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शादीशुदा ज़िंदगी में धोखा देने वालों, हो जाओ सावधान! ये महिलाएं रख रही हैं आप पर नजर

Posted On: 17 Dec, 2014 Others में

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सोशल मीडिया जहाँ लोगों को जोड़ने का वैश्विक जंक्शन बना हुआ है वहीं भारतीयों की शादीशुदा ज़िंदगी में यह भयावह भूत बनकर सामने आ रहा है. फेसबुक और व्हाट्सऐप के प्रयोग ने कई विवाहित जोड़ों की ज़िंदगी में खलल डाली है. दिल्ली में ही करीब 3,000 से अधिक निजी डिटेक्टिव एजेंसी हैं जिसे महिलायें चलाती हैं. ये एजेंसियाँ वैवाहिक जीवन में अपने साथी को धोखा दे रहे पति या पत्नियों की की जासूसी करते हैं और शिकायत करने वाले अपने ग्राहकों को उनके साथी के किसी से गुप्त संबंधों की जानकारी देते हैं. इन जासूसी-एजेंसियों में कमांडर्स होते हैं जो संदेहास्पद रिश्तों का सच खोजने की जिम्मेदारी लेते हैं और उससे संबंधित सूचनायें इकट्ठा कर अपने ग्राहकों को देते हैं.



तारालिका लाहिरी-

54 वर्षीया तारालिका लाहिरी ‘नेशनल डिटेक्टिव एंड कॉर्पोरेट कंसल्टेंट्स’ की निदेशक है. उनकी टीम में 15 लोग हैं. उन्होंने 24 वर्ष की उम्र में डिटेक्टिव एजेंसी में नौकरी शुरू कर दी थी. महिला होने के कारण उन्हें जाँच का जिम्मा न देकर विपणन (मार्केटिंग) का काम सौंपा गया. एक बार इलाहाबाद के एक बैंक में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया. तारालिका वैसे परिवार से आती है जिसके परिवार के सदस्य बैंकों में कार्यरत थे. इसलिए यह काम उसे सौंपा गया. फिर क्या था उन्होंने इतनी जल्दी यह मामला सुलझाया कि उसके बारे में यह कहा जाने लगा कि जो काम मर्द 10 दिनों में करते हैं वही मामला तारालिका दो दिनों में सुलझा देती है.


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भावना पालीवाल-

ऐसी ही एक कमांडर हैं भावना पालीवाल. पालीवाल इस पेशे में 15 वर्षों से हैं. वो अपने बीसवें बसंत की  शुरूआत में ही उत्तर प्रदेश के एक गाँव से दिल्ली आ गई थी. अपनी कॉलेज की पढ़ाई के बाद उसने पत्रकारिता के पेशे में आ गई. लेकिन एक वर्ष के भीतर ही वो डिटेक्टिव एजेंसी में काम करने लगी. अपने बारे में बताते हुये वो कहती हैं कि मैंने अपने परिवार को अपने पेशे के बारे में झूठ बोला. उन्हें ये लगता रहा कि मैं डेस्क पर काम करती हूँ. लेकिन मेरी तस्वीरें अख़बारों में छपने के बाद उन्होंने मेरे असली काम के बारे में पता लगा लिया. 38 वर्षीया पालीवाल बुशर्ट और चुस्त पतलून पहनती हैं. वह लंबे बालों के बीच लाल सिंदूर लगाती हैं. वो नाकों में हीरे की पिन पहनती हैं और गले में पेंडेंट पहनती है.



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वर्ष 2003 में उन्होंने उत्तरी दिल्ली की पीतमपुरा में अपनी एजेंसी ‘तेजस डिटेक्टिव एजेंसी’ खोल ली. उनके कार्यालय के बाहर कोई नाम और नम्बर नहीं है. हालांकि भारत में निजी जासूसी अवैध है. यह एक छोटा-सा कार्यालय है जिसमें केवल दो कमरे हैं. उसमें एक छोटा-सा रिसेप्शन और रसोईघर है. ये सभी लकड़ी के आकार की दीवारों से विभाजित हैं. वो कहती हैं कि उन्हें रोजाना तीन से चार फोन कॉल आते हैं जिनमें से कुछ वैवाहिक साइटों से जुड़ रहे जोड़ों में से किसी की पृष्ठभूमि की जाँच से संबंधित होती है. वो ऐसे मामलों के लिए 50,000 से 1,50,000 रूपये तक की शुल्क लेती है. विवाहित जोड़ों से संबंधित मामलों में शुल्क की राशि काम की प्रकृति पर निर्भर करती है. अमूमन यह लाखों में होती है. अपने अनुभव के आधार पर वो बताती हैं कि अधिकांश विवाहित जोड़े के रिश्तों में दरारें फेसबुक और व्हाट्सऐप के प्रयोग के बाद शुरू होती है.




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आकृति खत्री-

आकृति इस काम में दस वर्षों से लगी हुई है. अपने करियर में उन्होंने सेल्स का काम भी किया लेकिन वो उस काम के प्रति आकर्षित नहीं हो सकी. पूर्वी दिल्ली की पंजाबी परिवार में जन्मी आकृति उसी माहौल में पली-बढ़ी है. इसलिये वो वहाँ के माहौल से पूरी तरह वाकि़फ है. विनस डिटेक्टिव एजेंसी की 28 वर्षीया मालकिन प्रीत विहार के पंजाबी बहुल इलाके में काम करती है.



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वो कहती है कि वैवाहिक साइटों के द्वारा तय होने वाले रिश्तों की जाँच के मामले मिलने पर वो इसकी जाँच करती है. उन्होंने इसके लिए दोपहर में 01 से 02 बजे का समय निर्धारित कर रखा है क्योंकि इस समय पंजाबी महिलायें अपने घरों में आराम करते आसानी से मिल जाती है. आकृति कहती हैं कि इस समय वो उनके घर जाती हैं जिनकी जाँच का काम उन्हें मिला होता है. वहाँ वह महिलाओं को बातों मे उलझा कर अपने पास छुपा कर रखे गये कैमरों से उस घर में रखे सामानों की तस्वीरें खींच लेते हैं. बाद में वैवाहिक साइटों पर दिये गये विवरणों से वो इसका मिलान करते हैं.  Next….





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