blogid : 12407 postid : 1106997

ओ, दसरथ माँझी !

Posted On: 11 Oct, 2015 Others में

अंतर्नादमैंने स्वयं रचा, तुम्हारा अनुभूत सत्य, तुम्हारे लिए ...

Santlal Karun

63 Posts

1122 Comments

ओ, दसरथ माँझी !


ओ ! दसरथ माँझी, ओ ! दसरथ माँझी

जियरा तू पोढ़ कइलो दसरथ माँझी |


जाना उस पार बीचे बाटै पहाड़

काटौ पाथर-गरब अपार

हाथ-गोड़ लोह कइलो दसरथ माँझी |


सोनवा कै गाछ जग जतन के हाथ

छिनी-हथौड़, संकलपहि साथ

तुहुँ रहिया सोझ कइलो दसरथ माँझी |


जिनगी मोहताज घर मौनी-अनाज

सबसे बड़-खर पेट कै आग

मेहनत कोख कइलो दसरथ माँझी |


जनम रेहार करम कैसे न लिलार

करमहि बदलत जग-संसार

धुन आपन जोत कइलो दसरथ माँझी |


देसवा महान भारू तबहूँ परान

परबत-पौरुष मिले न दाम

कूवत से भोर कइलो दसरथ माँझी |


— संतलाल करुण

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग