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जानवर भी सोचते हैं

Posted On: 2 Dec, 2010 Others में

KADLI KE PAAT कदली के पातचतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

R K KHURANA

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जानवर भी सोचते हैं

मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत  थे ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए !

मैं रेलवे लाईन के साथ साथ सर्वे कर रहा था ! हमारी पार्टी में कुल दस आदमी थे ! दो सर्वेयर और आठ मजदूर ! हम लोग अपना कैम्प रेलवे लाईन के साथ किसी गांव के पास जहां अच्छा समझते थे, लगा लेते थे और अपना काम करते रह्ते थे !

हम लोगों ने सर्वे करते-करते एक नई जगह पर अपना कैम्प लगा दिया ! शाम का समय था ! हम लोग चाय आदि पीकर बैठे ही थे कि हमने देखा कि हमारे कैम्प की तरफ एक जंगली हाथियों का झुंड आ रहा है ! मैं बहुत परेशान हो गया क्योंकि जंगली हाथी बडे खतरनाक होते हैं  हमारी पार्टी में जो मज़दूर थे उन्होंने हमें कहा कि आप चिंता न करें ! हम इन हाथियों को खदेड देंगे ! लेकिन उनके इतना कहने पर भी मेरी चिंता कम नहीं हुई ! हाथी बडी ही मस्त चाल से चले आ रहे थे !

जब हाथियों का झुंड कुछ नज़दीक आया तो हमने जो दृश्य देखा उसे देख कर हमारे आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा !  हमने देखा कि सबसे आगे एक हथिनी आ रही थी और उसकी पीठ पर एक 14-15 साल की लडकी बिल्कुल नंगी बैठी थी ! उस झुंड में कुल मिला कर आठ-दस हाथी थे ! हमारे कैम्प के पास आकर वो सभी हाथी रुक गए ! जिस हथिनी पर वो लडकी सवार थी वह हथिनी नीचे बैठ गई ! और वो नंगी लडकी नीचे उतर कर हमारे कैम्प में आ गई ! बाकी सब हाथी उसी प्रकार से खडे रहे ! हमने उस लडकी को कुछ रोटियां और बिस्कुट जो हमारे पास थे, उसको दे दिए ! उस लडकी ने रोटी को सूंघा फिर बिस्कुट को सूंघा और तब उनको चखा ! फिर वह लडकी भी हाथियों कि तरह चिंघाडने लगी और वापिस हाथियों के चली गई ! उसने प्रत्येक हाथी को रोटी और बिस्कुट खिलाए और खुद भी खाए ! खाने के बाद उसी प्रकार से वह लडकी हाथिनी पर बैठ गई ! और सब हाथी चुपचाप वापिस चले गए ! तब हमारी जान में जान आई !

बाद में पता करने पर मालूम हुआ कि कुछ साल पहले इस हथिनी का एक बच्चा मर गया था ! हथिनी बच्चे को मरा पाकर पागल सी हो गई ! रात को पागलों की तरह घूमती हुई एक गांव की तरफ निकल पडी ! रास्ते में रेल की लाईन पर फाटक लगा हुआ था ! रात होने के कारण गेटकीपर ने फाटक बन्द कर रखा था ! उस पागल हथिनी ने गेट को तोड दिया ! गर्मी का मौसम था ! दूसरी ओर गेटकीपर अपनी पत्नी व एक साल की बच्ची के साथ अपने क्वार्टर के बाहर ही सो रहा था ! उसको रहने के लिए रेलवे के ओर से एक कवार्टर मिला हुआ था ! गेट के टूटने की आवाज़ सुन कर वह हडबडा कर उठ खडा हुआ ! उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया कि क्या हुआ है ! इतनी ही देर में वह हथिनी उसके सिर पर सवार हो गई ! बडी मुश्किल से गेटकीपर और उसकी पत्नी अपनी जान बचा कर अपने क्वार्टर में भाग गए ! परंतु उनकी एक साल की बच्ची वहीं बाहर ही रह गई ! बस उस बच्ची को वह हथिनी उठा लाई !

तब से अब तक वह लडकी इन्ही हाथियों के साथ रहती थी ! उसी हथिनी ने ही पाल पोस कर इस लडकी को इतना बडा किया था ! वह लडकी भाषा के नाम पर सिर्फ हाथियों की तरह चिन्घाड ही सकती थी ! इसके अलावा और कुछ नहीं जानती थी ! उस लडकी के मां-बाप उसे देखते थे और सब गांव वाले भी जानते थी कि यह उनकी लडकी है ! सभी उनको रोटियां और खाने की वस्तुएं देते थे परंतु कोई भी उस लडकी को हाथ भी नहीं लगा सकता था ! उनको हमेशा यह डर लगा रहता था कि यदि किसी ने जबरदस्ती उस लडकी को छीनने की कोशिश की तो यह हाथी सारे गांव को ही उजाड देंगें ! इसलिए सभी लोग उस लडकी को खुश रखने की कोशिश करते थे !

हमारा कैम्प वहां पर चार दिन तक रहा ! चार दिनों तक लगातार वो हाथियों का झुंड हमारे कैम्प के पास आता और हम हर रोज़ उन्हें कुछ न कुछ खाने को देते ! जिससे वे खुश होकर जांए ! हमें यह भी मालूम हुआ कि सभी हाथी उस लडकी की अध्यक्षता में रहते थे ! बिना उस लडकी की इज़ाज़त के न तो वे हाथी कोई चीज़ खाते थे और न ही किसी पर हमला करते थे !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

khuranarkk.jagranjunction.com

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