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बीता वसंत मधुर ?

Posted On: 3 Feb, 2018 Others में

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kamleshmaurya

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बीता वसंत मधुर ,
हुआ न मिलान गीत यहां.
बीता प्रेम दिन कठिन,
युया न प्रेम राग यहां,
सूखी हुयी है ज़िन्दगी,
सूखी हैं पेड़ पत्तियां.
चाहत की न मिली पंखुड़ी,
हो राग गीत कैसे यहां.
गम डूबी हुयी है जिंदगी,
गम के सितमगर हैं यहां.
जो सजा है दिल के आशियाने में,
वही राग कत्लकार यहां.
जिसको बड़ी सिद्दत से चुना,
वही सबसे ख़राब यार यहां.
खुदा तू ही बतलाये मुझे,
जिंदगी कैसे हो पर यहां??

कमलेश मौर्य
सोनभद्र
वियोग श्रृंगार की कविता का एक पक्ष है. संयोग का फिर प्रस्तुर करूंगा.

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