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बॉर्डर पर भारतीय जवान के इस जज्बे को आप भी करेंगे सलाम

Posted On: 14 Jun, 2016 Others में

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भारत-पाक बॉर्डर पर अक्सर गोलियों की आवाजें सुनाई देती है. लेकिन कुछ दिन पहले इस बॉर्डर पर एक ऐसी इंसानियत की मिसाल देखने को मिली जिसने हम सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि, क्या दुश्मनी किसी इसांन की जान से बढ़कर है?


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भारत-पाक की सीमा पर तनाव की खबरें प्रतिदिन सुर्खियां बनती है, लेकिन इस तनाव के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने इस तनाव को कम करने का काम किया है. अक्सर नादानी में छोटे बच्चे बॉर्डर पार कर जाते हैं, ऐसे में कई बार उनकी जिंदगी किसी गुमनामी में खोकर रह जाती है. वह बॉर्डर पार करने के बाद या तो सलाखों में कैद हो जाते हैंं या फिर सेना की गोली के शिकार हो जाते हैं.  हाल ही में पाकिस्तान के कुछ लड़के अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए बाइक से निकल थे, लेकिन रास्ता भटक जाने की वजह से वह भारत के बॉर्डर में घुस आए. उन्हें इस बात का अंदाजा तब लगा जब सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने उन्हें पकड़ा और बताया कि, वो भारत के बॉर्डर में हैं. तीन लड़के जिनका नाम आमिर (15), नोमिन अली ( 14) और अरशद (12) था. उन्होंने बताया कि वो पाकिस्तानी है और गलती से भारत की सीमा में दाखिल हो गए थे.


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बीएसएफ ने उनपर भरोसा किया और उन्हें अपने कैंप ले गई, लेकिन जांच में जब वह निर्दोष पाए गए तो बीएसएफ जवानों उन्हें छोड़ दिया. भारत के इन जवानों ने न केवल उनका ख्याल रखा बल्कि उन्हें छोड़ते समय मिठाई और कुछ उपहार भी दिए. बीएसएफ ने उन लड़कोंं को छोड़ा तो 15 साल के आमिर ने बीएसएफ का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि, ‘हम बीएसएफ के व्यवहार से बहुत खुश हैं. उन्होंने हमें खाना खिलाया, हमारा हर तरह से ख्याल रखा. मैं चाहता हूं कि पाकिस्तान सरकार भी भारतीय लोगों का ख्याल उसी तरह से रखे.’


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बीएसएफ ने जैसे ही उन लड़कों को सही जगह पर पहुंचाया. उन लड़कों ने पाक के अधिकारियों सहित भारत के भी कुछ अधिकारियों को अपने घर पहुंचने की जानकारी दी. ऐसी कहानियां हमें ये सोचने पर मजबूर करती है कि, ‘भाईजान’ सिर्फ फिल्मों में नहीं बल्कि हर इंसान के अंदर होता है, बस हमें उसे खोजने आना चाहिए. क्योंकि बंदूक की भाषा से हम कभी किसी को नहीं जीत सकते… Next


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