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अन्ना का आंदोलन – वास्तविकता या भ्रम ?

Posted On: 18 Aug, 2011 Others में

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प्रिय पाठक,


भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर जारी हुआ अन्ना हजारे और उनके साथियों का आंदोलन आज एक विशाल जनसमर्थन के साथ सरकार की नींद उड़ा रहा है। सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए अन्ना हजारे सहित सिविल सोसायटी के महत्वपूर्ण सदस्यों को अनशन के आरंभ के पूर्व ही गिरफ्तार कर लिया लेकिन भारी जनसमर्थन और जनता के विरोध को देखते हुए उसे झुकना ही पड़ा। परिणामस्वरूप सिविल सोसायटी के गिरफ्तार हुए सदस्यों को रिहा कर दिया गया लेकिन अन्ना हजारे ने बिना शर्त अनशन की अनुमति देने की मांग के साथ जेल के अंदर ही अपना अनशन शुरू कर दिया।


इस आंदोलन के दौरान कुछ विशिष्ट बातें देखने को मिलीं जो इसे अन्य आंदोलनों से अलग बनाती हैं। अन्ना हजारे के समर्थन में ना सिर्फ शहरी क्षेत्रों के लोग आगे आए बल्कि इसमें दूर-दराज के कस्बाई और ग्रामीण इलाके के लोग भी मन-प्राण से भागीदारी कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ और सशक्त लोकपाल के समर्थन में आरंभ हुआ एक छोटा सा आंदोलन कब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में परिणत हो गया इसका अंदाजा लगा पाना वाकई मुश्किल है।


लेकिन वहीं कुछ बुद्धिजीवी और आंदोलन के विरोधी इसे सरकार द्वारा प्रायोजित भी बता रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि सरकार ने अपने विरुद्ध विभिन्न आरोपों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस आंदोलन को खड़ा किया है ताकि इस हलचल में मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान हट जाए। इसके अलावा कुछ लोगों की राय में अपनी मांगें मनवाने के लिए अनशन और सत्याग्रह का तरीका एक प्रकार से ब्लैकमेलिंग है।


ऐसे हालातों में कुछ बुनियादी सवाल जरूर खड़े होते हैं जिन पर विमर्श और वाद-विवाद से बदलते हालातों पर रोशनी डाली जा सकती है, जैसे:


1. क्या ये आंदोलन अन्ना हजारे के व्यक्तित्व के करिश्मे के कारण एक विशाल जनांदोलन बन गया है?

2. क्या आज भारत एक परिपक्व और जागरुक लोकतंत्र में तब्दील हो चुका है जिस कारण इस आंदोलन को भारी जनसमर्थन मिल रहा है?

3. मांगें मनवाने के लिए अनशन और सत्याग्रह का तरीका किस सीमा तक जायज है?

4. क्या मजबूत लोकपाल वाकई संसदीय लोकतंत्र की संप्रभुता का हनन करने वाला सिद्ध हो सकता है?

5. कहीं ये आंदोलन सरकार द्वारा अपने विरुद्ध लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता का ध्यान हटाने के लिए एक प्रायोजित आंदोलन तो नहीं?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


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