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क्या सचमुच ऐसा भी हो सकता है...

Posted On: 6 Nov, 2013 Others में

अद्भुत दुनियारंग-बिरंगी दुनिया की अद्भुत तस्वीर और अनोखे रंग-ढंग को दर्शाता ब्लॉग

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odd news hindiजिंदगी एक ही है और इस एक जिन्दगी से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां भी होती हैं जो हम कभी जान ही नहीं पाते. हां कभी-कभार कोई ऐसा जरूर होता है जो बंधी-बंधाई कहानियों से अलग जानने और करने की हिम्मत करता है और फिर जो कहानी सामने आती है उसे जानने के बाद आप हैरान रह जाते हैं कि क्या सचमुच ऐसा भी हो सकता है?


यह आम धारणा है कि कहानियों में कुछ भी हो सकता है लेकिन असल जिंदगी किस्से-कहानियों से बहुत अलग होती है. असलियत की दुनिया को फतांसी आप कहानियों से नहीं जोड़ सकते. लेकिन जनाब यह भी एक बड़ा सच है कि कहानियां भी कहीं न कहीं असल जिंदगी से ही जुड़ी होती हैं इसलिए अगर कोई करना चाहे तो कुछ भी कर सकता है.


अब विडंबना यह है कि चांद पर अगर अमेरिका गया तो चांद पर जाने की हम सोच लेते हैं, मंगल पर अगर अमेरिका घर बसाने की बात कर रहा है तो हम मंगल पर भविष्य में कॉलोनी बसने की बात मान लेते हैं लेकिन अगर कोई कुछ कहता है तो हम उसे फतांसी मान लेते हैं, लेकिन हम भूल जाते हैं कि कई बार यह फतांसी भी सच होती हैं.


Susie Hewerसुसी ह्यूअर (Susie Hewer) एक साधारण महिला हैं लेकिन गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में इनके नाम पर जो रिकॉर्ड दर्ज है वह किसी भी रूप में साधारण नहीं है. कांसस सिटी मैराथन (Kansas City Marathon) में दौड़ते हुए 12 फुट डेढ़ इंच लंबा स्कार्फ बुनने का रिकॉर्ड दर्ज कर सुसी सुर्खियों में हैं. 41 वर्षीय सुसी अब तक 31 मैराथन दौड़ चुकी हैं और 4 मैराथन में उन्होंने दौड़ने के साथ बुनाई भी की है. गत माह यानि अक्टूबर 2013 को 12 फुट से भी ज्यादा लंबा स्कार्फ दौड़ते हुए बुनने का रिकॉर्ड सुसी के लिए पहला नहीं था. 2008 के लंदन मैराथन में इससे पहले वे मैराथन में दौड़ते हुए 5 फुट लंबा स्कार्फ बुनने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं. अपने ही बनाए रिकॉर्ड को इस वर्ष तोड़कर सुसी ने एक नया रिकॉर्ड तो बनाया ही है लेकिन इसके साथ ही इस तरह का कोई रिकॉर्ड बनाने वाली यह पहली महिला भी बन गई हैं.

क्या सचमुच ऐसा भी हो सकता है…

दौड़ते हुए बुनाई करना और ऐसा कोई रिकॉर्ड बनाना सुनने में जरा अजीब लगता है लेकिन ऐसा कोई रिकॉर्ड बनाने के विचार के पीछे इनकी एक दर्द भरी कहानी थी जो बहुत कम लोग जानते हैं.


सुसी ह्यूअर को बुनाई का बहुत अधिक शौक नहीं था लेकिन बुनाई उन्होंने अपनी मां पेगी वॉल्टन (Peggy Walton) से सीखी थी. 2005 में इनकी मां पेगी वॉल्टन की मौत हो गई जो भूलने की बीमारी वास्कुलर डिमेंशिया (vascular dementia) से ग्रस्त थीं. अल्जाइमर या वस्कुलर डिमेंशिया की स्थिति में दिमाग में खून का प्रवाह ठीक प्रकार से नहीं होने के कारण रोगी कुछ भी याद नहीं रख पाता, चिड़चिड़ा रहता है, बोलने में तकलीफ जैसी कई परेशानियों से उसके साथ-साथ उसके परिवार को भी दो-चार होना पड़ता है. इसका पूरी तरह कोई इलाज भी नहीं है और जो इलाज है भी वह बहुत महंगा है. इसलिए अपनी मां पेगी वॉल्टन की मौत के बाद सुसी ने उन्हें श्रद्धांजलि के रूप अल्जाइमर्स रोगियों के लिए फंड इकट्ठे करने के लिए पहली बार अल्जाइमर्स रीसर्च यू.के. (Alzheimer’s Research U.K.) के लिए दौड़ीं. 2006 में अपनी बुनाई ब्लॉग खोलने के बाद सुसी ने इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया.


फिलहाल सुसी अपने इस नए रिकॉर्ड से बहुत खुश हैं और अपने ब्लॉग से जुड़े डेविड बैबकॉक (David Babcock) के साथ मिलकर भविष्य में इसके लिए एक क्लब खोलने की तैयारी में हैं. साथ ही अगली न्यूयॉर्क मैराथन (New York marathon ) में डेविड बैबकॉक के साथ एक ही बुनाई सलाइयों के दो छोरों पर साथ-साथ बुनते हुए दौड़ने का एक नया रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं. सुसी का यह सपना पूरा होता है या नहीं ये तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि इन्होंने साबित कर दिया है कि दर्द भी कभी-कभी दवा का काम करता है.

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