blogid : 24142 postid : 1264980

प्रभात फेरी....

Posted On: 1 Oct, 2016 Others में

शब्द बहुत कुछ कह जाते हैं...कुछ हक़ीकत से रूबरू...कुछ मन की गुफ्तगू...

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL

49 Posts

48 Comments

सूर्योदय के संग जब दिन की शुरुआत होती हैं
सुहानी हवाओं से आसमाँ जमी की मुलाकात होती हैं
जिसमे वंदना ईश्वर की होती हैं
प्रभात फेरी गाँव शहर की होती हैं
संस्कारों की बाते जब कभी दादी मेरी कहती हैं
जहाँ हम घूमना बोलते हैं वही दादी उसे प्रभात फेरी कहती हैं !

कंचन काया को जिससे आराम रहता हैं
मिलने वालो की ज़ुबाँ पर राम राम रहता हैं
पावन प्रेम का जिससे नित विस्तार होता हैं
शांत सरल सुखी जीवन का जो मूल आधार होता हैं
मनको की तरह जुड़ जुड़ के जो एक माला बन जाती हैं
ईर्ष्या बैर सब दूर जिंदगी आनंद की मधुशाला बन जाती हैं !

कदम से कदम मिलते हैं एक सुंदर सा समाज बन जाता हैं
सुबह सुबह सबसे मिलना मधुर जीवन का राज बन जाता हैं
रोज रोज आनंद के अवसर आते रहते हैं
हृदय भीतर उर्जा के समंदर जाते रहते हैं
आलस दबे पाँव कही कोसों दूर भाग जाता हैं
अच्छे सच्चे उपदेशों से सोया इंसान जाग जाता हैं
अंत नही इसकी महिमा ये तो खुशियों का भंडार हैं !
हैं प्रभात फेरी में प्रकाश सच्चा, बाकी तो बस अंधकार हैं !
जितेंद्र अग्रवाल “जीत”
मुंबई..मो. 08080134259

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग