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Jolly L.L.B. Film Review: जॉली खोलेगा सबकी पोल

Posted On: 15 Mar, 2013 Others में

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भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी लचर और सुस्त गति. यही वजह है कि आज भारतीय अदालतों में करोड़ो ऐसे केस हैं जिनका निर्णय आना बाकी है. सभी जानते हैं भारतीय न्याय प्रणाली अमीरों के हाथ की कठपुतली है जिसे वे जब चाहे, जैसे चाहे घुमा सकते हैं और बेचारा गरीब इसीलिए कोर्ट कचहरी के धक्के नहीं खा सकता क्योंकि अगर वह कोर्ट जाएगा तो उसकी दिहाड़ी मारी जाएगी. फिर वह अपने बच्चों और परिवार वालों को क्या खिलाएगा. आज प्रदर्शित हुई फिल्म जॉली एल.एल.बी. की कहानी इसी मसले पर केन्द्रित है. हास्य और कटाक्ष के जरिए भारतीय सामाजिक और न्यायिक स्थिति को वर्णित किया गया है.



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बैनर: फॉक्स स्टार स्टूडियोज

निर्देशक: सुभाष कपूर

संगीत: कृष्णा

कलाकार: अरशद वारसी,  अमृता राव,  बोमन ईरानी,  सौरभ शुक्ला

रेटिंग: **


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जॉली एल.एल.बी फिल्म की कहानी

जगदीश त्यागी उर्फ जॉली (अरशद वारसी) एक ऐसा वकील है जो अपनी लाइफ से बोर और निराश हो चुका है. वह चाहता है लोग उसे पहचानें. वह एक पुराने केस को फिर से खुलवाता है जिसमें एक अमीरजादे ने शराब के नशे में फुटपाथ पर सोए हुए लोगों पर गाड़ी चलाकर उन्हें कुचल दिया था. जॉली का सामना बहुचर्चित वकील (बोमन इरानी) से है, जो आज तक कभी कोई केस नहीं हारा. बोमन इरानी यह साबित कर देता है कि वह फुटपाथ पर सोए हुए लोग गाड़ी के नीचे आकर नहीं बल्कि एक ट्रक के नीचे आकर मरे थे. राजपाल का कहना है कि फुटपाथ सोने की जगह नहीं है और अगर कोई सोता है तो उसे अपनी जान का जोखिम तो उठाना ही पड़ेगा. स्टार वकील बनने के लिए जॉली इस केस को खुलवाता है और फिर शुरू होते हैं कहानी के ट्विस्ट एंड टर्न.


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निर्देशन

निर्देशक सुभाष कपूर के निर्देशन के साथ-साथ लेखन भी संभाला है लेकिन दोनों में ही पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं. क्योंकि फिल्म के कुछ दृश्य ऐसे हैं जो पूरी तरह समझ से परे हैं. इतना ही नहीं आप फिल्म का एक सीन देखकर यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि अगला दृश्य क्या होने वाला है. हां, कुछ जगहों पर जरूर हास्य और कटाक्ष के जरिए सामाजिक विषमताओं पर चोट की गई है, जो कुछ हद तक उम्दा कहे जा सकते हैं.


संगीत

फिल्म का संगीत कुछ खास पसंद नहीं किया जा रहा. कुछ गाने तो बेवजह डाले गए हैं जिसकी वजह से फिल्म की लेंथ लंबी हो गई है.


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अभिनय पक्ष

बोमन इरानी और अरशद वारसी दोनों का अभिनय बेहतरीन है. डायलॉग डिलिवरी, चेहरे के हाव-भाव एकदम पर्फेक्ट हैं. अरशद वारसी ने ओवर एक्टिंग ना करके एक रिकॉर्ड कायम किया है. लेकिन अमृता राव को फिल्म में ज्यादा महत्वपूर्ण किरदार नहीं सौंपा गया है.


क्यों देखें: कटाक्ष, व्यंग्य और गंभीर मजाक पसंद हो तो.


क्यों ना देखें: अरशद वारसी और अमृता राव को पर्दे पर ना देखना चाहते हों तो.



बलात्कार के लिए आरोपी दोषी नहीं होता !!!

इज्जत बचानी है तो मर्द के सामने ही मत आओ !!


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