परम ब्रह्म तश्मे श्री गुरुवे नमः ||……………………………………………… .महान संत साईं बाबा जी कलियुग के एक चमत्कारी संत हैं यह जगत जानता ही है | किन्तु भक्ति मैं इतने लीन हो चुके भक्त कितनी अतिशियोक्ति मैं डूब गए हैं कि अपने सनातन धर्म के आराध्यों को भी किनारे बैठाते सर्वोच्च स्थान दे देते हैं | किसी भी साईं बाबा मंदिर मैं प्रमुख हाल मैं मुख्यता साईं बाबा की ही होती है अन्य देवता चाहे वह राम हों या कृष्ण या शिव ,लक्ष्मी नारायण हों सभी सहयोगी ही बना दिए जाते हैं | भव्य और विशाल स्वर्ण विभूषित साईं बाबा ही नजर आते हैं | भक्त हनुमान तो अपने आराध्य राम सीता के चरणों मैं ही अपना स्थान मानते हैं | भगवन तो चमत्कार कर नहीं पाते या पापियों को कर्म फल भुगतने देना चाहते हैं | लेकिन जहाँ चमत्कार होते हैं, वहीँ भक्ति जाग्रत होती जाती है | …………………………………भगवन कृष्ण तो अपने उन्हीं भक्तों से प्रशन्न रहते हैं या उनके उद्धारक होते हैं जो निस्वार्थ भाव से पूजा अर्चना करते हैं | कर्म किये बिना कर्म फल की इच्छा करने वाले तामशी ही कहे गए हैं गीता मैं | फिर क्यों कर्म किये बिना कामना करने वालों को चमत्कारिक लाभ मिल जाता है | धर्म की चमत्कारिक व्याख्या कलियुग मैं साईं बाबा ,निर्मल बाबा की ओर आकर्षण दे रही है | कल्प कल्पांतरों से वेद पुराणों मैं सिद्ध ब्रह्मा विष्णु ,महेश्वर भी अपना आकर्षण खो रहे हैं | क्यों कि कर्म किये बिना त्वरित कामना पूर्ती नहीं देते हैं | चमत्कारिक सुख क्षणिक ही होते हैं साईं बाबा के लोक हित के लिए किये चमत्कार अब भक्तों ने अपने अपने कामना सिद्धी के साधनो मैं जोड़ लिए हैं ………………………………………………………………………………………..इस सत्य को कि मुस्लिम साईं बाबा मंदिर मैं नहीं आते हैं तो कैसे हिन्दू मुस्लिम एकता के कारक होंगे क्यों नहीं स्वीकारा जाता | मुस्लमान के लिए मंदिर बूत खाना ही होता है जो काफिरों का स्थान है तो फिर क्यों वे अपना धर्म भ्रष्ट करेंगे | श्रद्धा मन मैं होती है | मंदिर मैं जाकर कौन सा उन्हें सम्मान मिलेगा | अछूतों से भी गया गुजरा व्यव्हार होगा उनके साथ | साईं बाबा यदि हिन्दू मुस्लिम एकता के कारक हैं तो क्यों वहां हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां रख कर उनके रास्ते प्रवेश के लिए बंद कर दिए जाते हैं | क्यों नहीं महात्मा गांधी की तरह एक सत्संग स्थल बनाया जाता है | सर्वोदय मंदिर बने स्थानों मैं क्यों नहीं मुस्लमान आते है | ……………………………………….…स्वामी स्वरूपानंद जी का यही मार्गदर्शन रहा होगा धन्य हो प्रभु जो अपने ऐसे सहज भाव को जनता के लिए प्रश्तुत किया | एक गुरु कैसे धर्म भ्रष्ट लोगों को , सन्मार्ग पर ला सकता है ,यही सिद्ध किया है गुरु जी ने | गुरु देव आप महान हो | आपका आशीर्वाद अवश्य ही पापियों को सन्मार्ग देकर महान शांती देगा | समाज मैं फैलते लक्ष्मी मंदिरों के स्थान पर आस्था के कारक देवताओं के मन मंदिर स्थापित होंगे | ……………………………………………………………………………………..……हिन्दू मुस्लिम एकता का ज्ञान अब आपके मार्ग दर्शन से ही होगा | आप सत्यम शिवम सुंदरम के साक्षात ज्ञान हो | प्रभु आप पर लिखा भाष्य अज्ञानी द्वारा लिखा गया है यही विचार कर क्षमा कर देना | ……………………………………………………………………………………….ओम शांति शांति शांति

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