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हँसी सपनों से भयभीत केजरीवाल ...

Posted On: 7 Feb, 2015 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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हे भगवन ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है | कुछ पाने की तड़प ,संघर्ष फिर पा भी लेता हूँ ,किन्तु भागने की प्लानिंग भी आरम्भ हो जाती है | जनता के भरपूर सहयोग ,एग्जिट पोल की सार्थकता ,अब तो मुख्यमंत्री पद मिल ही गया समझो | जीतने वाले जीत की खुशी से ,हारने वाले गम से निद्रा का हरण कर बैठते हैं | किन्तु मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जो जीतने के बाद भी चिंतित हो जाता हूँ | हरिश्चंद्र जो हूँ जो बोल दिया उसको पूरा करने का प्रण जो ले लेता हूँ | प्राण जाये पर बचन न जाये के सिद्धांतों पर जीता हूँ | इसीलिये अपने बचन को न निभा पाने के कारण ही त्याग कर देता हूँ | क्यों की गीता मैं कहा गया है की त्याग से ही भगवत प्राप्ति हो जाती है | फिर ओम शांति तो हो ही जानी है | …………………..केंद्र मैं सरकार भारतीय जनता पार्टी की है | ७० …७० …बचन देकर अब उन्हें निभाने की शक्ति कहाँ से लाऊंगा | एक तरफ केंद्र का दैत्याकार दहाड़ता स्वरुप दूसरी तरफ मीडिया का नोच खाने वाली चोंचें सब कुछ कैसे होगा | हे भगवन आप मेरी इच्छाओं को क्यों जल्दी से पूरा कर देते हैं | पिछली बार मुख्यमंत्री बना तो कैसे मैंने दुखदायी ४९ दिन काटे, मैं ही जानता हूँ |..क्या अटल बिहारी बाजपेयी की तरह ही १३ दिन .,१३ महीने सत्ता मैं रहने के बाद ही टिक पाऊंगा | …....४९ दिन यानि ४+9 =१३ का आंकड़ा ही पाया पहिली बार | अबकी बार क्या १३ महीने तो चला ही लूंगा ऐसी शक्ति कैसे पैदा करूँ | ….शायद उसके बाद ही पांच वर्ष का समय पूरा करने की शक्ति पा सकूंगा | …………………….जनता पता नहीं क्यों मेरे बचनो पर विश्वास कर लेती है | करोड़ों चीटियों से काटे जाते ,शेर की दहाड़ से डरता ,हाथी के चिंघाड़ से भागता डरता , कौवे सी मीडिया की काँव काँव मैं कैसे टिकूंगा | सब जीत की खुशी मैं मग्न होंगे किन्तु मैं ,मेरे दर्द को कोई कैसे समझ सकेगा | ………………………..अबकी पांच साल तक न भागने की सपथ भी खा चूका हूँ | सपथ पूरी न कर पाने का गम भी कितना कठिन होगा | क्या कोई बहाना सम्मानजनक हो सकेगा ,यह तो ऊपर वाला ही जानता है | ……………………………………………………………...लगता है प्रधानमंत्री पद पर भी, गाईड फ़िल्म मैं देवानंद की तरह बैठा दिया जाऊं | हे भगवन जिन झंझटों से बचते | असत्य भ्रष्ट लोगों से बचते पलायन करता रहा फिर जिम्मेदारियों का पहाड़ मेरे ऊपर डाल दिया जायेगा | दिल्ली से बचते यह सोचा शायद बात आई गयी हो जायेगी | किन्तु प्रबल जन समर्थन दीखते अब अपने कंधे मजबूत करने ही होंगे | अब यही सोचना होगा ,चिंतन करना होगा कि कैसे फिर असत्य ,भ्रष्ट लोगों से ,भयंकर जिम्मेदारियों से सम्मानजनक रूप से कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को आरोपित ,बदनाम करते चैन की नींद ली जाये | क्यों की कण कण मैं जन जन मैं व्याप्त हो चूका भ्रष्टाचार अब विकास का पर्याय बन चूका है | विना भ्रष्टाचार विकास कैसे होगा ..? भ्रष्टाचार हटेगा तो विकास कैसे होगा | घर भ्रष्ट ,नाते रिश्ते भ्रष्ट ,मोहल्ले भ्रष्ट ,जाती भ्रष्ट ,धर्म भ्रष्ट ,नेता भ्रष्ट ,राजनीती भ्रष्ट ,मीडिया भ्रष्ट ,डॉक्टर भ्रष्ट ,इंजीनियर भ्रष्ट ,वकील भ्रष्ट लगता है भ्रष्टाचार एक जीवन का सत्य होते अंग है | क्या राज तंत्र के राजाओं की तरह ही मीडिआ पर अंकुश लगाते सिर्फ धर्म ,सत्य ,अहिंसा ,नैतिकता ही दर्शाना ही कानून हो | किसी पुलिस स्टेशन की तरह मीडिया अपने धार्मिक ग्राफ ही दरसाए | तभी यह हो सकता है | किन्तु मीडिया पर लगाम न लगाई तो वह सत्य तो उजागर करेगा ही साथ ही स्टिंग ओप्रेसन करते और भी ग्राफ को बढ़ाता जायेगा | फिर कैसे केजरीवाल जी भ्रष्टाचार विहीन समाज राष्ट्र बना पाएंगे | इससे अच्छा तो यही होता कि भाग्य हीन की तरह मैं भी चुनाव बुरी तरह हार जाता | और आम जनता ,लोग एक स्वप्न की तरह केजरीवाल को भूल जाते | एक भ्रष्ट भ्रष्ट चिल्लाने वाला जीव मात्र ही रह जाता | राजा लोग तो धर्म की स्थापना के लिए मीडिया से लेखकों से सिर्फ राज्य की राजा की स्तुती ही लिखने की आज्ञा देते थे | लेखकों का धर्म सिर्फ स्तुती लिखना ही होता था | तभी तो अन्य राज्यों मैं ,देश मैं यह लगता था कि वहाँ एक महान राजा है जहाँ राम राज्य कायम है | अब भारत मैं तो दुनिया का महान लोक तंत्र माना जाता है | कैसे इस मीडिया से निपटा जाये की भ्रष्टाचार विहीन राष्ट्र का प्रधान मंत्री अरविन्द्र केजरीवाल निष्कंटक रूप से राम राज्य सा केजरीवाल र्राष्ट्र की मिसाल देता रहे | लोक तंत्र मैं तो कुछ मीडिया वाले लोगों को पटाया जाता है तो वहीँ कुकुरमुत्तों की तरह ही विरोधी मीडिया वाले लेखक उग आते हैं जिससे स्तुतिगान करना व्यर्थ होता चला जाता है | एक धर्म होता तो दूरदर्शन या समाचार मैं घोषित कर दिया जाता क़ि राजा का या राजा के आदेश का उल्लंघन अपराध के साथ नरक गामी करेगा | राजा की स्तुती ही करना धर्म घोषित कर दिया जाता | लेकिन क्या किया जाये विभिन्न धर्म होने के कारण यह करना भी मुमकिन नहीं होगा | अब तो यही विचार करना पड़ेगा क़ि कैसे सम्मान जनक त्यागपत्र दिया जाये | जिससे अपने मान सम्मान को अमर किया सके केजरीवाल के हसीन सपनों के भय |…………………………………………………….ॐ शांति शांति शांति

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