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जाली नोट का गंदा खेल

Posted On: 8 Nov, 2011 Others में

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Nishikant Thakur

हाल ही में पंजाब में दो अलग-अलग जगहों से बड़ी रकम की जाली भारतीय मुद्रा पकड़ी गई है। इसमें एक मामला तो समझौता मालगाड़ी का है, जो पाकिस्तान से आ रही थी। अमृतसर में समझौता मालगाड़ी से दो लाख रुपये की जाली करंसी बरामद की गई है। दूसरा मामला मानसा का है। वहां रोडवेज के एक बस ड्राइवर से चार लाख 42 हजार रुपये की जाली करंसी पकड़ी गई है। समझौता एक्सप्रेस से पकड़ी गई जाली करंसी को जिस तरह छिपाया गया था, वह हैरतअंगेज है। ये नोट मालगाड़ी की एक बोगी के नीचे लगे मैगनेट व लोहे के बड़े-बड़े छल्लों के साथ रैप कर छिपाई गई थी। कस्टम अधिकारियों को इसके बारे में पक्की सूचना मिल गई थी, लिहाजा उन्होंने अटारी में मालगाड़ी के पहुंचते ही उसे चारों तरफ से घेर कर सघन तलाशी शुरू कर दी है। इसी अभियान के दौरान सीमा शुल्क विभाग के एक अधिकारी के सिर में गंभीर चोट भी लग गई। उधर बस ड्राइवर को संदिग्ध हालात में घूमते हुए क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी ने पकड़ा है। ये दोनों ही मामले सामान्य तौर से लिए जाने लायक नहीं हैं।


ऐसे समय में इस मसले को ज्यादा सतर्क नजरिये से देखे जाने की जरूरत है, जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियां पाटने की गंभीर कोशिशें चल रही हैं। एक तरफ तो पाकिस्तान भारत को सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा देने की बात करता है और और फिर अगले ही दिन खुद अपनी ही बात से जाने किस दबाव में मुकर जाता है। दूसरी तरफ, कभी भारत में अर्थव्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने के लिए जाली करंसी भेजता है तो कभी युवाओं को बहकाने के लिए मादक द्रव्य भेजे जाते हैं और पूरे देश का जनजीवन अस्त-व्यस्त करने के कुत्सित इरादे से आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की साजिश तो उधर से निरंतर होती ही रहती है। पाकिस्तान अपने इन सभी कारनामों को अंजाम इन्हीं सीमावर्ती प्रांतों के रास्ते से ही देता है। इनमें जम्मू-कश्मीर और पंजाब सबसे पहले आते हैं। इन्हीं राज्यों से होते हुए वह देश के दूसरे राज्यों तक भी अपने कुत्सित इरादों को अंजाम देने के लिए सामग्री पहुंचा देता है। इसमें कुछ भी नया नहीं है। भारत का पूरा प्रशासनिक अमला ही नहीं, बल्कि आम जनता भी इस बात को बखूबी जानती है और इसीलिए पाकिस्तान पर कोई भी किसी प्रकार भरोसा नहीं करता है।


इसके बावजूद वह कई बार अपने गंदे इरादों को अंजाम देने में सफल हो जाता है। यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि ऐसा कैसे होता है? निश्चित रूप से बहुत बार यह हमारी असावधानी के कारण होता है। बेशक असावधानी भी कोई वाजिब कारण नहीं है। फिर भी इसके लिए क्षमा किया जा सकता है। मुश्किल यह है कि अधिकतर उनके इरादे हमारे ही कुछ लोगों के लालच के कारण सफल होते हैं। यह कौन नहीं जानता कि कोई 50 का सौ अगर देगा तो उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ी तो होगी ही। हो सकता है कि वह एक-दो बार चल भी जाए कहीं, लेकिन गलत चीज बहुत दिनों तक चलती नहीं रह सकती है। जब वह पकड़ी जाएगी तो क्या स्थिति बनेगी? यह सवाल लोग पहले नहीं सोच पाते हैं, ऐसा नहीं है। सब कुछ जानते-समझते हुए भी लोग इनके दलालों के झांसे में आ ही जाते हैं। इसके मूल में अज्ञानता कम, लालच बड़ा कारण होता है। उस समय लोग यह नहीं सोच पाते हैं कि उनका छोटा सा लोभ देश को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। दूसरी तरफ, यह भी एक बड़ी समस्या है कि असली और नकली नोट के बीच फर्क को समझ पाना भी कोई बहुत आसान काम नहीं है। शायद यही वजह है कि वह अक्सर अपनी साजिश में सफल हो जाता है।


