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पाक अब माफ करने के काबिल नहीं ....

Posted On: 8 Aug, 2013 Others में

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सत्येन्द्र कात्यायन

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पाक के नापाक इरादे और भी मजबूत होते जा रहे है और इसकी वजह है भारत उसे अब तक कडा जवाब देने में असफल रहा है । ईंट का जवाब पत्थर से की जगह भारत बार बार अदने से पाकिस्तान से मात खा रहा है । पांच भारतीय जवानों को गश्त करते वक्त मौत के घाट उतार देना बडा दुर्भाग्यपूर्ण और दुःखद है – यह सम्पूर्ण भारत के लिए दुःख का विषय है परंतु अब मात्र दुःख व्यक्त करने से कोई काम नहीं चलने वाला है । इस वक्त जरुरत है तो पाकिस्तान को एक कडे जवाब देने की -वो भी उसी की भाषा में। हत्या की है तो इसका इंतकाम भी पाकिस्तान के आंतकी सिपाहियों को ढेर करके ही लिया जा सकता है। भारत के नपुंसक शासक कुछ नहीं कर पाते। पाक बार बार हमारी सीमाओं पर आक्रमण करता है। कभी हमारे सिपाहीं के शीश काट ले जाता है – हम सहते है पूरे गर्व से सहते हैै और सैनिकों की शहादत को जाया जाने देते है- यदि इसे सहनशीलता कहा जाता है तो धिक्कार है ऐसी सहन शक्ति पर जो नपुंसकों को भी लज्जित कर दें। जब रणबांकुरे देश के लिए मर-मिटने को तैयार है , सर्वस्व समर्पित करने को तैयार है तो तो फिर रण का बिगुल अब तक क्यों नहीं बजाया गया । क्यूं बार बार इसकी कीमत हमारे जांबाज सैनिकों को चुकानी पडी। इन हमलों से साफ जाहिर है कि पाक कभी शांति चाहता ही नहीं था और न ही अब वो शांति प्रंक्रिया को बनाये रखना चाह रहा है और ये भी साफ है कि पाकिस्तान के सैनिक अभियानों में आंतकवादियों को पूर्ण सहयोंग रहता है। बल्कि यदि कहें कि पाकिस्तानी सेना भी आंतकवादियो ंसे कमतर नहीं है तो अतिशयोंक्ति न होगी। पाक नापाक है । वो जब से विलग हुआ है तब से भारत के खिलाफ उसके अभियान जारी रहे है और हम एकतरफा की शांति बहाली की कोशिशें बराबर करते रहें । नतीजा सामने है। वो तो छापामार युद्ध कर रहा है और हम उस पर रहम करते जा रहे है। रहम भी उस पर जो बार बार हमारी गर्दन पर छुरा चला रहा हो। पाक हमेशा से आतंकियो ंका गढ रहा हैं । जेहाद के नाम पर चल रहे आतंकी अभियान मानवता पर कहर बरपा रहे है और मानवीयता को तार तार कियें। ये कैसी लडाई लड रहें है ये बुजदिल लोग जो छिपकर वार करना जानते है, जो पीठ में खंजर घोंपने के आदि हो चुकें हैं। पाक के नापाक चेहरे की तस्वीर बार बार उभर कर आती है और हम उसे फिर भी दुलारते रहे, पुचकारते रहें उसके साथ प्रेम की भाषा बोलते रहें और वो उदण्डता करता जा रहा है । इसे भारत का बडप्पन नहीं कहा जा सकता , ये मेरे मुल्क के प्रशासकों, शासकों की सबसे बडी बेवकूफी है। अब हमें इस तरह चुप होकर नहीं बैठना चाहिए। भारत के पावन सिंहासन को कलंकित करती ये सरकार देश को लज्जित करने में अपना जितना हो सका योगदान दे रही है।  ये बेहद दुर्भाग्य पूर्ण ही नहीं आत्मा को कचोटने वाला है कि हम पाकिस्तान के हाथों,…. एक अदने से मुल्क के हाथों शिकस्त खाते रहे है और वो हम पर हावी होता जा रहा है । तो क्या समझा जाऐ भारत अपनी प्राचीन परम्परा का निर्वाह नहीं कर पा रहा है! हमारी तोपो को बारुद खत्म है या बंदूकों में जंग लगा है। हम क्यों इतने भीरु हुए जा रहें है कि कोई हमारे गालों पर तमाचे लगाये जा रहा है और हम बिना रोये बिना चिल्लाये बिना उसका प्रतिकार किये सह रहें है। हम इस तरह खुद को महात्मा बना रहें हैं! महात्मा!! ……यदि आज विवेकानंद होते , भगत होते, सरदार पटेल होते, चंद्रशेखर होते तो भारत की इस दशा पर रो पडते ……फफक पडते ……….हमे गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले ंदेश के असंख्य कर्णधार इस परिस्थिति में क्या चुप रहते ? मौन साधते? या फिर क्रांति का बिगुल बजता। क्रांति आज जरुरी है । देश के रक्षा मंत्री ही पाकिस्तान की इस करतूत पर आहत तो क्या होते वरन उसे क्लीनचिट दे देते है – ये दुर्भाग्य है वतन का कि जो इसकी आबरु को तार तार किये जा रहे है उन्हें पर हम रहमत बरसा रहे हैं।
देश की आंतरिक हालत बेहद नाजुक है। ये आंतरिक बहस का वक्त नहंी है ये है इस सम्पूर्ण मामलें को , पूरे प्रकरण को देश भावना से जोडना चाहिए न कि एक दूसरे को नीचा दिखाने में वक्त जाया करना चाहिए। फब्तियां कसना सीखना हो तो राजनीतिक गलियारों में होने वालो कार्यक्रमों में शिरकत करके आसानी से सीखी जा सकती है। देश को आंतरिक रुप से बंाटने की साजिश हो रही है। राज्यों का बंटवारा …..लोगो का बंटवारा ………आत्मा का बंटवारा ……..बंटवारें की राजनीति, देश को भुला रहीं है……………. हम अनेकता में एकता के पाठ को भूल रहें है। अब वक्त बहस-मुहाबिसों का नहीं वक्त है मजबूत सटीक और देश हित में निर्णय लेने का । पाक की नापाक हरकतों पर रोक लगाने का। होश में हमनें बहुतेरे काम किये है। पर सेना को आर्डर की जरुरत है और बूढें शासक युद्ध के नाम पर कांपने लगते हैं। उनकी शिराओं का रक्त सूख रहा है पर नौजवान पीढी बदला चाहती है ……देश जांबाजों ने देश के लिए बलिदान दिया उसका जवाब पाकिस्तान को दिया जाना जरुरी है। भारत को सरहद पर किये पाक के घिनौने कृत्य के लिए उसे सजा देनी चाहिए , पाक अब माफ करने के काबिल नहीं है। उसे मंुहतोड जवाब देना चाहिए।
वन्दे मातरम्! वन्दे मातरम!!
इन्कलाब जिन्दाबाद

