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इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे

Posted On: 4 Oct, 2012 Others में

awaazthe hindi poetry on the common issue of the common people, these poetry give AAWAZ to the views of people.

ilaagupta

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धर्म के नाम पर न बाटो मुझे,
जात के नाम पर न काटो मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

खुद में इंसानियत की लोओ जलने दो मुझे,
इस लोओ को आगे बढ़ने दो मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

कट्टरता के लिए जानवर ना बनाओ मुझे,
खून पीना ना सिखाओ मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

दगों में न जलाओ मझे,
अपनों के खिलाफ न भडकाओ मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

परम शक्ति ने जो जीवन दिया है मुझे,
उस को प्यार बाटते हुए जीनो दो मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

किसी बेबस का सहारा बने दो मुझे,
रोते को हँसाने दो मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

अब तो इस नफरत को बुझने दो मुझे,
अब तो खुद को पहचान ने दो मुझे,
इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

इन्सान हू इन्सान ही रहने दो मुझे.

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