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फिल्म समीक्षा : प्लेयर्स

Posted On: 6 Jan, 2012 Others में

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Action Movie: Players

एक्शन और धूम-धूड़ाके से इस साल हुई बॉक्स-ऑफिस की शुरूआत. साल की पहली रिलीज के रूप में अब्बास-मस्तान ने हिन्दी सिनेमा दर्शकों को दिया है एक्शन से भरपूर “प्लेयर्स” का तोहफा. अब्बास-मस्तान हमेशा से ही एक्शन और थ्रिलर फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है. अब्बास-मस्तान के निर्देशन में बनी प्लेयर्स “द इटालियन जॉब” की रीमेक है. उन्होंने मूल फिल्म की कहानी में भारतीय दर्शकों की रुचि के अनुसार कई प्रसंग जोड़ेहैं.


फिल्म में अभिषेक बच्चन पहली बार पिता बनने के बाद नजर आ रहे हैं. साल की इस पहली फिल्म में उनके साथ बिपाशा बसु और सोनम कपूर हैं.


Playersफिल्म का नाम: प्लेयर्स

कलाकार: अभिषेक बच्चन, नील नितिन मुकेश, बॉबी देओल, बिपाशा बसु और सोनम कपूर.

निर्देशक: अब्बास-मस्तान

संगीत: प्रीतम

रेटिंग: **1/2 (2.5)

फिल्म की कहानी

फिल्म का मुख्य पात्र चार्ली मेस्केरांहस (अभिषेक बच्चन) दिन में चार्टर्ड एकाउंटेंट का काम करता है, लेकिन रात होते ही वह चोर बन जाता है. फिल्म की कहानी चार्ली के ईर्द-गिर्द घूमती है. तेज दिमाग और अचूक प्लान चार्ली के अहम हथियार हैं जिसकी वजह से उसके लिए कोई भी काम नामुमकिन नहीं है.


चार्ली को एक डीवीडी मिलती है जो उसके एक दोस्त ने उसे दी है. इस डीवीडी में रशिया से रोमानिया अरबों रुपये का सोना किस तरह से भेजा जाता है इसकी जानकारी है.


अब चार्ली इस सोने को चुराने का प्लान बनाता है. पर अकेले यह काम करना उसे नामुमकिन लगता है इसलिए वह अपने उस्ताद विक्टर (विनोद खन्ना) जो कि जेल में बंद है, के कहने पर एक टीम बनाता है. टीम में बिलाल बशीर (सिकंदर खेर) विस्फोट विशेषज्ञ है, स्पाइडर (नील नितिन मुकेश) कम्प्यूटर हैकर है, सनी मेहरा (ओमी वैद्य) हर काम में उस्ताद है, रॉनी (बॉबी देओल) को जादूगरी आती है. इस काम में चार्ली अपनी पार्टनर रिया (बिपाशा बसु ) को भी साथ ले लेता है. अपने प्लान के साथ चार्ली रशिया निकल पड़ता है. यहीं उसकी मुलाकात नैना (सोनम कपूर) से होती है जो अपने पिता के कातिल की तलाश में है.

चार्ली अपने प्लान में कामयाब होकर सोना तो चुरा लेता है लेकिन कोई उसके चुराए हुए सोने को ही लेकर उड़ जाता है. यहां फिल्म की कहानी बहुत हद तक आपको “जॉनी गद्दार” की तरह लगेगी.


एक्शन से भरी इस फिल्म का अंत आपको सिनेमाघर जाकर ही देखना होगा.


फिल्म की समीक्षा

अगर आपको दबंग, बॉडीगार्ड, सिंघम जैसी एक्शन पैक्ड फिल्में पसंद आती हैं और आपको फिल्म की कास्टिंग की जगह उसकी कहानी देखना पसंद है तो यह फिल्म आप बिलकुल भी मिस नहीं कर सकते. अब्बास-मस्तान की बॉलिवुड में एक पहचान है कि उनसे बेहतरीन एक्शन-थ्रिलर फिल्में कोई नहीं बना सकता और इस फिल्म को देखकर यह साफ होता है कि ऐसा क्यूं कहा जाता है. फिल्म में गजब के एक्शन सिक्वल और स्टंट्स हैं जिन्हें सिर्फ सिनेमाघरों में देखने में ही मजा आएगा.


अगर आप अभिनय की बात करें तो यही एक चीज है जहां फिल्म कमजोर नजर आती है. अभिषेक बच्चन एक्शन फिल्मों में अधिक शूट नहीं करते. इस फिल्म में भी उन्होंने खुद को किरदार में फिट करने की बहुत कोशिश की है पर कहीं ना कहीं उनकी यह कोशिश बेकार नजर आती है. बिपाशा बसु ने दमदार अभिनय किया है. उन्होंने फिल्म से पहले ही अपने दर्शकों से वादा किया था कि वह एक बेहतरीन अभिनय की गारंटी देती हैं और उन्होंने ऐसा किया भी है. हालांकि सोनम कपूर अपनी सॉफ्ट छवि से बाहर नहीं निकल सकी हैं. उन्हें एक्शन करते हुए देखकर रोमांच कम हंसी ज्यादा आती है. ओमी वैद्य ने थ्री इडियट्स की तरह ही हास्य किरदार को पर्दे पर अच्छी तरह निभाया है. एक बार फिर नील नितेन मुकेश ने साबित किया है कि वह मुख्य किरदार की जगह डार्क किरदार या सह अभिनेता के रोल में पूरी तरह फिट और हिट हैं.


फिल्म का संगीत युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. प्रीतम ने इसमें पूरी मेहनत लगाई है. लेकिन फिल्म में कोई ऐसा मधुर गाना नहीं है जिसकी वजह से संगीत प्रेमियों को थोड़ी निराशा होगी.


अगर इस फिल्म को हिट या फ्लॉप की नजर से देखा जाए तो सोनम कपूर और अभिषेक बच्चन को दर्शक झेल पाते हैं या नहीं यही मुख्य अंतर पैदा करेगा. फिल्म बेहतरीन है पर काश कि अगर इसमें कोई अच्छा चेहरा होता तो बात कुछ और होती.

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