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AAP सम्भोग से समाधी की ओर

Posted On: 3 Sep, 2016 Others में

PAPI HARISHCHANDRASACH JO PAP HO JAYEY

PAPI HARISHCHANDRA

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व्यंग ..आशुतोष तुम औघड दानी .….आशुतोष यानि थोड़े सबको खुश कर देने वाले( शिव ) तुम औघड़ भी हो दानी भी हो | जब समुद्र मंथन के बाद हलाहल विष के संताप से विश्व जलने लगा तो आप ने ही विष पान कर विश्व को संताप से मुक्त किया था | ……………………………………………………………………………………………………….आज भी जब विश्व AAP के मंत्री ‘संदीप कुमार’ के सेक्स सी डी विष से जल रहा था तो अपने इस सेक्स विष का अपने पूर्ववत स्वरुप मैं औघड़ और दानी की तरह अपने अंदर समाहित कर लिया | जिसको विश्व विष समझ रहा था वह विष तो था ही नाहीं | यह ज्ञान सर्व सुलभ कर दिया | …………………………………………………………………………………………….जिस संदीप कुमार की सेक्स सी डी से दिन दूनी रात चौगुनी .आमदनी करते देश के मुख्य टी वी चेंनेल पोषित हो रहे थे ,उसको विषहीन सिद्ध करते उनके विष ज्ञान को नकार दिया | आजतक और एबीपी जैसे मुख्य चैनेल जिनको देखकर ही आत्म शांति का बोध लोग करते थे वे अपने परिवार साथ उसको नाहीं देख प् रहे थे | एकांत मैं ही उसको देखने को लालायित हो रहे थे | अब क्या होगा अब क्या होगा …..?…………………………………………………………………….धन्य हो आशुतोष जी आप AAP के ही नाहीं सम्पूर्ण आम आदमियों के भी शिव सिद्ध हो गए हो | धन्य हो ज़ी टी वी जिसने आप के संदीप के इस सेक्स सी डी को न दिखा कर एक मर्यादा कायम की | साथ ही आशुतोष के ज्ञान से यह भी सिद्ध कर दिया कि जिसको हम विष समझ रहे थे वह तो महा आनंद दायक संजीवनी सूरा ही थी जिसका पान इतिहास मैं भी बड़े बड़े देवता ही नाहीं महान मनुष्य भी करते रहे थे | इस आनंद दायक विष पान करने वालों की लिस्ट मैं AAP के धुरंधर संदीप कुमार भी शामिल हो गए हैं | अभी पुरष्कृत नाहीं हो पाए हैं तो क्या…. उनका भविष्य भी क्रांतिकारी राष्ट्रपिता , राष्ट्र भक्त ,प्रधानमंत्री ,सा होगा | ………………………………………………………………………………………………………महान पत्रकार और नेता आशुतोष जी.की ..प्रेम गाथा लिस्ट मैं ‘संदीप कुमार’ महान लोगों के साथ अपने को पाकर गौरवान्वित हो रहे होंगे | उनके १५० किलो के बजन वाला शरीर अवश्य तनाव मुक्त होते भविष्य मैं ब्लड प्रेसर और .हृदय रोग से मुक्ति पाएंगे | साथ ही AAP के ही नहीं अन्य पार्टियों के लोग भी इस हलाहल विष के भय से मुक्त महसूस कर रहे होंगे | .आम दलित समाज नेता के पर आई आपदा से त्रस्त दलित लोग भी तनाव मुक्ति प् रहे होंगे | ………………………………………………..भारत की …आम जनता ..ही नहीं विश्व की आम जनता भी इस वाइरस रूपी सेक्स सी डी हलाहल के भय से मुक्त हो जायेंगे | ………………………………………………………………………..जब किसी का कोई लांछन नहीं आरोप नहीं तो कैसे किसी के साथ सम्भोग दोष विषाक्त हो सकता है | ……………………….सिर्फ इतना सा सार आशुतोष का और सेक्स सी डी विष मुक्त …..|……………………………………………………………………………………………………….. ( सब विषाक्त कर दिया गया है, छोटे छोटे बच्चों को स्मझाया जा रहा है की सेक्स पाप है,फिर जब यह बच्चे जवान होंगे इनकी शादियाँ होंगी इनके मन में यही रहेगा की सेक्स पाप है और यह अपना गृहस्थ जीवन पाप की बुनियाद पर खड़ा करेंगे , मेरी दृष्टि है की मनुष्य को जो पहली बार समाधि का अनुभव हुआ,परमात्मा का अनुभव हुआ, वो संभोग के क्षणों में हुआ, और ऋषियों ने जब ध्यान किया, मेडिटेट किया तो उन्होने जो समाधि की अवस्था देखी तो वो ऐसी ही लगी जैसी की काम मे होती है, काम में आपको मात्र कुछ क्षण ही आनंद प्राप्त होता है, जबकि जब आप समाधि मे होते हैं, आप 24 घंटे उसी आनंद में रहते हैं. काम के क्षण में मन निर्विचार हो जाता है, परंतु मात्र उतनी ही देर तक, हमें नींद क्यूँ अच्छी लगती है या शराब या ड्रग्स क्यूँ पीते हैं लोग, जिससे मन निर्विचार हो जाए, लेकिन यह सब तो बाह्य साधन की वजह से होता है एवं अति भी होती है तो वहां नुकसान हो जाता है, तो क्या मार्ग है उस आनंद को स्थाई रूप से पाने का…..?…., वही पर ध्यान और समाधि और मोक्ष का आविर्भाव ,. काम एक उर्ज़ा है, जो नीचे की ओर बहती है, उस उर्ज़ा को समझ कर ऊपर की ओर ले जाना ही समाधि है, जब वीर्य के एक कतरे में इतनी शक्ति है की वो बुद्ध , राम ,कृष्ण, मोहम्मेद, नानक जैसे लोगों को पैदा कर सकता है तो क्या नही कर सकता? जैसे वैज्ञानिकों ने अणु की शक्ति को पहचाना और उसका उपयोग किया दोनो रूपों में सृजन में और विनाश में. दवाइयों में, बिजली बनाने में, और बम भी बनाया, तो फ़ायदा भी है और नुकसान भी है. हम पर निर्भर करता है कि हम उस उर्ज़ा का क्या करते हैं. लेकिन जब तक हम काम को नही जाँएंगे हम राम को नही पा सकते, खजुराहो की मूर्तियाँ क्या है? सब मैथुन रत मूर्तियाँ देखते हैं, जो दीवालों पर उधेड़ी गयी हैं, लेकिन उस मदिर के अंदर जो गर्भ गृह है वहा क्या है, वहां परमात्मा की मूर्ति है, खजुराहो के मंदिर से हिंदुओं को बड़ी पीड़ा होती है क्योंकि वो उत्तर नही दे पाते की मंदिर में ऐसी अश्लील मूर्तियाँ? लेकिन जिन्होने बनाई उन्होने क्यूँ बनाई? कारण यही था की यदि परमात्मा तक पहुँचना है( जो मंदिर के गर्भ गृह में हैं) तो यह जो बाहर गेलरी में काम है,सेक्स है उससे मुक्त होना पड़ेगा ,.उस्के पार होके जाना पड़ेगा.”.)…….कोई भगवन बन चुके ज्ञान दे चुके है | …………………………………………………………………………………………………………………कोई भगवन बनने की तरफ अग्रसर हैं | सेक्स ज्ञान से आनंदित आप के आशुतोष का ब्रह्मास्त्र सा ब्लॉग ज्ञान अवस्य ही सभी राजनीतिक पार्टियों को घायल कर चूका है | युद्ध और सेक्स मैं कोई मर्यादाएं नहीं होती यही राजनीती का सिद्धांत है | एक पत्नी ब्रती तो कोई हो भी सकता है या नहीं किन्तु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवन राम को माना जाता है |.क्षुब्ध भारतीय मर्यादावान समाज आज किसी सन्मार्ग की आश लिए है किन्तु राजनीतिक पार्टियां आज भी रामदेव की तरह विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट को नीचा दिखाते समाधी की तरफ अग्रसर हैं | किसका सिक्का जमता है किसका प्रोडक्ट विकता है | कौन भ्रष्ट है कौन व्यभिचारी है सब कुछ जनता जनार्दन ही चुनाव परिणामों मैं बता देगी | …………………………………………………………….क्या केजरीवाल की AAP सम्भोग से समाधिष्ट हो सकेगी …? यह सवाल हर सन्मार्गी चिंतक के मन मष्तिष्क मैं गूंज रहा है | …………………………………………………………किन्तु संत तुलसीदास केजरीवाल को सम्भोग से समाधी की तरफ जाते देख चुके हैं | ……………………………………………………………………………………………………………….व्यथित तुलसीदास ने कलिकाल का भविष्य पाहिले ही देख लिया था …………...मार्ग सोई जा कहुँ जोई भावा | पंडित सोई जो गाल बजावा || मिथ्यारंभ दम्भ रत जोई | ता कहूँ संत कहई सब कोई || …….(.जिसको जो अच्छा ,वही मार्ग है ,| जो डींग मारता है ,वही पंडित है | जो मिथ्या आरम्भ करता (आडम्बर रचता )है और जो दम्भ मैं रत है ,उसी को सब कोई संत कहते हैं |.)………………………………………...सोई सयान जो परधन हारी | जो कर दम्भ सो बड़ आचारी || जो कह झूँठ मसखरी जाना | कलियुग सोई गुनवंत बखाना || .……(जो किसी भी प्रकार से दूसरे का धन हरण कर ले ,वही बुद्धिमान है |जो दम्भ करता है वही बड़ा आचारी है | जो झूठ बोलता है और हंसी दिल्लगी करता है वही कलियुग मैं गुणवान कहा जाता है || ……………………………………जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ | मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ || ..…..(जिनके आचरण दूसरों का अपकार अहित करने वाले हैं ,उन्हीं का गौरव होता है और वे ही सम्मान के योग्य होते हैं | जो मन कर्म और बचन से झूठ बोलने वाले होते हैं वे ही कलियुग मैं बक्ता मने जाते हैं | ) ……,…………………....धनवंत कुलीन मलिन अपि | द्विज चिन्ह जनेऊ उधार तपी || नहीं मान पुराण न बेदहि जो | हरि सेवक संत सही कलि सो || …..(धनी लोग दलित होने पर भी कुलीन माने जाते हैं | द्विज का चिन्ह जनेऊ दिखावा रह गया और नंगे बदन रहना तपस्वी का | जो बेदों और पुराणों को नहीं मानते ,कलयुग मैं वे ही हरि भक्जत और सच्चे संत कहलाते हैं || ) ……………………………………………………………………………………..कवि वृंद उदार दूनी न सुनी | गुन दूषक व्रात न कोपि गुनी || ….(कवियों के तो झुण्ड हो गए ,पर दुनियां मैं उदार कवियों का आश्रयदाता सुनायी नहीं पड़ता | गुण मैं दोष लगाने वाले बहुत हैं ,पर गुणी कोई नहीं || ) ……………………………………………………………………………..…AAP के संदीप कुमार और आशुतोष का बलिदान .. अवश्य ही मर्यादायों के चक्रव्यूह को तोड़ केजरीवाल को आत्म शांति प्रदान कर देगा ऐसा राजनीतिक चाणक्यों का अनुमान हो रहा है | पंजाब और गोवा शांतिकारक परिणाम देंगे | ………………………………………………...ॐ शांति शांति शांति

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