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रंग दे गुलाबी चोला (चैलेंज का जवाब)

Posted On: 12 Jul, 2010 Others में

KADLI KE PAAT कदली के पातचतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

R K KHURANA

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रंग दे गुलाबी चोला (चैलेंज का जवाब)

राम कृष्ण खुराना

तो बात यहां से शुरू होती है कि हमारे एक ब्लागर भाई हैं सन्नी राजन जी ! अरे नहीं आप गलत समझ गए ! ये “मुन्नाभाई” वाले भाई नहीं है ये तो “भईया मेरे राखी के बन्धन को निभाना” वाले भाई हैं ! अब जागरण वाले परिणाम घोषित करने में देरी कर रहे थे !  परंतु शायद राजन जी को पता नहीं है कि जागरण वालों पर कितनी जिम्मेदारियां हैं ! दैनिक जागरण समाचार पत्र 11 राज्यों से प्रकाशित होता है तथा इसके 37 संस्करण छपते हैं और साढे पांच करोड से ज्यादा पाठक हैं ! मेरी जानकारी के अनुसार कदाचित यह हिन्दी का विश्व में सर्वाधिक पढा जाने वाला समाचार पत्र है ! (भगवान करे यही सत्य हो ! मेरा जागरण टीम से नम्र निवेदन है कि यदि इसमे कुछ गलत हो तो कृप्या मुझे बताएं) इसके अतिरिक्त पत्रिकायें हैं, जागरण जंकशन मंच है तथा और अन्य कई प्रकार के काम हैं ! जिनकी देख-रेख इन्हें करनी पडती है ! इनके हज़ारों कर्मठ कार्यकर्ता टीम वर्क में विश्वास करते हुए सभी कार्य सुचार रूप से मिलजुलकर कर रहे हैं ! लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिला हुआ है ! तो देरी होना तो स्वाभाविक है !

जैसे कि मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि मैं इस जागरण मंच का सदैव ऋणी रहूंगा ! यहां पर इतने अच्छे लेखक और पाठक मिले इतना बडा परिवार मिला जो अन्यत्र सम्भव न था ! इस मंच पर आकर साहित्य के समुद्र में डुबकी लगाने का मौका मिला ! दिल को छीलकर निकल जाने वाले व्यंग, ज्ञान वर्धक लेख, गुलाब की पंखुडियों की कोमलता लिए कवितांए, विज्ञान के नए-नए प्रयोग, ज्योतिष के उपाय, उसके साथ अरविन्द पारीक जी द्वारा हिन्दी टाईपिंग का तोहफा, जिसकी बदौलत इस “कदली के पात” का इतना लम्बा सफर तय हो पाया ! सब कुछ एक ही छत के नीचे ! सब कुछ एक ही मंच पर !

हां तो मैं बता रहा था कि जागरण वाले परिणाम घोषित करने में देरी कर रहे थे  तो सन्नी  जी ने सोचा चलो एक शोशा छेड देते हैं ! लिखने वाले भी व्यस्त हो जायेंगे और पढने वाले भी  जैसा कि चातक जी ने मेरी हास्य कथा “हुआ कुछ भी नहीं” के बारे में कहा सन्नी जी सफेद शर्ट वाले लडके की तरह मज़ा लेते रहेंगें ! इन्होंने टाप 10 वालों को एक चैलेंज दे दिया कि भाई गुलाबी रंग पर कुछ कलम घसीट कर दिखाओ ! वैसे सन्नी जी स्वयं भी कई “कार” के मालिक हैं ! बहुत अच्छे कथाकार हैं, अच्छे व्यंगकार हैं, अच्छे प्रतिक्रियाकार हैं !  सन्नी जी को गुलाबी रंग बहुत पसंद है ! यह जो भी प्रतिक्रिया देते हैं गुलाबी रंग में डुबो कर देते हैं !

अरे सच, प्रतिक्रियाकार से याद आया ! हमारी अदिति बिटिया बडी अच्छी प्रतिक्रियाकारा हैं ! प्रत्येक रचना पर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देती हैं ! इनकी प्रतिक्रियाओं को देखते हुए मैंने तो जागरण वालों से आग्रह कर दिया है कि अगली बार प्रतिक्रियाकार का मुकाबला करा दें ! मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रथम स्थान इन्हें ही मिलेगा ! यह प्रतिक्रिया रचना पढकर नहीं देतीं बल्कि रचना को तौल कर देती हैं ! इन्होंने रचनायें तौलने के लिए एक विशेष प्रकार का तराज़ू ले रखा है ! बस रचना उठाई, तराज़ू पर रखी, वज़न देखा और प्रतिक्रिया लिख मारी ! हो गया काम !

