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ये हैं एशिया की पहली महिला डीजल इंजन ड्राइवर, राष्ट्रपति से मिला ‘नारी शक्ति पुरस्कार’

Posted On: 9 Mar, 2017 Others में

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कुछ करने का जुनून अगर आप में होता है, तो हर मुश्किल अपने आप हल हो जाती है और रास्ता आप खुद बना लेते हैं. ऐसी ही एक कहानी है मुंबई की मोटरवुमेन मुमताज एम. काजी की जो भारत की ही नहीं बल्कि एशिया की पहली महिला डीजल इंजन चालक हैं और हाल ही में उन्हें वो पुरस्कार मिला है जिसकी वो हकदार थीं, आईए जानते हैं इनकी कहानी.


cover mumtaz


मुंबई की मुमताज एम काज़ी को, जो देश ही नहीं पूरे एशिया की पहली डीजल इंजन ड्राइवर हैं समेत इस साल महिला दिवस पर अलग-अलग क्षेत्र की कई महिलाओं को पुरस्कार से नवाजा गया. मुमताज को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें नारी शक्ति पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए की राशि और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है.


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मुमताज 20 वर्ष की थीं, तब उन्होंने पहली बार ट्रेन चलाई थी, अब वो 45 साल की हो गई हैं, लेकिन अब भी अपना काम पूरे दिल से करती हैं. वह कई तरह की रेलगाड़ियां चला लेती हैं और फिलहाल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल-ठाणे पर मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन चलाती हैं. यह रेलवे मार्ग किसी महिला ड्राइवर द्वारा चलाया जानेवाला देश का पहला और सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला मार्ग है.


mumtaz


लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए मुमताज को सबसे पहले अपने परिवार से लड़ना पड़ा. 1989 में रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन दिया था, तब उनके पिता ही उनके खिलाफ खड़े थे, जो स्वयं रेलवे में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं. उनके पिता का कहना था कि आजतक ये नौकरी केवल पुरुष ही करते आ रहे हैं, ऐसे में मुमताज इस क्षेत्र मे जाना सही नहीं होगा.


train



मुमताज अपनी जीद पर अड़ी रही और पिता को कुछ पारिवारिक मित्रों और रेल अधिकारियों ने मुमताज के सपनों को आगे बढ़ने का हौंसला दिया. आखिरकार उनके पिता ने हां कह दिया और उसके बाद मुमताज का चयन हुआ और 1995 में पहली महिला डीजल इंजन ड्राइवर होने पर उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया. अब पूरा परिवार मुमताज पर गर्व करता है…Next


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