blogid : 9509 postid : 268

चन्द्रमा

Posted On: 11 Aug, 2012 Others में

शंखनादयदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् || परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||

कुमार गौरव अजीतेन्दु

61 Posts

588 Comments

चन्द्रमा लुभाता है
नयनों को,
देता है शीतलता
मन-अंतर-आत्मा को,
करता है दूर
थकान दिन भर की,
मिलती है शांति
इसकी छत्रछाया में,
मिलता है सुअवसर
कुछ विचारने का,
मनन करने का,
अगले दिन के लिए ;
चन्द्रमा साक्षी है
सम्पूर्ण घटनाओं का,
करता है सचेत
गलतियों का दोहराव न हो,
सत्कार्यों का विराम न हो,
इसका निर्मल प्रकाश
कहता है हमसे,
शिक्षा लो अपनी भूलों से,
प्रेरित हो पुण्यकर्मों से,
संकल्प ले लो
एक नए युग के आरम्भ का |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग