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त्यौहारों का मौसम है....रौनक तो लगेगी

Posted On: 17 Jul, 2014 Others में

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JJ Blog

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प्रिय पाठकों,

रमजान का महीना है और कुछ ही दिनों बाद ईद का चांद भी अपनी छटा बिखेरने वाला है। ईद के साथ ही त्यौहारों के मौसम की शुरुआत भी होने वाली है और इस कड़ी में सबसे पहला नाम आएगा भाई-बहन के स्नेह को प्रदर्शित करते रक्षाबंधन के त्यौहार का। आगामी 28 जुलाई को ईद और 10 अगस्त को राखी का त्यौहार भव्य तरीके से मनाया जाएगा, ऐसे में जाहिर है सभी लोगों ने अपनी-अपनी तैयारियां आरंभ कर दी होंगी। वैसे तो विश्व के सभी देशों में यह त्यौहार हर साल बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है लेकिन रिश्तों की असली चमक सिर्फ भारत में ही दिखती है। यहां सभी धर्मों के लोग सम्मान और स्वतंत्रता से अपने-अपने धर्म और त्यौहारों का पालन कर सकते हैं इसलिए फेस्टिवल सीजन का मजा यहां दोगुना हो जाता है।



ईद की बात करें तो सुबह के समय नमाज पढ़ने के बाद लोग सभी गिले-शिकवे भूलकर एकदूसरे को गले लगाते हैं और फिर बारी आती है ईदी देने और सेवियां खाने की, जो बच्चों को तो खूब पसंद होती है। वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन, जो भाई-बहनों के खट्टे-मीठे रिश्ते को दर्शाता है, की अपनी ही विशेषताएं हैं। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहन से हर मोड़ पर उसका साथ देने, उसे सुरक्षित रखने का वायदा करते हैं।


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भाई-बहनों के बीच खट्टी-मीठी टकरार चलती रहती है लेकिन ये भी सच है कि इसी टकरार में उनका प्यार भी छिपा है। प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले इन त्यौहारों के साथ आपके अपने बचपन की भी कुछ मजेदार यादें या अनुभव जुड़े होंगे और जागरण मंच आपको इन्हीं अनमोल यादों को अन्य ब्लॉगरों के साथ बांटने का मौका दे रहा है।


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अरे भई, हंसते-खेलते कब बचपन बीत गया वो तो पता नहीं…पर वो यादें तो आज भी जिन्दा हैं ना!! इसलिए अगर आप भी अपने उन खास लम्हों को फिर से जी उठना चाहते हैं, फिर से एक बार अपनी नादानियों को याद करना चाहते हैं, ईदी कम मिलने पर पापा-मम्मी से झगड़ा, नए कपड़े सिलवाना और राखी के दिन भाई की कंजूसी या उनका प्यार, ये सब आप अपने ब्लॉग के माध्यम से साझा कर सकते हैं, या कहें कि आप अपनी भावनाओं को शब्द दे सकते हैं। आप चाहें तो अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के अनुभव भी साझा कर सकते हैं।



तो फिर देर किस बात की….लिखिए अपना ब्लॉग और साझा कीजिए अपनी यादों को हमारे और मंच पर मौजूद अन्य पाठकों के साथ।

नोट: अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।



धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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