पिछले दिनों इनका फोन आया तो बहुत दुखी लग रही थीं ! मैंने फोन पर जब “हैल्लू..ऊ…ऊ..ऊ” कहा तो मेरा बोलने का स्टाईल पहचान कर एकदम से उबल पडीं –“चाचा जी, मेरा तो बहुत नुकसान हो गया !”

”क्या हुआ बिटिया रानी ?” मैंने बडे प्यार से कुछ तसल्ली देने के अंदाज़ में पूछा !

”चाचा जी, मेरा तराजू जिससे मैं रचनायें तौलती थी वो टूट गया !” उसने बहुत उदास होकर अपना दुखडा सुनाया !

”मगर यह कैसे हो सकता है ?” मैंने फिर प्रश्न दाग दिया ! “उस तराजू की डंडी पर तो गुलाबी पेंट करवाया हुआ था ! पिंक – द कलर आफ प्रास्पेरिटी ! सौभाग्य का सूचक ! फिर वो कैसे टूट गया ?”

”चाचा जी, हुआ ऐसे कि पिछ्ले दिनों आपका वो व्यंग आया था न “कौन बनेगा ब्लागपति” वो बहुत भारी था ! मैंने जब उस व्यंग पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए उसको पलडे पर रखा तो पलडा ज्यादा वज़न होने के कारण एकदम झटके से नीचे झुक गया और डंडी पर भार पडने से वो टूट गई !” अदिति ने रूआंसे होकर कहा !

उसके बाद फोन कट गया और वो गायब हो गईं ! लगभग एक-डेढ महीने पश्चात नया कम्पयूट्रीकृत तराजू लेकर आईं हैं और अब धडाधड प्रतिक्रिया दे रही हैं ! उन्होंने वादा किया है कि जो रचनायें छूट गई हैं एक एक करके उन पर भी प्रतिक्रिया दे दी जायगी ! मुझे यह गुप्त सूचना गुप्त रूप से मिली है अतः आप लोगों से निवेदन है कि आप भी इसे गुप्त ही रखें !

अब सन्नी जी तो चैलेंज देकर एक कोने में बैठ गए ! टाप 10 वालों के लिए एक मुसीबत खडी कर गए ! सांप के मुंह में छछुंदर वाली बात हो गई ! अब चैलेंज स्वीकार न करें तो भद्द् हो जायगी और स्वीकार करें तो क्या लिखें ! गुलाबी रंग तो भई गुलाबी ही होता है ! अब इसके बारे में क्या लिखा जाय ! दूसरी ओर इन्होंने विषय विदेशी भाषा में लिख दिया ! पिंक – द कलर आफ प्रास्पेरिटी ! आप तो जानते ही हैं की विदेशी भाषा में हमारा हाथ ज़रा तंग है ! अब क्या करें ? सोचा टीचर दीदी के पास जाकर इसका अर्थ पूछते हैं ! लेकिन वो डांटती बहुत हैं ! मुझे दो लोगों की डांट सबसे ज्यादा सुननी पडती है ! एक टीचर दीदी की और दूसरी अपनी धर्म की पत्नी की ! यह जागरण वाले डांट खाने वालों की प्रतियोगिता नहीं करवा सकते क्या ? वो क्या है न कि यदि ऐसी प्रतियोगिता हो जाय तो गुलाबी रंग का करीना कपूर के विज्ञापन वाला स्लीक सा लैपटाप जीतने का चांस हमारा ही बनता है !

