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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस – सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की ललक

Posted On: 4 Mar, 2013 Others में

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समाज के दूसरे और समान रूप से अहम हिस्से ‘नारी’ को भले ही वैधानिक तौर पर पुरुषों की ही तरह सभी अधिकारों से नवाजा गया हो लेकिन बात जब समाज या फिर पारिवारिक क्षेत्र की आती है तो ना जाने क्यों उसे पिछड़ा हुआ और हीन करार दिया जाता है. एक समय था जब सामाजिक तौर पर महिलाएं भी अपने सभी अधिकारों का प्रयोग बिना किसी परेशानी के कर सकती थीं. वह उसी प्रकार के सम्मान की हकदार थीं जितना कोई पुरुष होता है लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे महिलाओं के शोषण की दास्तां को बल मिलने लगा और देखते ही देखते अब हालात इतने ज्यादा खराब हो गए हैं कि आज महिलाएं घर, बाहर अपने, पराये किसी से भी और किसी भी स्थान पर खुद को सुरक्षित नहीं महसूस नहीं कर पा रही हैं. भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर आज महिलाएं बलात्कार, यौन अपराध, घरेलू हिंसा आदि जैसे जघन्य अपराधों से जूझ रही हैं.


संविधान द्वारा तो जरूर उन्हें समान आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक अधिकार प्रदान किए गए हैं लेकिन वह इन अधिकारों का कितना और कैसा प्रयोग कर पाती हैं यह बात तो हम सभी जानते और समझते हैं. महिलाओं के प्रति आदर और सम्मान को बढ़ावा देने और स्वयं उन्हें और समाज दोनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है.


इस दिन का मूलभूत मकसद सामाजिक और आर्थिक स्तर पर महिलाओं की उपलब्धियों को सबके सामने लाना और उन्हें बढ़ावा दिया जाना है. विशेष तौर पर कामकाजी स्त्री के प्रति सामाजिक व्यवहार और नजरिए को बदलने जैसे मुद्दे पर भी यह दिन बेहद अहम है. आज जब महिलाएं घर और बाहर दोनों की ही जिम्मेदारियां बराबर और सफलतापूर्वक निभा रही हैं तो निश्चित तौर पर वह पुरुष से ज्यादा सम्मान की हकदार हैं क्योंकि पुरुष तो घर को आर्थिक सहायता ही प्रदान करता है. लेकिन अगर हम स्त्री को ज्यादा नहीं केवल अपेक्षित सम्मान भी दे दें तो शायद वैयक्तिक तौर पर यह काफी हद तक उनकी धूमिल होती छवि को वापस सजीव कर देगा.


इस माह 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा. इस संदर्भ में आप भारतीय परिवेश में नारियों की स्थिति, उनके अधिकारों, उन पर हो रहे अत्याचार सहित सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपने विचार लिख कर जागरण जंक्शन मंच के अन्य ब्लॉगरों के साथ साझा कर सकते हैं.


आप चाहे तो अपना एक स्वतंत्र ब्लॉग बनाकर भी अपने विचार सार्वजनिक तौर पर प्रेषित कर सकते हैं.


नोट: उपरोक्त मुद्दे पर आप कमेंट या स्वतंत्र ब्लॉग लिखकर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। किंतु इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

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