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कब मर रहे हैं : हिन्दी हास्य कविता

Posted On: 5 Jul, 2011 Others में

थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )Shayri, jokes, chutkale and much more...

jack

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आजकल मेरे एक सहकर्मी के पास प्रतिदिन बीमा कंपनियों के फोन आते हैं, बेचारे इतने परेशान हैं कि पूछो मत. बेचारे कभी कभी तो इतना गुस्सा हो जाते हैं कि फोन पर ही गरियाने भी लगते हैं. लेकिन यह बीमा कपनी वाले क्या जानें इन बेचारों का दर्द.


अपने दोस्त की यह हालत देखकर मुझे एक हास्य कविता याद आ गई जो कुछ दिन पहले मैंने इंटरनेट बाबा से पढ़ी थी .. क्या कविता थी अब पूछिए मत मेरे दोस्त की हालत बताने के लिए इससे बेहतर तो कोई कविता हो ही नहीं सकती.


अब आप भी इस हास्य कविता को पढ़िए और मजा लीजिए.


Hindi Hasya Kavitaकब मर रहे हैं : हिन्दी हास्य कविता

हमारे एक मित्र हैं
रहने वाले हैं रीवाँ के
एजेंट हैं बीमा के
मिलते ही पूछेंगे-“बीमा कब कर रहे हैं।”
मानो कहते हो-“कब मर रहे हैं?”
फिर धीरे से पूछेंगे-“कब आऊँ


कहिए तो दो फ़ार्म लाऊँ
पत्नी का भी करवा लीजिए
एक साथ दो-दो रिस्क कवर कीजिए
आप मर जाएँ तो उन्हे फ़ायदा
वो मर जाएँ
तो आपका फ़ायदा।”
अब आप ही सोचिए
मरने के बाद
क्या फ़ायदा
और क्या घाटा


एक दिन बाज़ार में मिल गए
हमें देखते ही पिल गए
बोले-“चाय पीजिये।”
हमने कहा-“रहने दीजिए।”
वे बोले-“पान खाइए।”
हमने कहा-“बस, आप ही पाइए।”




Hindi Hasya Kavitaशाम को घर पहुंचे
तो टेबिल पर उन्ही का पत्र रखा था
लिखा था – “फ़ार्म छोड़े जा रहा हूँ
सोच समझकर भर दीजिए
प्रीमियम के पैसे
बहिन जी से ले जा रहा हूँ
रसीद उन्हे दे जा रहा हूँ
फ़ार्म के साथ
प्रश्नावली भी नत्थी थी
फ़ार्म क्या था
अच्छी खासी जन्मपत्री थी
हमने तय किया
प्रश्नो के देंगे
ऐसे उत्तर
कि जीवन-बीमा वाले
याद करेंगे जीवन भर
एक-एक उत्तर मे झूल जाएंगे
बीमा करना ही भूल जाएंगे


प्रश्न था-“नाम?”
हमने लिख दिया-“बदनाम।”
-“काम”
-“बेकाम।”
-“आयु?”
-“जाने राम।”
-“निवास स्थान?”
-“हिन्दुस्तान।”
-“आमदनी?”
-“आराम हराम।”
-“ऊचाँई?”
-“जो होनी चहिए।”
-“वज़न?”
-“ऊचाँई के मान से।”
-“सीना”
-“नहीं आता।”
-“कमर?”
-“सीने के मान से।”
-“कोई खराब आदत?”
-“हाँ है
शराब, गांजा, अफ़ीम
मीठा लगता है नीम।”
-“कोई बीमारी है?”
-“हाँ, दिल की
उधारी के बिल की
होती है धड़धड़ाहट
पेट में गड़गड़ाहट
माथे में भनभनाहट
पैरो में सनसनाहट
डॉक्टर कहता है-‘टी.बी.’ है।
और सबसे बड़ी बीमारी
हमारी बीवी है।”
-“कोई दुश्मन है?”
-“हाँ है
निवासी रीवाँ का
एजेंट बीमा का।”


भर कर भेज दिया फ़ार्म
इस इम्प्रेशन में
कि भगदड़ मच जाएगी कारपोरेशन में
मगर सात दिन बाद
सधन्यवाद
पत्र प्राप्त हुआ-
“आपको सूचित करते हुए
होता है हर्ष
कि आपका केस
रजिस्टर हो गया है इसी वर्ष।”



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