blogid : 12407 postid : 835791

दिल या ख़ुदा मिलता नहीं

Posted On: 14 Jan, 2015 Others में

अंतर्नादमैंने स्वयं रचा, तुम्हारा अनुभूत सत्य, तुम्हारे लिए ...

Santlal Karun

63 Posts

1122 Comments

दिल या ख़ुदा मिलता नहीं


दिल के मकाँ में यार कोई दिलकुशा मिलता नहीं

भीगा पड़ा है आशियाँ अब दिलशुदा मिलता नहीं |


हमने वफ़ा में बाअदब जानो-ज़िगर सब दे दिया

उनकी वफ़ा, चश्मो-अदा, दिल गुमशुदा मिलता नहीं |


उम्मीद हमने छोड़ दी उनकी इनायत पे बसर

ये ज़िन्दगी रहमत-गुज़र दिल या ख़ुदा मिलता नहीं |


उनकी वफ़ा के माजरे, बेबस्तगी पे क्या कहें

उन पे फ़ना दिल रोज़ होता दिल जुदा मिलता नहीं |


यों दिलज़दा मेरा फ़साना, दिल लगाना बेक़दर

जो लापता ढूढें कहाँ दिल गुम हुआ मिलता नहीं |


— संतलाल करुण

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग