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"बड़ी तवील सी है ज़िंदगी"

Posted On: 29 Oct, 2011 Others में

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वाहिद काशीवासी

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न हो सका ख़ुशी में शामिल तो मलाल नहीं

शुक्र है ग़म तो किसी का मैं यहाँ बाँट सका;


बड़ी तवील सी है ज़िंदगी जो ख़त्म ना हो

तन्हाईयों का ये वक़्त न मैं काट सका;


सारे दुःख-रंज मुझे छोड़कर चल दिए रस्ते

सारी दुश्वारियों को जी भर के आज डाँट सका;


खड़े ज़िंदगी के चौक पर सोचा तो पाया उम्र  से इस

हूँ ख़ुशनसीब जो कुछ अनमोल लम्हे छांट सका;


वो मेरा दोस्त था क़रीब फिर भी दूर बहुत

जो फ़ासिले थे दरमियाँ न उन्हें पाट सका;


आज हूँ तंगहाल-तंगदस्त क्यूँ,  जानते हो?

मेरा ख़ुद्दार ज़मीर तलवे कभी न चाट सका;

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तवील=लंबी; तंगदस्त=हाथ तंग होना/रुपये-पैसे न होना;

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