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बालिका जो वधु नहीं बन सकी

Posted On: 3 Apr, 2016 Others में

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jlsingh

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बालिका वधु उर्फ़ आनंदी उर्फ़ प्रत्युषा

रामायण, महाभारत के बाद ‘कहानी घर घर की’, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, और उसके बाद कोई धारावाहिक अगर बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुआ था, तो वह थी ‘बालिका वधु । बालिका वधु की आनंदी पहले अम्बिका गौर बनी थी। उसके बड़ी होने के बाद बड़ी आनंदी का रोल काफी दिनों तक जमशेदपुर की प्रत्युषा बनर्जी ने निभाया था। मूल रूप से बंगाली परिवार में जन्मी,पली-बढ़ी प्रत्युषा एक मध्यम परिवार की लड़की थी और छोटे शहर जमशेदपुर में पली बढ़ी थी । एक बंगाली परिवार की लड़की का राजस्थानी परिवेश की बहू का रोल निभाना काफी कठिन था, पर उसने उस पात्र को बखूबी जिया था। अम्बिका और प्रत्युषा अपने नाम से ज्यादा आनंदी या बालिका वधु नाम से ही लोकप्रिय थी। मुंबई के चकाचौंध ने इस बालिका को वधू होने का मौका ही नहीं दिया. वधू बनने के सपने बुनती प्रत्युषा आखिर रियल लाइफ में वधू तो नहीं बन सकी, पर अंतिम समय में उसकी मांग में सिन्दूर था, ऐसा प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है। इस आकस्मिक मौत या कथित आत्महत्या की खबर से मुबई के साथ-साथ जमशेदपुर भी सदमे में है।
बालिका वधु से मशहूर हुई छोटे परदे की जानी-मानी अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी ने मुम्बई में एक अप्रैल को दोपहर में आत्महत्या कर ली है। प्रत्युषा ने अपने घर के पंखे से लटककर जान दे दी। बाद में उन्हें कोकिलाबेन हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार 24 वर्षीय अभिनेत्री को कांदीवली उपनगर के बांगुर नगर में उनके आवास में छत से लटकते पाया गया। उन्होंने बताया कि हालांकि, उनके घर से किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला है और दोपहर के आसपास हुई इस मौत के कारण दम घुटना बताया गया है। प्रत्युषा का बॉय फ्रेंड राहुल से लगातार पूछ-ताछ जारी है।
प्रत्युषा की आत्महत्या का कारण मानसिक तनाव और ब्वाय फ्रेंड से अनबन बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रत्युषा की मां ने कहा है कि प्रत्युषा का उनके ब्वाय फ्रेंड राहुल राज सिंह से अनबन चल रही थी, जो कि टीवी धारावाहिक निर्माता हैं। व्हाट्स ऐप पर अभिनेत्री के आखिरी संदेश में लिखा हुआ है, ‘मरके भी मुंह ना तुझसे मोड़ना।’ ‘बालिका वधु’ धारावाहिक में प्रत्युषा के साथ काम कर चुके सिद्धार्थ शुक्ला ने कहा, ‘वह हमारे बीच नही रहीं, यह हतप्रभ करने वाला है। मैंने दो-तीन महीने पहले उनसे बात की थी और उस समय वह अच्छी थीं।
वहीं मशहूर निर्देशक करण जौहर ने ट्वीट कर कहा है कि ‘ये बहुत दुखद है…और ये उन परिवारों और दोस्तों के लिए संकेत है जो डिप्रेशन को बीमारी नहीं समझते.. प्रत्युषा ने ‘बालिका वधु’ में आनंदी की भूमिका निभाई थी जिससे उन्हें अच्छी पहचान मिली। उसके बाद प्रत्युषा बिग बॉस के 7वें सीजन में गईं। प्रत्युषा का आखिरी सीरियल ‘ससुराल सिमर’ का है।
प्रत्युषा के एक और रियल शो के निर्माता विकास गुप्ता और दोस्त काम्या पंजाबी ने रहस्योद्घाटन करनेवाला बयान दिया कि प्रत्युषा की नाक और गाल पर चोट के निशान थे. छोटे पर्दे की बड़ी अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी की खुदकुशी पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि ये हत्या है या आत्महत्या। प्रत्युषा के परिजनों ने मामले में जांच की मांग की है, वहीं प्रत्युषा के साथी राहुल से दो दफे पूछताछ के बाद भी पुलिस को कुछ ठोस हासिल नहीं हुआ है। पोर्स्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्युषा की मौत दम घुटने की वजह से हुई। बालिका वधू सीरियल से प्रत्युषा को घर-घर में पहचान मिली, झलक और बिग बॉस जैसे शोज में उनकी झलक दिखी। लेकिन करीबी कहते हैं, इन दिनों काम और आर्थिक बदहाली से वो परेशान थीं। फिर भी इतनी कमज़ोर नहीं थीं कि ख़ुदकुशी कर लें।
झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली प्रत्युषा ने कम उम्र में अपने लिए बड़ा मुकाम बना लिया था। एक साथी भी चुना था, पेशे से एक्टर प्रोड्यूसर राहुल राज सिंह। राहुल-प्रत्युषा साथ ही रहते थे, उसने ही गोरेगांव के अपार्टमेंट से प्रत्युषा को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस राहुल का बयान दर्ज कर चुकी है। कुछ लोगों का कहना है कि राहुल से प्रत्युषा के रिश्ते इन दिनों तल्ख थे, प्रत्युषा के परिजनों ने खुदकुशी की जांच की मांग की है। लेकिन राहुल के माता-पिता का कहना है दोनों इस रिश्ते में खुश थे।प्रत्युषा के घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, पुलिस फिलहाल प्रत्युषा और राहुल के फोन रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
प्रत्युषा ने अपने घर के पंखे से कथित तौर पर लटककर जान दे दी। बाद में उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। एक प्रोडक्शन हाउस के मालिक राहुल राज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। हालांकि राहुल ने शुक्रवार रात ही अपना बयान दर्ज करवा दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘दोपहर को थोड़ी अनबन हुई थी जिसके बाद वह घर से चले गए। शाम जब आए तब घर में प्रत्युषा को पंखे में लटका हुआ पाया।’
‘वह संवेदनशील थी…’
शुक्रवार को मुंबई पुलिस के प्रवक्ता धनंजय कुलकर्णी ने बताया था कि उन्हें प्रत्युषा की मौत की रिपोर्ट कोकीलाबेन अंबानी अस्पताल से मिली थी और अब इस मामले की जांच हो रही है। इस खबर की जानकारी मिलने के बाद ‘बालिका वधु’ में प्रत्युषा की ‘दादीसा’ का रोल निभाने वाली अभिनेत्री सुरेखा सीकरी ने कहा ‘मैं चकित हूं। मैं उसे जानती थी, वह बहुत प्यारी थी। वह काफी संवेदनशील इंसान थी, उसने जरूर कोई बात दिल पर लगा ली होगी और ज्यादा इमोशनल हो गई होगी।’ प्रत्युषा की मौत की वजह उनकी निजी जिंदगी में चल रही परेशानियों को बताया जा रहा है। बालाजी मोशन पिक्चर्स के पूर्व सीईओ तनुज गर्ग ने ट्विटर पर प्रत्युषा और राहुल राज की शादी के इरादे के बारे में जानकारी दी है। वह शादी के लिए लहंगे बनाने का भी आर्डर दे चुकी थी। उसका अंतिम संस्कार उसी लहंगे को पहना कर, कर दिया गया। बेचारी बिना वधु बने ही इस दुनियां को अलविदा कह गयी….
यह जीवन क्षणभंगुर है! कितने लोग समझ पाते हैं? कोलकाता के फ्लाईओवर गिरने से लगभग २५ लोगों की मौत हुई है, उनमे वैसे लोग भी थे, जो शादी का कार्ड बांटने जा रहे थे। अधिकांश लोग ऐसे थे जो रोजी रोटी के लिए जी तोड़ परिश्रम करते हुए ही दिन गुजार देते हैं। ममता बनर्जी के बंगाल में चुनाव होना है ऐसे में कोलकता के बड़ा बाजार में भयंकर हादसा उनके चुनाव में मुद्दा भी बन सकता है। सड़क पुल बनाने में कितना गोलमाल होता है कितनी धांधली होती है, यह बात किसी से छुपी नहीं है, पर हादसे में हमेशा आम आदमी ही मारा जाता है और पुल बनानेवाली कंपनी इसे भगवान की मर्जी बताकर किनारा कर लेती है। इसमें भी कुछ गिरफ्तारियां हुई है, जांच होंगे। जांच चलती रहेगी। कुछ लोगों को मुआवजा भी मिला जाएगा, पर इन हादसों को कैसे रोका जाय, इस पर कोई सामूहिक कार्रवाई नहीं होगी।
चुनाव का समय है, इसलिए इसपर राजनीति भी होगी और आरोप-प्रत्यारोप होते रहेंगे। प्रश्न ज्यों का त्यों बना रहेगा. कुछ इंजीनियर और अधिकारियों पर गाज गिरेगी पुल बननेवाली कंपनी ब्लैक लिस्टेड भी हो जाएगी तो क्या होगा, नए नाम से फिर कोई कंपनी खोल लेगी। हमारा सिस्टम इतना करप्ट हो चूका है, बिना मुट्ठी गरम किये कुछ काम ही नहीं होता और गर्म मुट्ठी मजबूत कैसे हो सकती है? भगवान की मर्जी तो है ही, वही भगवान् या प्रकृति जब अपना हिसाब चुकता करने लगती है तो हम सभी त्राहि त्राहि कर उठते हैं. हम सभी एक सीमा यानी दायरे से बंधे हैं, हमें अपनी सीमा में ही रहना चाहिए। सीमा का अतिक्रमण ज्यादातर नुकसानदायी होता है। यह बात हम सबको गाँठ में बाद लेनी चाहिए। बोलना या अभिव्यक्ति की आजादी भी एक सीमा में ही होनी चाहिए. आज अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी बोला जा रहा है, लिखा जा रहा है।उसका परिणाम भी हम सब देख ही रहे हैं। हमारा देश और पूरा विश्व दावानल की भाँति अंदर ही अंदर सुलग रहा है। ज्यादातर लोग उसमे ईंधन डालने का ही काम कर रहे हैं। बहुत कम लोग इसे शांत करने या बुझाने का काम कर रहे हैं, नहीं? जय श्री राम!

– जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर. ०३.०४.२०१६

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