blogid : 10082 postid : 57

धरती की आँख नम है...

Posted On: 4 May, 2012 Others में

कड़वा सच ......सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

Mohd Haneef "Ankur"

23 Posts

650 Comments

धरती की आँख शोक से संतप्त हो गई।

तलवार तेरी खून से जब तृप्त हो

………………………………………………………………..

 घृणा के बीज वो दी अवनि की कोख में,

लगता है की इंसानियत भी सख्त हो गई।

…………………………………………………………………

 धरती के लाल वो रहे फसलें विनाश की,

पावस तेरी करतूत से ही लुप्त हो गई।

………………………………………………………………….

 विज्ञान की देकर दुहाई खुद को क्योँ कोसता,

अच्छे-बुरे की सोच तेरी सुप्त हो गई।

……………………………………………………………………

 झूठ का बोलबाला है धोका है हर तरफ,

सच्चाई यहाँ हार के अब पस्त हो गई।

……………………………………………………………………

 आती नहीं है मौत भी मांगे से दोस्तों,

निर्धन की जिंदगी भी कमबख्त हो

…………………………………………………………………..

 “अंकुर” ने जब भी प्रेम की आवाज़ उठाई,

आवाज़ उसकी सींखचों में जप्त हो गई.

*********************************************

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग