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स्वरूपानंद क्या सिद्ध होंगे ...देव गुरु बृहष्पति या शुक्राचार्य ,चाणक्य ...?

Posted On: 4 Jul, 2014 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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जब जब बृहस्पति गृह अपने उच्च स्थान कर्क राशी मैं आता है धर्म भाव अधिकता से उजागर हो जाते हैं | राजनीती भी धर्ममय हो जाती है | बर्तमान मैं १९ जून से कर्क राशी मैं आने से पहिले ही हिन्दू धर्मानुयायी भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत से सरकार बना चुकी है | सुषुप्त शंकराचार्य को धर्म भ्रष्ट हो रही सनातन धर्मी जनता की सुधी आ गयी है | सदियों से अपना मार्ग भूल चुके सनातन धर्मी अब सुधार की कामना भोग रहे हैं | …...इराक मैं भी धर्म युद्ध होते खलीफा का उदय हो रहा है | सिया सुन्नी ,कुर्द सब अपने धर्म के रक्षक हो उभर चुके हैं | सर्वत्र धर्म की जय जय कार की कामना जाग्रत हो चुकी है | …………………………..….आखिर कौन होगा सर्वोच्च धर्म ….?| कौन अपने मार्ग पर सही है कौन गलत यह शाश्त्रार्थ आरम्भ हो चुके हैं | कण कण मैं सभी देवताओं मैं साई रूप का दर्शन करते क्या सही मार्ग पर चल रहे हैं …?| यह तो शंकराचार्य स्वरूपानंद ही सिद्ध कर सकते हैं | ……………………………..…देवताओं और राक्षशों के बीच युद्ध मैं एक ओर देव गुरु बृहस्पति और दूसरी ओर असुरों के गुरु शुक्राचार्य रहे हैं ,जिनकी नीति कूटनीति से ही देवता और असुर अपने अपने युद्ध को धर्म युद्ध सिद्ध कर विजय पाते रहे हैं | कौन सही कौन गलत यह भी सिद्ध करना राजगुरु का ही धर्म रहा था | ………….विखंडित नष्ट भ्रष्ट हो चूका सनातन धर्म यदि अपने आप हिन्दू धर्म के रूप मैं बृक्ष का रूप ले चूका है तो उसको सत्य धर्म का वोध करते विखंडित करते कूटनीतिक युद्ध छेड देना देव गुरु सिद्ध करेगा या असुर गुरु …..? यह तो आने वाला समय ही बताएगा |

द्वेत अद्वैत के शाश्त्रार्थ मैं कौन जीता …? वैष्णव शैव मैं कौन जीता …? क्या सनातन धर्म को जैन ने पराष्ट् किया ..? या बौद्ध संस्कृति सनातन को परास्त कर विश्वव्यापी हुयी | क्या आर्य समाज धर्म की स्थापना स्वामी दयानंद ने इसलिए की की सनातन धर्म जटिल हो चूका था …? | सिख धर्म की स्थापना क्यों करनी पडी …? | 18 पुराणों के निष्कर्ष से क्या सिद्ध हो सका कि कौन देवता सर्वोच्च महान है …? | शंकराचार्य स्वरूपानंद जी सिर्फ सनातन धर्म के गुरु बने हैं | क्या वे वर्तमान हिन्दू रूप मैं जगत गुरु सिद्ध हो सकेंगे …..? आज हिंदुस्तान जिस स्वरुप मैं हिन्दू है उसमें जगतगुरु शंकराचार्य कैसे समनजष्य बैठाएंगे | ब्राह्मण क्षेत्रीय वैश्य सुद्रों के अलावा असंख्य जाती उपजातियों मैं विभक्त हिन्दू आज जिस हिन्दू स्वरुप मैं एक हैं उसे क्या शंकराचार्य जी मान्यता दे सकेंगे ….? | आज जिस हिन्दू विचारधारा से भारतीय जनता पार्टी विजयी होकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बना चुकी है ,क्या वह विचारधारा स्वरूपानंद जी मानेंगे ….? …………………………………………………..नए नए शाश्त्रार्थ विषय उदित होते रहेंगे | साई भक्त सिर्फ एक ही उत्तर दे सकते हैं साई भक्ति ,आस्था | साई भक्त सनातन धर्मी ही हैं वे भगवन के भक्त हैं तो साई भक्त भी हैं | सर्वत्र देवताओं मैं अपने आराध्य साई का स्वरुप देख रहे हैं तो उनकी भक्ति और भी भक्तिमय होती जा रही है | सम्पूर्ण भारत मैं वे भक्ति का सागर बनाते जा रहे हैं | हिन्दू जागरण कर रहे हैं | हिन्दू शक्ति का संचार कर रहे हैं |…………….… स्मरण करें उस युग की जब मुस्लिम अत्याचारों ,लुटेरों से ,अंग्रेजों से हिन्दू धर्म नष्ट भ्रष्ट हो चूका था | कैसे कैसे हिन्दू रूप मैं एकाकार होते आज सत्ता मैं बैठा है | आज जब कुछ धर्म का पुनरोद्धार होने का समय और शक्ति आई है तब स्वरूपानंद जी हिन्दू शक्ति विखंडित करने के शस्त्र चला रहे हैं | कौन कितना धर्म मय है सब सर्वविदित है | कितने ब्राह्मण ब्राह्मण रह गए हैं ,कितने जनेऊ पहिनते हैं ,कितने वेदमंत्रों का उदघोस करते हैं …? कितने गायत्री मन्त्रों का जप करते संध्या करते हैं …? | कितने कर्मकांड रह गए हैं | कितने कर्मकांडी हैं | क्यों ब्राह्मणो को शुद्र होते .देख रहे हैं | ब्राह्मणत्व कहाँ गया …? | जब धर्म के रक्षक ज्ञाता ब्राह्मण ही नहीं रहे तो अन्य जातियाँ अपना धर्म कैसे निभा रही होंगी | जब स्वधर्म ही नहीं निभा पा रहे सनातन धर्मी तो अपना सनातन धर्म ,हिन्दू धर्म का क्या स्वरुप होगा यह स्वयं सिद्ध हो रहा है | ……………………………………………………...काम क्रोध ,मद ,लोभ ,मोह से परे ही साधु ,सन्यासी कहलाते हैं कितने हैं …? क्या सिर्फ साधु का चोला पहिनकर साधु बन सकते हैं …? क्या संत हैं …? | जिनमें कामनाएं हैं क्या वे साधु संत कहलाते हैं | योगी ,बैरागी कहलाने वाले क्या कार हेलीकॉप्टर मैं चलते ,कहलाते हैं , मठाधीश ….? ……………………………………………………..अब भारत मैं सिर्फ हिन्दू धर्म है उसको अपने मूल रूप मैं विखंडित करना क्या शुक्राचार्य का स्वरुप नहीं होगा …? क्या जन मानुषों मैं बैचैनी पैदा करना शुक्राचार्य का कृत्य नहीं होगा …? युद्ध मैं हार चुके राक्षशों को साम्राज्य वापिस दिलाने की कूटनीति नहीं होगी …? शायद मुस्लमान नहीं होते तो हिन्दू होते ही नहीं | गैर मुस्लिम ही हिन्दू कहलाये | क्या शुक्राचार्य राक्षशों को पुनः संजीवनी नहीं दे रहे हैं …? …………………………………………………………………………….भारत का भविष्य किस रूप मैं याद करेगा स्वामी स्वरूपानंद जी को | धर्म के स्वरुप देव गुरु बृहस्पति या युद्ध हार चुके राक्षशों के गुरु शुक्राचार्य …? गुरु दोनों ही हैं दोनों विद्वान धर्म ,ज्ञान विज्ञानं शक्तियों के ज्ञाता हैं | कभी देवगुरु सफल होते हैं तो कभी असुरगुरु शुक्राचार्य …| ………………………...अपने को चाणक्य सिद्ध कर चुके बाबा रामदेव का चाणक्य पद छीनने की लालसा किसी उत्प्रेरक का तो भला कर सकती है किन्तु हिन्दू धर्म का नहीं या स्वामी स्वरूपानंद का नहीं | साई भक्ति से ओत प्रोत सनातन धर्मी क्या शंकराचार्य से विमुख नहीं होते जायेंगे …? …………………………………………………………………………..…श्रद्धेय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को सनातन धर्मी हिन्दुओं का यही विनम्र निवेदन होगा कि हिन्दू धर्म को विसमतांओं मैं पुनः न डालकर उसके उत्थान को मार्गदर्शन प्रदान करें | देश आतंकवादियों ,कट्टपंथियों से पहिले ही ग्रसित है ,कैसे पुनः उसका सामना कर सकेगा | हिन्दू धर्म को शक्ति दें | उसे फिर असहाय न बनायें | पहिली बार भारत ने महसूस किया है कि भारत मैं ८० करोड़ हिन्दू रहते हैं | हिन्दुओं का यह अहसास बने रहने दो | हिन्दुओं का भविष्य आपका कृतार्थ रहेगा | शंकराचार्य सनातन धर्म के पूज्य रहे हैं और रहेंगे | ……………………………………………………..ओम शांति शांति शांति

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