पिछले एक दशक में ही पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदाथरें की तस्करी का जो संजाल भारत में बनाया है, वह हैरतअंगेज है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से लेकर दिल्ली तक उसका यह नेटवर्क फैल चुका है। रोज नए-नए युवक इनके जाल में फंस रहे हैं। इस तरह पाकिस्तान देश के युवा वर्ग को नष्ट करने का पूरा दुष्चक्र रच रहा है। बहुत हैरत नहीं होनी चाहिए, अगर पिछले दिनों हिमाचल में पकड़ी गई नशीली दवाओं के नेटवर्क के पीछे भी कहीं किसी पाकिस्तानी एजेंसी या गिरोह का हाथ पाया जाए। यह आशंका कई बार जताई जा चुकी है कि नशीली दवाओं से लेकर जाली करंसी और आतंकवादियों की घुसपैठ तक के सारे मामलों के तार कहीं न कहीं से आपस में जुड़े हुए हैं। इस आशंका की एक बड़ी वजह यह है कि आम तौर पर नशीले पदाथरें के काले कारोबार और आतंकवाद जैसे घिनौने कायरें के लिए जाली करंसी का ही इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा केवल यहीं होता हो, ऐसा नहीं है। दुनिया भर में जहां कहीं भी ऐसी साजिशें चल रही हैं, वहां जाली करंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बात अब पानी की तरह साफ हो चुकी है कि भारत में जितनी भी जाली करंसी आ रही है, उसके लिए मुख्य रूप से पाकिस्तान ही जिम्मेदार है। राजस्व सतर्कता निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और एनआइए तक की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं। एनआइए तो कई तरह की प्रक्रियाओं से परखने और गहन जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि जाली करंसी बनाने का काम पाकिस्तान ही करता है। दूसरी तरफ, भारत की सतर्कता एजेंसियां यह भी पता लगा चुकी हैं कि पाकिस्तान को इसमें डी कंपनी की भी मदद मिलती है। भारत में जाली करंसी नेपाल, बांग्लादेश और दुबई के मार्फत आती है। इस खेल में बहुत शातिर दिमाग लोग तो लगे ही हुए हैं, इसके लिए वे निहायत शातिराना तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं। दुबई में अधिकतर ऐसे भारतीय श्रमिकों का इस्तेमाल किया जाता है जिनके पास घर लौटने के लिए पैसा नहीं होता है। गिरोहबाज उनके लिए टिकट का इंतजाम कर देते हैं और बदले में उनसे सूटकेस पहुंचाने की शर्त रखते हैं।


सच तो यह है कि ऐसे जाने कितने और तरीकों का इस्तेमाल किया जाता होगा, लेकिन जो भी तरीके इस्तेमाल में लाए जाते हैं, सभी किसी न किसी तरह हमारी कमजोरियों का फायदा उठाकर ही प्रयोग में लाए जाते हैं। जाली करंसी पकड़ी भले ही पंजाब में गई है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह चल पूरे देश में रही है। कभी कहीं पकड़ ली जाती है तो चर्चा में आ जाती है, वरना कहीं जिक्र भी नहीं होता है। जाली करंसी का चलना कोई सामान्य बात नहीं है। यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था में लगे घुन जैसी बात है। सरकार को चाहिए कि वह इसके चलन को पूरी तरह रोकने के लिए कोई मुकम्मल व्यवस्था बनाए। इसके लिए बड़ी रकम के नोटों का चलन बंद करने के उपाय पर भी विचार किया जा सकता है। यह भी सही है कि किसी प्रकार का कोई भी उपाय तब तक काम नहीं आएगा जब तक कि जनता खुद सचेत नहीं होती है। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी जनता का सचेत होना है।


लेखक निशिकान्त ठाकुर दैनिक जागरण में हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश के स्थानीय संपादक हैं


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