लैपटाप की भी बडी समस्या है ! एक लैपटाप हज़ार बीमार वाली कहावत हो गई ! अरविन्द पारीक जी को लैपटाप की सख्त जरूरत थी ! बेचारे कैफे में जाकर अभी कुछ रचनाओं को उलट-पलट कर पूरी तरह से देख भी नहीं पाते हैं कि समय समाप्ति की घोषणा हो जाती है ! जागरण की तरफ से लैपटाप मिल जाता तो रज़ाई में दुबके-दुबके भी अपनी “लैप” खोलते और उस पर “टाप” रख कर लेख लिख मारते ! उधर द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित हमारे प्यारे मुरली मनोहर जी के साहबज़ादे को भी लैपटाप ही चाहिए था ! परंतु जागरण वालों ने कुछ अपरिहार्य कारणों से देने से मना कर दिया ! वैसे यदि मिश्रा जी चाहें तो बेटे के गले में ‘लैपटापों’ का हार बना कर पहना सकते हैं ! परंतु कृष्ण मोहन जी ठहरे सिविल लाईन वाले हनुमान जी के परम भक्त ! आप तो जानते ही हैं कि आज कल अदालतों में बिना रिश्वत व झूठ के पत्ता भी नहीं हिलता ! मिश्रा जी का मानना है कि बच्चों की पढाई के लिए मेहनत व सच्चाई से कमाया हुआ धन ही खर्च करना चाहिए ! इसलिए वे जज के सामने बहस करते हुए जितने प्रतिशत सच बोलते हैं अपनी ली हुई फीस में से उतने प्रतिशत हिस्सा अलग निकाल लेते हैं ! उनको उम्मीद है कि आठ-दस सालों में लैपटाप खरीदने लायक पैसा इकट्ठा हो जायगा तब वो अपने बेटे को वही गुलाबी रंग वाला लैपटाप ले देंगें ! भगवान उनके बेटे को लम्बी आयु दे व उसकी हर ख्वाहिश पूरी करे ! लेकिन बेटे आपने इस मंच के अंकल आंटियों को अपना नाम तो बताया ही नहीं !

वैसे लैपटाप लेने वाले को लाईन बहुत लम्बी है ! क्योंकि लैपटाप का नशा ही ऐसा है ! लोग तो लैपटाप लेकर अंग्रेज़ी सीट पर बैठकर “निपटते” वक्त भी अपनी उंगलियां की-बोर्ड पर लहराते रहते हैं ! उनका मानना है कि जो आराम, जो बेफिक्री, जो शांति यहां काम करने में मिलती है वो और कहीं नहीं ! यहां घंटों बैठे बिना रोक-टोक के काम किया जा सकता है ! मेरी तो जागरण वालों से गुज़ारिश है कि कम से कम टाप 10 की परीक्षा पास करने वालों को तो उपहार स्वरूप एक-एक लैपटाप दे ही दें ! चाहे छोटा दस इंच का सस्ता वाला ही दे दें !

अब समस्या यह थी कि इस विदेशी भाषा का अनुवाद किससे करवायें ! हमारे पास तो कोई ठोस साधन है नहीं ! या तो इंगलिश और हिन्दी के 5-7 शब्दकोशों से मगज़-पच्ची करें ! या गूगल में जाकर सर्च मारें ! गूगल वाले तो अंग्रेज हैं ! वो तो यही कहते हैं कि गुलाबी रंग प्राकृतिक ही नहीं है ! उनका कहना है कि गुलाबी रंग कोई रंग ही नहीं है ! यह लाल और सफेद रंग को मिला कर बना है ! अरे गूगल वालों लुधियाना आकर देख लो ! आपकी आंखे खुल जांयगी ! यहां पर एक रोज़-गार्डन है ! चारों ओर गुलाब ही गुलाब खिले पडे हैं ! भगवान की सुन्दर सृष्टि ! प्रकृति का अद्भुत नज़ारा ! बिना रंगों की मिलावट के गुलाबी-गुलाबी गुलाब ! प्यार का प्रतीक गुलाब ! सौभाग्य का सूचक गुलाब ! वेलेनटाईन डे का सस्ता और अहम उपहार !

तो बात यहां पर खत्म होती है की मैंने और मिहिर जी ने तो आपके चैलेंज का गुलाबी चोला रंग दिया अब बाकी बचे आठ से आप खुद निपटिए !

नोट :

[मेरी इस रचना में या अन्य किसी भी आलेख में यदि किसी का नाम आया है तो वह प्रसंगवश, लेख को मनोरंजक व अधिक हास्यास्पद बनाने और आप सब को गुदगुदाने के लिए ही किया गया है ! यह किसी भी प्रकार की दुर्भावना से ग्रसित नहीं है ! फिर भी यदि किसी को इससे ज़रा सी भी चोट पहुंची हो या दुख हुआ हो तो मैं हाथ जोडकर – जी हां – हाथ जोडकर माफी चाहता हूं !]

राम कृष्ण खुराना

9988927450

https://www.jagranjunction.com/khuranarkk

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