पाक के नापाक इरादे और भी मजबूत होते जा रहे है और इसकी वजह है भारत उसे अब तक कडा जवाब देने में असफल रहा है । ईंट का जवाब पत्थर से की जगह भारत बार बार अदने से पाकिस्तान से मात खा रहा है । पांच भारतीय जवानों को गश्त करते वक्त मौत के घाट उतार देना बडा दुर्भाग्यपूर्ण और दुःखद है – यह सम्पूर्ण भारत के लिए दुःख का विषय है परंतु अब मात्र दुःख व्यक्त करने से कोई काम नहीं चलने वाला है । इस वक्त जरुरत है तो पाकिस्तान को एक कडे जवाब देने की -वो भी उसी की भाषा में। हत्या की है तो इसका इंतकाम भी पाकिस्तान के आंतकी सिपाहियों को ढेर करके ही लिया जा सकता है। भारत के नपुंसक शासक कुछ नहीं कर पाते। पाक बार बार हमारी सीमाओं पर आक्रमण करता है। कभी हमारे सिपाहीं के शीश काट ले जाता है – हम सहते है पूरे गर्व से सहते हैै और सैनिकों की शहादत को जाया जाने देते है- यदि इसे सहनशीलता कहा जाता है तो धिक्कार है ऐसी सहन शक्ति पर जो नपुंसकों को भी लज्जित कर दें। जब रणबांकुरे देश के लिए मर-मिटने को तैयार है , सर्वस्व समर्पित करने को तैयार है तो तो फिर रण का बिगुल अब तक क्यों नहीं बजाया गया । क्यूं बार बार इसकी कीमत हमारे जांबाज सैनिकों को चुकानी पडी। इन हमलों से साफ जाहिर है कि पाक कभी शांति चाहता ही नहीं था और न ही अब वो शांति प्रंक्रिया को बनाये रखना चाह रहा है और ये भी साफ है कि पाकिस्तान के सैनिक अभियानों में आंतकवादियों को पूर्ण सहयोंग रहता है। बल्कि यदि कहें कि पाकिस्तानी सेना भी आंतकवादियो ंसे कमतर नहीं है तो अतिशयोंक्ति न होगी। पाक नापाक है । वो जब से विलग हुआ है तब से भारत के खिलाफ उसके अभियान जारी रहे है और हम एकतरफा की शांति बहाली की कोशिशें बराबर करते रहें । नतीजा सामने है। वो तो छापामार युद्ध कर रहा है और हम उस पर रहम करते जा रहे है। रहम भी उस पर जो बार बार हमारी गर्दन पर छुरा चला रहा हो। पाक हमेशा से आतंकियो ंका गढ रहा हैं । जेहाद के नाम पर चल रहे आतंकी अभियान मानवता पर कहर बरपा रहे है और मानवीयता को तार तार कियें। ये कैसी लडाई लड रहें है ये बुजदिल लोग जो छिपकर वार करना जानते है, जो पीठ में खंजर घोंपने के आदि हो चुकें हैं। पाक के नापाक चेहरे की तस्वीर बार बार उभर कर आती है और हम उसे फिर भी दुलारते रहे, पुचकारते रहें उसके साथ प्रेम की भाषा बोलते रहें और वो उदण्डता करता जा रहा है । इसे भारत का बडप्पन नहीं कहा जा सकता , ये मेरे मुल्क के प्रशासकों, शासकों की सबसे बडी बेवकूफी है। अब हमें इस तरह चुप होकर नहीं बैठना चाहिए। भारत के पावन सिंहासन को कलंकित करती ये सरकार देश को लज्जित करने में अपना जितना हो सका योगदान दे रही है।  ये बेहद दुर्भाग्य पूर्ण ही नहीं आत्मा को कचोटने वाला है कि हम पाकिस्तान के हाथों,…. एक अदने से मुल्क के हाथों शिकस्त खाते रहे है और वो हम पर हावी होता जा रहा है । तो क्या समझा जाऐ भारत अपनी प्राचीन परम्परा का निर्वाह नहीं कर पा रहा है! हमारी तोपो को बारुद खत्म है या बंदूकों में जंग लगा है। हम क्यों इतने भीरु हुए जा रहें है कि कोई हमारे गालों पर तमाचे लगाये जा रहा है और हम बिना रोये बिना चिल्लाये बिना उसका प्रतिकार किये सह रहें है। हम इस तरह खुद को महात्मा बना रहें हैं! महात्मा!! ……यदि आज विवेकानंद होते , भगत होते, सरदार पटेल होते, चंद्रशेखर होते तो भारत की इस दशा पर रो पडते ……फफक पडते ……….हमे गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले ंदेश के असंख्य कर्णधार इस परिस्थिति में क्या चुप रहते ? मौन साधते? या फिर क्रांति का बिगुल बजता। क्रांति आज जरुरी है । देश के रक्षा मंत्री ही पाकिस्तान की इस करतूत पर आहत तो क्या होते वरन उसे क्लीनचिट दे देते है – ये दुर्भाग्य है वतन का कि जो इसकी आबरु को तार तार किये जा रहे है उन्हें पर हम रहमत बरसा रहे हैं।

देश की आंतरिक हालत बेहद नाजुक है। ये आंतरिक बहस का वक्त नहंी है ये है इस सम्पूर्ण मामलें को , पूरे प्रकरण को देश भावना से जोडना चाहिए न कि एक दूसरे को नीचा दिखाने में वक्त जाया करना चाहिए। फब्तियां कसना सीखना हो तो राजनीतिक गलियारों में होने वालो कार्यक्रमों में शिरकत करके आसानी से सीखी जा सकती है। देश को आंतरिक रुप से बंाटने की साजिश हो रही है। राज्यों का बंटवारा …..लोगो का बंटवारा ………आत्मा का बंटवारा ……..बंटवारें की राजनीति, देश को भुला रहीं है……………. हम अनेकता में एकता के पाठ को भूल रहें है। अब वक्त बहस-मुहाबिसों का नहीं वक्त है मजबूत सटीक और देश हित में निर्णय लेने का । पाक की नापाक हरकतों पर रोक लगाने का। होश में हमनें बहुतेरे काम किये है। पर सेना को आर्डर की जरुरत है और बूढें शासक युद्ध के नाम पर कांपने लगते हैं। उनकी शिराओं का रक्त सूख रहा है पर नौजवान पीढी बदला चाहती है ……देश जांबाजों ने देश के लिए बलिदान दिया उसका जवाब पाकिस्तान को दिया जाना जरुरी है। भारत को सरहद पर किये पाक के घिनौने कृत्य के लिए उसे सजा देनी चाहिए , पाक अब माफ करने के काबिल नहीं है। उसे मंुहतोड जवाब देना चाहिए।

वन्दे मातरम्! वन्दे मातरम!!

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