blogid : 1969 postid : 348

आस्था और वास्तु का संयोजन है रणकपुर जैन मंदिर

Posted On: 28 Aug, 2010 Others में

Jagran YatraJagranyatra.com, Jagran Prakashan Ltd की वेबसाइट है. अगर धर्म, संस्कृति, त्यौहार, नई जगहों एवं लोगों के सफ़रनामों के बारे में पढ़ना आपको लुभाता है तो इस चिट्ठे को पढ़ते रहिए.

Yatra

68 Posts

89 Comments

Jagran Yatra Blogsजैन धर्म के प्रसिद्ध मंदिरों की सैर में आज देखिए रणकपुर के जैन मंदिर को. राजस्थान में स्थित रणकपुर जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. यहां के मंदिरों में कला का अनूठा स्वरुप देखने को मिलता है. इन मंदिरों का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था. इन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा. यहां के जैन मंदिर भारतीय स्थादपत्यम कला का अद्भुत नमूना हैं. इस क्षेत्र के साथ-साथ इसके आसपास के स्थानों में भी मंदिर फैले हुए हैं जिससे आपको एक ही जगह बोर होने का अवसर नहीं मिलेगा. जैन धर्म में आस्थाए रखने वालों के साथ-साथ वास्तु शिल्प में दिलचस्पी रखने वालों को भी यह जगह बहुत भाती है.

चारों ओर जंगलों से घिरे इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. मंदिर में प्रवेश के लिए चार कलात्मक प्रवेश द्वार हैं. मंदिर के मुख्य गृह में तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर से बनी चार विशाल मूर्तियां हैं जिसकी ऊचांई 72 मीटर है और इसका मुख चतुर्मुख है. इसी कारण इसे चतुर्मुख मंदिर भी कहा जाता है.

Jagran Yatra Blogsइसके अलावा मंदिर में 76 छोटे गुम्बदनुमा पवित्र स्थान, चार बड़े प्रार्थना कक्ष तथा चार बड़े पूजन स्थल हैं. ये मनुष्य को जीवन-मृत्यु की 84 योनियों से मुक्ति प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं.

मंदिर के निर्माताओं ने जहां कलात्मक दो मंजिला भवन का निर्माण किया है, वहीं भविष्य में किसी संकट का अनुमान लगाते हुए कई तहखाने भी बनाए हैं. इन तहखानों में पवित्र मूर्तियों को सुरक्षित रखा जा सकता है. ये तहखाने मंदिर के निर्माताओं की निर्माण संबंधी दूरदर्शिता का परिचय देते हैं.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग