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२०१४ का भारत!

Posted On: 21 Apr, 2012 Others में

jlsजो देखता हूँ, वही लिखता हूँ

jlsingh

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टी वी पर बाबा राम देव और अन्ना हजारे साथ साथ प्रेस को सम्बोधित कर रहे थे.- “हमारे पास मुश्किल से डेढ़ साल बचे हैं. हम नहीं चाहते की कोई चलती हुई सरकार गिर जाय. हम इन्हें २०१४ तक का समय देते हैं. लोकपाल बिल लाओ, भ्रष्टाचार हटाओ और विदेशों में रखे काले धन को वापस लाओ, नहीं तो घर जाओ!” मंच पर दो ही लोग बैठे थे तीसरा कोई नहीं था. मीडिया वाले ने सवाल पूछा – “केवल आप दोनों दिख रहे हैं’ आप दोनों की टीम कहा है. न तो अरविन्द केजरीवाल दिख रहे हैं न ही बाल कृष्ण?” अन्ना जी अभी कुछ कहते, तबतक बाबा रामदेव बोल उठे – “बालकृष्ण तो अपनी बागवानी से कुछ नई जडी बूटी के बारे में अनुसन्धान करने गए हैं, जिसे विदेशों में बिक्री कर डॉलर अपने देश के लिए लाया जाय और अरविन्द जी किसी मंत्री के यहाँ गए हैं अपना हिशाब चुकता करने और उसका स्टिंग ऑपरेशन करने! वैसे आप सबलोग तो हमारे साथ हो ही और आपके साथ इस देश के लाखों करोड़ों लोग. हमारा अभियान दो दिशाओं में चलेगा. महाराष्ट्र में अन्ना जी मोर्चा सम्हालेंगे और मैं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश.”

प्रेस कांफ्रेंस अभी चल ही रहा था की कब मुझे नींद आ गयी पता ही न चला! और आजकल मुझे अजीब अजीब सपने आने लगे हैं. जबकि मेरे वरिष्ठ लोगों ने मना किया था की दिन में सपने मत देखा करो. पर जब दिन में नींद आ जाय और नींद में सपने तो मैं क्या करूँ.

सपने में ही मुझे सन २०१४ का नजारा दिखने लगा. भारत स्वाभिमान पार्टी (बी एस पी) बहुत ही भारी बहुमत से जीती है. इन्हें दो तिहाई बहुमत मिल गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों की जमानत जब्त हो गयी है. कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कुछ पत्रकार और साहित्यकार भी चुनाव जीत गए हैं.

बाबा रामदेव को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री बना दिया गया है और अन्ना हजारे राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रहे हैं. अन्ना जी अभी प्रधान मंत्री और उनके सदस्यों को शपथ दिलवाने की तैयारी कर रहे थे तभी उनके कक्ष में अरविन्द केजरीवाल का आगमन होता है.- “अन्ना, प्लीज बाबा से बात करो न! मुझे उप प्रधान मंत्री बना दें, नहीं तो उनको अकेले पीएमओ परेशान कर देगा. मैं उनके साथ साए की तरह रहूँगा. तो उनको कोई परेशानी न होने दूंगा”. अन्ना ने मोबाइल पर बाबा रामदेव से बात की और थोड़ी न नुकुर के बाद वे मान गए! अब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ प्रधान मंत्री के साथ उनके २० सदस्यीय मंत्री परिषद् ने शपथ ली.

शपथ ग्रहण के बाद मंत्री परिषद् के विभागों का बटवारा कुछ इस तरह से हुआ.

१. स्वामी राम देव. – प्रधान मंत्री, विदेश मंत्रालय, रक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी के अलावा वे सभी विभाग जो अन्य किसी मंत्री के पास न हो.

२. अरविन्द केजरीवाल – उप प्रधान मंत्री, वित्त विभाग.

३. मनीष सिसोदिया – संसदीय कार्य मंत्री.

४. प्रशांत भूषण – कानून.

५. किरण बेदी- आन्तरिक मामले.

६. कुमार बिस्वास – कला संस्कृति, और युवा मामले.

७. बालकृष्ण – स्वास्थ्य.और परिवार कल्याण

८. मुनीश गुप्ता – अदालती मामले.तथा पुरातत्व विभाग.

९. वासुदेव त्रिपाठी- प्राचीन इतिहास और पुराण

१०. निशा मित्तल – नारी कल्याण

११. सरिता सिन्हा – जल संसाधन

१२. मीनू झा – गृह सज्जा और दाम्पत्य विभाग.

१३. अलका गुप्ता – परिवार सामंजस्य

१४. राजकमल – जनसँख्या नियंत्रण और अंतर्जाल लेखन

१५ प्रदीप कुशवाहा – वरिष्ठ जन कल्याण.

१६.शशिभूषण – साहित्य और कविता

१७. डॉ. बाली- उर्दू शिक्षा और गजल लेखन

१८.संतोष कुमार – सरकारी प्रवक्ता और सूचना विभाग.

१९.दिनेश आस्तिक – अंधविश्वास निर्मूलन

२०. अनिल कुमार – सामजिक कुरीति निर्मूलन

मंत्री मंडल का विस्तार

सुरेन्द्र भ्रमर- अंतर्जाल अपराध नियंत्रण

राजीव झा- बाल कल्याण

यमुना पाठक – उच्च शिक्षा

अशोक रक्ताले – भ्रूण परीक्षण नियंत्रण.

कृष्ण श्री – दिल और संवेदना

अब्दुल रशीद – सीमा सौहार्द्र

अश्विनी कुमार – वन एवं पर्यावरण.

इसके अलावा और भी मंत्री बनाने योग्य उम्मीदवार जो प्रतीक्षा सूची में है उन्हें अगले विस्तार में जगह दी जायेगी.

बाबा रामदेव अपने प्रधान मंत्री कार्यालय जाने के साथ ही अवकाश प्राप्त जनरल वी के सिंह को अपना रक्षा सलाहकार नियुक्त करते हैं और DRDO के डिरेक्टर को तलब करते हैं. अब हमे अग्नि- ६ का निर्माण करना है जिसकी मारक क्षमता १०,००० KM तक हो और उसकी परिधि में जो भी आए उसे अपने अधीन कर लेना है ताकि भारत एक वृहत राष्ट्र का दर्जा प्राप्त कर सके.

– इसके अलावा कुछ और भी परिवर्तन करने की योजना है. सभी मंत्री परिषद् के सदस्यों के साथ मीटिंग कर जो निर्णय लिया गया वे इस प्रकार हैं.

अब गाँव शहर की तरफ नहीं आयेगा, बल्कि शहर गाँव की तरफ जायेगा. मसलन, आपको गाँव के उत्पाद लेने के लिए आपको खुद गाँव चलकर जाना होगा और किसानों को उसको उचित मूल्य देकर खरीदना होगा. दूध लेने भी आपको गाँव जाना होगा. इससे दो फायदे होगे. आपको शुद्ध दूध तो मिलेगा ही शुबह की शुद्ध और ताजी हवा भी मिलेगी. सब्जियां ताजी और उचित मूल्य पर मिलेगी.

सभी विद्यालयों में योगाभ्यास आवश्यक होंगे. यहाँ तक की वयस्क शिक्षा में भी पहले योग का क्लास होगा.

महर्षि बालकृष्ण के आश्रम में नित्य नयी जडी बूटी पर शोध किये जायेंगे और अब आयुर्वेदिक दवाएं निर्यात भी की जायेंगी.

हर घर के सामने पीपल का पेड़, अशोक का पेड़, आम का पेड़, बेल का पेड़ आदि अवश्य लगाये जायेंगे और हर घर में तुलसी का पौधा भी अनिवार्य किया जायेगा.

साधुसंतों के लिए अरण्य में ही पर्णकुटी की ब्यवस्था की जायेगी . नगर में प्रवेश, सिर्फ पर्व त्यौहार में ही कर पाएंगे. या कभी आवश्यक अनुष्ठान की अगर आवश्यकता हो तो उन्हें निमंत्रण और वाहन भेजकर बुलाया जायेगा.

मांस और मदिरा पूर्ण रूपेण वर्जित होगा, फलों या सब्जी के जूस ही पेय पदार्थ होंगे. तम्बाकू की पैदावार बंद. केवल पान का सेवन कर सकते हैं.

चोकोलेट, पिज्जा, बर्गर निषिद्ध होगा. हरी सब्जी और फलों से बने सुपाच्य भोजन ही सभी करेंगे.

अपने घर की सफाई अपने आप करनी होगी और बाहर ही सफाई नगरपालिका या पंचायत के कर्मचारी करेंगे.

महिलाएं पूरे कपड़े में घर से बाहर निकलेंगी और पुरुष अपनी आँखों पर चश्मा लगाकर चलेंगे.

किसानो का भी यूनियन होगा और कोई बिचौलिया नाजायज फायदा नहीं उठाएगा.

आहार ब्यवहार नियमित रखने से बीमारियाँ वैसे ही कम होंगी इसलिए अधिंकाश अस्पताल बंद कर योग केंद्र बनाये जायेंगे.

सब कुछ सब जगह उपलब्ध होगा इसलिए आपको ज्यादा दूर सफ़र नहीं करना होगा. इस तरह पेट्रोलियम पदार्थों की खपत कम होगी. पेट्रोल के दाम अपने आप गिर जायेंगे.

सभी अपना टैक्स इमानदारी से अदा करेंगे इसलिए हर साल नए नए टैक्स लगाने की आवश्यकता ही न पड़ेगी.

भारत इतना समृद्ध राष्ट्र होगा की अमेरिका भी भारत से दोस्ती बनाये रखने में गर्व महसूस करेगा और ओबामा आदि यहाँ आकर योग की शिक्षा लेंगे. संसद में राष्ट्रिय अवकाश के दिन छोड़कर सब दिन काम होगा.

सरकारी कर्मचारी को अपना काम पूरा कर ही घर जाना होगा. घर के या परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी सरकार लेगी.

बच्ची पैदा करने और पालन करने के लिए उपयुक्त सुविधा दी जायेगी. अगर संभव हुआ तो बच्चियों और असके माता पिता के लिए आरक्षण की सुविधा भी दी जायेगी.

सभी ब्लॉग लिखने वाले को उनके ब्लॉग की गुणवत्ता के आधार पर उचित पारिश्रमिक दिया जायेगा या मासिक अनुदान की घोषणा की जायेगी. कविता लिखने वाले को ज्यादा पारिश्रमिक होगा वह भी अगर छंद बद्ध हो तो उसे लाभांश भी मिलेगा.

प्राचीन संस्कृति की रक्षा के लिए अलग से विभाग बनेंगे और उसपर कार्य करने वाले या शोध करने वाले को डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा जायेगा.

योजनायें अब एकवर्षीय होंगी और हर साल उनमे सुधार किये जायेंगे.

विदेशों में जमा काला धन वापस अगर आ गया तो पञ्च साल तक टैक्स छूट!

गैरपारम्परिक उर्जा स्रोत की खोज की जायेगी और तदनुसार विकास किये जायेंगे.

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हर हाल में की जायेगी.

सभी नदियों को आपस में जोड़ दिए जायेंगे और तटबंध ऊंचे कर दिए जायेंगे ताकि कभी भे अतिवृष्टि या अल्पवृष्टि का फलाफल से बच सकें.

जंगल काटने के बजाए संतों को आवंटन कर दिया जायेगा और उनके रक्षा की जिम्मेवारी भी उन्ही पर सौंप दी जायेगी.

बहुमंजिली ईमारत बनाने वालों को ज्यादा ‘कर’ देना होगा ताकि इसे हतोत्साहित किया जा सके. हर ईमारत को ऐसा बनाया जायेगा ताकि उसमे धूप, हवा आदि की पूर्ण उपलब्धता रहे, जिससे बिजली का भी बचत हो और हम ज्यादा से ज्यादा प्रकृति के करीब रहें.

बच्चे दो ही अच्छे पर अगर ‘एक’ हैं तो उन्हें विशेष सुविधा दी जायेगी, जिससे जनसँख्या नियंत्रित रहे.

कोई बच्चा या बुजुर्ग किसी पर बोझ न हो उसकी पर्याप्त देख भाल की जाने की ब्यवस्था हो.

इतने सारे कार्यक्रम की योजना बना ली गयी है और इसे हर साल पुनरीक्षित किया जायेगा.

इसके अलावा कोई भी सुधार के परामर्श का हमेशा स्वागत होगा. अत: सुझाव अवश्य दें!

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