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सुर्ख गुलाब की नाज़ुक पंखुरियां - कांटेस्ट (यादों के लम्हों से प्रेमाभिव्यक्ति)

Posted On: 5 Feb, 2014 Others में

जिन्दगीमेरी अभिव्यक्ति

kantagogia

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आज सवेरे जब किताब खोली
तुम्हारे दिल पसंद गीत वाले पाने पर
पड़ी हुई थी
सुर्ख गुलाब की नाज़ुक पंखुरियां |
वे सूख गयी थी,
फिर भी हसीं थी, मासूम थी,
बिलकुल तुम्हारी तरह
ऐसे मुस्करा रही थी जैसे फुलझरियां |
उस दर्द भरे गीत के दामन पर
वे बिखेर रही थी एक खुश्बू उदास सी
उन की उदासी भी थी इतनी खूबसूरत
कि याद आई मुझे-
तुम्हारे साथ गुज़ारी वह आंसू भरी घड़ियाँ
टूटती-बिखरती यादों को
जोड़ती ये अनमोल कड़ियाँ
सुर्ख गुलाब की नाज़ुक पंखुरियां |

– कान्ता गोगिया

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