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आश्चर्यजनक समानताएं थीं श्रीकृष्ण और ईसा मसीह के जीवन में, क्या आप जानना चाहेंगे?

Posted On: 24 Dec, 2014 Others में

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कहा जाता है कि भगवान तो एक हैं बस उसके रूप अनेक हैं. वो किसी भी रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत हो सकते हैं. राम, अल्ल्लाह, वाहेगुरु, जीसस, विभिन्न धर्मों में हम अकसर अलग-अलग रूप में भगवान के दर्शन करते हैं जो अपने उपदेशों द्वारा लोगों को सच्चाई व ईमानदारी का संदेश देते हैं. दुनिया में आज कितने ही धर्म मौजूद हैं. हर एक धर्म में एक गुरु व उनके उपदेशों की झलक दिखाई देती है. लेकिन आज हमारे समक्ष कुछ ऐसे तथ्य निकलकर सामने आए हैं जिनकी बदौलत हम यह कह सकते हैं कि धर्म चाहे कितने भी हों पर ‘भगवान एक है बस रूप अनेक हैं’.


Lord Krishna and Jesus Christ

हिन्दू धर्म में लोगों को सच्चे कर्म का मार्ग दिखाने वाले भगवान कृष्ण व ईसाई धर्म के गुरु ईसा मसीह के बीच काफी समानताएं देखी गई हैं. उनके जन्म स्थान से लेकर उनके कर्म व मृत्यु तक की सभी बातों में काफी हद तक समानता देखी गई है. तो आइए आपको कुछ ऐसे तथ्य बताते हैं जो इस बात का दावा करते हैं कि श्री कृष्ण व ईसा मसीह शायद एक ही थे.


कृष्ण व ईसा मसीह दोनों ही नोह से उत्पन्न हुए थे. यदि पुराणों को खंगालें तो यह पता लगता है कि कृष्ण व ईसा मसीह दोनों के जन्म की भविष्यवाणी बहुत पहले से कर दी गई थी. माना जाता है कि ईसा मसीह अब्राहम का रूप थे और कृष्ण स्वयं अब्राहम यानि कि ब्रह्मा के पिता थे. ईसा मसीह कोरेश, हेब्रियु व येहूदी के प्रतिरूप थे और कृष्ण कुरुस, अभीरा व यादव के प्रतिरूप थे.


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Hindu Religion

इन दोनों के जीवन की बात की जाए तो ईसा मसीह येह-वेह का अवतार बनकर आए थे और कृष्ण विष्णु व भगवान शिव का अवतार बनकर आए थे. ईसा मसीह का पहला नाम येशु था और कृष्ण को भी येसु के नाम से जाना जाता था. ईसा मसीह व कृष्ण दोनों ने किसी गर्भ से जन्म नहीं लिया था बल्कि दोनों ही धरती पर स्वयं प्रकट हुए थे. ईसा मसीह की मां का नाम मेरी था और कृष्ण की माता का नाम देवकी था.


दोनों महापुरुषों के वास्तविक रूप में पिता नहीं थे लेकिन कृष्ण को रक्षक के रूप में वासुदेव मिले थे और ईसा मसीह को जोसेफ. दोनों के बचपन पर गौर किया जाए तो दोनों जब शिशु थे तो उन पर राक्षस ने प्रहार किया था और उन्हें मारने की कोशिश भी की थी.


Christianity


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अपने शिशु की रक्षा करने के लिए वासुदेव कृष्ण को मथुरा छोड़ आए थे और जोसेफ ईसा मसीह को मतुरई छोड़ आए थे जो आज वास्तविक रूप में मिस्र में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इन दोनों महापुरुषों ने अपने लोगों के प्रायश्चित की पूर्ति करने के लिए मृत्यु को अपनाया था. इनकी इसी महानता को देखते हुए आज इन दोनों भगवान रूपी शख्सियतों का लोगों द्वारा पूजन किया जाता है. इतना ही नहीं 25 दिसंबर के ही दिन दोनों को श्रद्धापूर्वक याद भी किया जाता है.


Jesus Christ


अपने भक्तों के मन में बसने वाले ईसा मसीह व कृष्ण से संबंधित ऐसी कई कहानियां है जिनमें उनके भक्तों ने उनके प्रति प्रेम को दुनिया भर तक पहुंचाया है. ईसा मसीह की महिला उपासक का नाम मेरी मेग्डेलेन था और वहीं कृष्ण की महिला उपासक का नाम मीरा था जिसे भारत के कोने-कोने में जाना जाता है.


इन सभी बातों को जानने के बाद भी हमें यह ताज्जुब होता है कि इन दोनों शख्सियतों के जन्म में 2,000 वर्षों का अंतर होने के बावजूद भी कितनी समानताएं मौजूद हैं.


टिप्पणी: इस लेख में दिए गए सभी तथ्य इंटरनेट के विभिन्न स्रोतों से एकत्रित किए गए हैं.


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