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माँ से अभिलाषा - वसंत पंचमी पर विशेष

Posted On: 7 Feb, 2011 Others में

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वाहिद काशीवासी

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माँ सरस्वती

मन चंचल सब साध विफल हैं, अति विकट कठिनाई,
इस अरण्य में तमस-व्याघ्र से है, करनी ये लड़ाई;


हैं विचार अवगुंठित मन में संशय किस पथ जाऊं,
आलोकित हो दिव्य-प्रकाश से, स्नेह तेरा मैं पाऊँ;


‘हंसवाहिनी”वीणावादिनी’ पूर्ण करो अभिलाषा,
दग्ध हृदयों में अंकित कर दो ‘ज्ञान-प्रेम’ परिभाषा|

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