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( contest ) 1- हिंदी पर गर्व

Posted On: 10 Sep, 2013 Others में

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Jaishree Verma

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विषय – ‘हिन्दी बाजार की भाषा है, गर्व की नहीं’ या ‘हिंदी गरीबों, अनपढ़ों की भाषा बनकर रह गई है’ – क्या कहना है आपका?

हिंदी पर गर्व

हिंदी गर बाजार की भाषा है ,
गरीबों,अनपढ़ों की भाषा है |

कौन सा देश बिना बाजार का ?
कौन सा देश सिर्फ रईसों का ?

छोटे – बड़े मिल सभी आकारों में ,
ढलती सभ्यता सभी विचारों से |

करोड़पति तो मुट्ठी भर होते हैं ,
फिर अंग्रेजी भी कम ही कहते हैं |

देश को मध्यम वर्ग है चलाता ,
हाट – बाजार पर जीवन पलता |

सत्य-हिंदी ने कई आक्षेप सहे हैं ,
फिर भी इसे नहीं डिगा सके हैं |

कई भाषाओं को समेट चलती है ,
स्वच्छंद जीवन संग ये पलती है |

थोड़ी धुंधली शायद ही दिखती है ,
पर कहीं भी उन्नीस नहीं पड़ती है |

भ्रम में डूबे लोगों के लिए निराशा है ,
फिर भी इससे ही हमको आशा है |

यहाँ लेखक,कवि जब तक जिंदा हैं ,
हिंदी पाठक भी लेखनी पर फ़िदा हैं |

कभी भी बाल न बांका इसका होगा ,
भले ही खड़ा हो अंग्रेजी का दरोगा |

आखिर तो सांच को आंच नहीं है ,
कोई इस हिंदी सी सौगात नहीं है |

यह मातृभाषा तो बहुत ही प्यारी है ,
हृदय को छूती यह सबसे न्यारी है |

यह भाषा तो समृद्ध,स्वयं समर्थ है ,
हिन्दुस्तान प्रश्न तो हिंदी अर्थ है |

हम हिन्दुस्तान में पैदा हुए हैं ,यहाँ का हर नागरिक स्वयं पर गर्व करता है ,उसे हिन्दुस्तानी होने पर गर्व है , उसे अपनी जमीन से अपने देश से लगाव है ,और जब हमें अपने भारतीय नागरिक होने पर गर्व है तो अपनी मातृ भाषा हिंदी से कैसे विमुख हो सकते है ? देश हमारा ह्रदय है तो हिंदी हमारी धड़कन | हमारे देश की मुख्य पहचान यहाँ के हाट ,बाजार ,यहाँ की खूबसूरती , यहाँ की सभ्यता और कृषि है | हमारे देश की मिटटी में हिंदी रची बसी है |
हमारे देश की धरती को हम धरती माँ कहते हैं और हिंदी को राष्ट्र भाषा मानती हूँ मैं | हिंदी तो माथे की बिंदी है जो देश के भाल पर शोभित बिंदी के सामान दमकती रहती है , फिर वह समर्थ , असमर्थ , गरीबों की बोली या अनपढ़ों की बोली इस विवाद से बिलकुल परे सर्वश्रेष्ठ है | इस धरती ने हिंदी में लिखने वाले कई लेखकों और कविओं को जन्म दिया है और पाठकों ने भी खुले दिल से हिंदी को पूर्ण सम्मान के साथ अपनाया है |
आज तक हिंदी कवि , लेखक अपना लोहा मनवाते रहे हैं और आने वाले समय में भी समृद्ध हिंदी भाषा के , हिंदी से समृद्ध लेखक आते ही रहेंगे और हिंदी तथा अपनी पहचान बनाते ही रहेंगे |हमें गर्व है अपने देश पर , अपनी धरती माँ पर और अपनी भाषा हिंदी पर |
जब तक हिन्दुस्तान है , हिन्दुस्तानी हैं तब तक हिंदी अजर अमर है ,यह कोई ऐसी भाषा नहीं है कि सभ्यताएं आईं और चली गईं साथ में भाषा भी मिट गई | हमारा देश और इसकी भाषा हमारी हिंदी स्वयं समृद्ध और अमर है —

यह भाषा तो समृद्ध,स्वयं समर्थ है ,
हिन्दुस्तान प्रश्न तो हिंदी अर्थ है ।

(जयश्री वर्मा )

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