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यादों के पिटारे से निकालें पहली अप्रैल की दास्तां

Posted On: 28 Mar, 2012 Others में

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JJ Blog

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प्रिय पाठकों,


बस कुछ दिनों में मार्च का महीना भी वर्ष 2012 से अलविदा लेने वाला है। मार्च समाप्त होते ही आपके कैलेंडर में अप्रैल का महीना दस्तक देने लगेगा। भले ही अप्रैल महीना आपके जीवन में कुछ खास अहमियत ना रखता हो लेकिन यह बात भी हम सभी जानते हैं कि पहली अप्रैल, जो अप्रैल फूल्स डे के नाम से जानी जाती है, अन्य दिनों या तारीखों से थोड़ी ज्यादा स्पेशल है क्योंकि इस दिन कोई ना कोई व्यक्ति आपको फूल बनाने के लिए तैयार रहता है। आप चाहे कितने ही सावधान क्यों ना रहें आपका कोई दोस्त या रिश्तेदार आपको अपना अप्रैल फूल बना ही देता है। इस बार भी शायद ऐसा ही हो।


अप्रैल फूल के दिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो हमें गुदगुदाने और हंसने का मौका दे जाती हैं, कुछ ऐसे वाकये होते हैं जो भले ही अतीत के पन्नों में खो गए हैं लेकिन कभी-कभार चेहरे पर एक मुस्कान के रूप में वह हमेशा याद रहते हैं। उन्हें सोच कर आप हंसते हैं और अपने पुराने दिनों को फिर से जी उठते हैं। आप फूल तो बनते हैं, कुछ समय तक दोस्तों से रूठते भी हैं लेकिन उन्हें खुश देखने के लिए आप जल्द ही अपना गुस्सा भूल जाते हैं।


लेकिन यह भी कतई जरूरी नहीं है कि हर मजाक का अंत भी खुशनुमा ही हो, क्योंकि कई बार ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो संबंधों में दरार डालने का काम तो करती ही हैं साथ ही समस्याओं को भी बढ़ा देती हैं। अनजाने में ही सही आपके दोस्त आपके साथ कुछ ऐसे मजाक कर बैठते हैं जो पीड़ा भी पहुंचाते हैं और जिनके परिणाम संजीदा होते हैं। मजाक कब जी का जंजाल बन जाता है कोई समझ नहीं पाता और जब तक बात समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।


अगर आप भी अप्रैल फूल से जुड़ी किसी घटना को अन्य लोगों के साथ शेयर करना चाहते हैं या इस दिन से जुड़े अपने अनुभव दूसरों के साथ बांटना चाहते हैं तो जागरण जंक्शन के माध्यम से आप अपने खट्टे-मीठे, संजीदा और गुदगुदाते पलों को शब्द दे सकते हैं।


आप अपना एक ब्लॉग बनाकर अप्रैल फूल से जुड़ी यादों और अपनी भावनाओं में अन्य पाठकों को भी शामिल कर सकते हैं। आप चाहे तो अपने दोस्तों या फिर परिचितों से जुड़ी घटनाएं भी लिख सकते हैं।


नोट: अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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